किसानों के बीच इतना भय क्यों? गले में लोहे की कील वाली कॉलर पहनने को मजबूर

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पुणे जिले के कुछ गांवों में लोगों को तेंदुए के हमलों का डर सता रहा है। अब वे अपनी जान बचाने के लिए गले में लोहे की कील वाली स्पाइक कॉलर पहनने को मजबूर हैं। पिंपरखेड़ गांव के विठ्ठल रंगनाथ जाधव ने बताया, ‘हम तेंदुए के डर से गले में स्पाइक वाला कॉलर पहनते हैं। तेंदुआ कभी भी आ जाता है। हम अपनी जान बचाने के लिए ऐसा कर रहे हैं। खेती हमारा इकलौता रोजगार है। डर के मारे घर में बैठ नहीं सकते।

रोज तेंदुए का दिखना आम बात हो गई है। एक महीना पहले मेरी मां तेंदुए का शिकार बनी थी। उससे पहले एक छोटी बच्ची को तेंदुआ मार चुका था। सुबह 6 बजे मां गाय-भैंस को चारा डालने निकली थी, तभी तेंदुए ने हमला कर दिया और उन्हें करीब एक किलोमीटर तक गन्ने के खेत में घसीट ले गया। गांव में हर कोई बहुत डरा हुआ है। घर से बाहर निकलते ही हम यह कॉलर पहन लेते हैं। सरकार से गुजारिश है कि जल्द से जल्द कुछ किया जाए।’

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गांव के एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि तेंदुए के लगातार हमलों ने पूरी दिनचर्या प्रभावित कर दी है। अब लोग खेती करने भी झुंड बनाकर जाते हैं। स्कूल के समय में भी बदलाव पर विचार हो रहा है। उन्होंने कहा, ‘बहुत बड़ी समस्या है। लोग झुंड बनाकर खेती करने आते हैं। गले में लोहे की कीलों वाला कॉलर पहनते हैं। हालात बहुत खराब हैं। स्कूल के समय भी बदलने की मांग हो रही है। सुबह 9 बजे की जगह दोपहर 4 बजे तक करने की बात चल रही है। कई लोग तो खेती करने भी नहीं आ रहे।’

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बता दें कि पिछले 20 दिनों में पिंपरखेड़ और आसपास के इलाके में तीन लोगों की जान नरभक्षी तेंदुए ले चुके हैं। 5 नवंबर को वन विभाग और रेस्क्यू टीम की संयुक्त कार्रवाई में उसे मार गिराया गया था। फिर भी क्षेत्र में दूसरे तेंदुए सक्रिय हैं, जिस कारण लोगों का डर बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, 12 अक्टूबर से अब तक अलग-अलग हमलों में 5 साल की बच्ची, 82 वर्षीय महिला और 13 वर्षीय लड़के समेत तीन लोगों की मौत हुई।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पुणे के कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट आशीष ठाकरे ने प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट से तेंदुए को न्यूट्रलाइज करने की इजाजत हासिल कर ली है। इसके लिए वेटरनरी डॉक्टर सात्विक पाठक और शार्पशूटर्स जुबिन पोस्टवाला व डॉ. प्रसाद दाभोलकर की टीम तैनात की गई है।

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