लालू परिवार को जमीन के बदले नौकरी मामले में मिली बड़ी राहत, फिलहाल कोर्ट आने की जरूरत नहीं

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January 29, 2026

लालू परिवार की मुश्किलें बढ़ीं, तेजस्वी, राबड़ी, सहित 41 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा शुरू

 पटना: लैंड फॉर जॉब मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के खिलाफ मुकदमे को मंजूरी दे दी है। पत्नी, बेटे-बेटी समेत कुल 41 आरोपियों पर आरोप तय किए गए हैं। इसके साथ ही अब इस मामले में नियमित ट्रायल चलेगा।

जमीन के बदले नौकरी मामले में गुरुवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें अदालत ने लालू परिवार को बड़ी राहत दी। कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव को पहली से 25 फरवरी के बीच औपचारिक रूप से आरोप तय किए जाने के दौरान सशरीर अदालत में उपस्थित होने से छूट दे दी है।

सुनवाई के दौरान लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट में पेश हुए। वहीं, पाटलिपुत्र से राजद सांसद और लालू की बड़ी बेटी मीसा भारती तथा उनकी बहन हेमा यादव खुद अदालत पहुंचीं। दोनों ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया।

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सुनवाई नौ मार्च से शुरू करने का आदेश

कोर्ट ने मामले की नियमित सुनवाई नौ मार्च से शुरू करने का आदेश दिया है। इस दौरान ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और अभियोजन पक्ष के सबूत रिकॉर्ड किए जाएंगे। यह मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) द्वारा दर्ज किया गया है। गौरतलब है कि नौ जनवरी को अदालत ने लालू परिवार समेत कुल 41 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे, जबकि 52 लोगों को इस मामले में बरी कर दिया गया था। अब शेष आरोपियों के खिलाफ नियमित रूप से मुकदमा चलेगा।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

पिछली सुनवाई के दौरान स्पेशल जज विशाल गोग्ने ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि लालू यादव और उनका परिवार एक आपराधिक गिरोह की तरह काम कर रहा था। अदालत के अनुसार, सरकारी नौकरियों के बदले संपत्ति हासिल करने की एक सुनियोजित साजिश रची गई।

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नौकरी को बनाया गया सौदेबाजी का हथियार

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि संदेह के आधार पर यह पाया गया है कि रेल मंत्री रहते हुए लालू प्रसाद यादव ने सरकारी नौकरी को सौदेबाजी का जरिया बनाया। इसका उद्देश्य अपने परिवार के लिए अचल संपत्तियां हासिल करना था।

CBI के दस्तावेजों पर अदालत की राय

राउज एवेन्यू कोर्ट ने CBI की चार्जशीट और दस्तावेजों पर विचार करते हुए कहा कि जांच एजेंसी द्वारा पेश तथ्यों से गंभीर आरोप सामने आते हैं। नौकरी और जमीन के बीच कथित लेन-देन के संकेत स्पष्ट हैं, जिनकी जांच ट्रायल में की जानी चाहिए।

केवल नियुक्ति नहीं, संगठित साजिश का मामला

अदालत ने कहा कि यह केस सिर्फ अनियमित नियुक्तियों तक सीमित नहीं है। जमीन के ट्रांसफर, कीमतों में गड़बड़ी, परिवार और करीबियों के नाम संपत्तियां और उनसे जुड़े कारोबारी लेन-देन—इन सभी का आपसी संबंध जांच का विषय है।

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आरोप तय होना दोष सिद्ध होना नहीं

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोप तय होने का मतलब दोष सिद्ध होना नहीं है। बचाव पक्ष को ट्रायल के दौरान CBI के साक्ष्यों को चुनौती देने का पूरा अवसर मिलेगा।

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2004 से 2009 के बीच रची गई साजिश

CBI के मुताबिक यह पूरी साजिश 2004 से 2009 के बीच रची गई, जब लालू यादव रेल मंत्री थे। इस दौरान अलग-अलग रेलवे जोनों में ग्रुप-डी पदों पर नियुक्तियां की गईं और बदले में जमीनें लालू परिवार के नाम कराई गईं।

परिवार के सदस्यों पर भी आरोप

जांच एजेंसी ने लालू यादव के साथ-साथ राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेजप्रताप यादव, सांसद मीसा भारती और हेमा यादव के खिलाफ भी चार्जशीट दायर की है। आरोप है कि नाम मात्र की कीमत पर जमीन ट्रांसफर कराई गई।

अब आगे क्या होगा

कोर्ट के आदेश के बाद इस मामले में ट्रायल चलेगा, जिसमें सबूत और गवाहों के आधार पर अंतिम फैसला होगा। वहीं, लालू यादव के पास लोअर कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देने का विकल्प भी मौजूद है।

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