बिहार विधानपरिषद के चुनाव में बड़ा बदलाव, पंच-सरपंच को मिला वोट का अधिकार

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January 29, 2026

बिहार विधानपरिषद के चुनाव में बड़ा बदलाव, पंच-सरपंच को मिला वोट का अधिकार

पटनाः बिहार में विधानपरिषद के चुनाव में वोटिंग को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। बिहार में अब विधान परिषद (MLC) के चुनाव में पंच और सरपंच भी वोट डाल सकेंगे। केंद्र सरकार के पंचायती राज मंत्रालय ने संवैधानिक प्रावधानों के तहत उन्हें ‘स्थानीय निकाय का पात्र मतदाता’ मानते हुए यह अधिकार दिया है। इससे न केवल हजारों नए मतदाता जुड़ेंगे,बल्कि एमएलसी चुनाव की रणनीति और गणित दोनों पूरी तरह बदल जाएंगे।

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गांव की अदालत से विधान परिषद तक बढ़ी भागीदारी
अब तक विधान परिषद के स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्रों में मुखिया, वार्ड सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य और नगर निकायों के प्रतिनिधि ही मतदान करते थे। ग्राम कचहरी के प्रतिनिधि यानी पंच और सरपंच इस प्रक्रिया से बाहर थे।जबकि गांव स्तर पर न्यायिक और सामाजिक भूमिका निभाने के बावजूद उनकी राजनीतिक भागीदारी सीमित थी। इस फैसले से पहली बार उन्हें भी विधान परिषद के गठन में सीधी भूमिका मिल गई है।

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संविधान ने खोला रास्ता
केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय ने अपने पत्र में संविधान के अनुच्छेद 171(3)(A) और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम का हवाला दिया है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि ग्राम पंचायतें ‘स्थानीय निकाय’ की श्रेणी में आती हैं। इसलिए ग्राम पंचायत के सभी निर्वाचित प्रतिनिधि, जिनमें पंच और सरपंच भी शामिल हैं, एमएलसी चुनाव में मतदान के पात्र हैं। यानी यह फैसला केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि पूरी तरह संवैधानिक आधार पर लिया गया है।बिहार में पंच और सरपंचों की संख्या हजारों में है। उनके जुड़ने से मतदाता सूची का आकार अचानक बड़ा हो जाएगा। इसका सीधा असर उम्मीदवारों की रणनीति पर पड़ेगा।अब एमएलसी प्रत्याशी केवल मुखिया और वार्ड सदस्यों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें गांव-गांव जाकर पंच और सरपंचों को भी साधना होगा। इससे चुनावी संपर्क का दायरा और राजनीतिक सक्रियता दोनों बढ़ेंगी।

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ग्राम कचहरी को मिलेगा नया सम्मान
लंबे समय से पंच-सरपंच संघ यह मांग करता रहा था कि उन्हें भी अन्य पंचायत प्रतिनिधियों की तरह समान राजनीतिक अधिकार मिलना चाहिए। अब जब उन्हें वोट देने का अधिकार मिल गया है, तो स्थानीय न्याय व्यवस्था और पंचायत प्रणाली को नई पहचान और मजबूती मिलेगी। पंच और सरपंचों को एमएलसी चुनाव में शामिल करना बिहार के लोकतांत्रिक ढांचे को और व्यापक बनाता है। यह फैसला दिखाता है कि सत्ता के गलियारों में अब गांव की अदालत की आवाज भी सीधे पहुंचेगी।

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