रामविलास-मांझी-अशोक चौधरी के दामाद के बाद अब संजय झा की बेटियों को लेकर बवाल, सुप्रीम कोर्ट में सरकार की वकील बनीं दोनों बहनें

रामविलास-मांझी-अशोक चौधरी के दामाद के बाद अब संजय झा की बेटियों को लेकर बवाल, सुप्रीम कोर्ट में सरकार की वकील बनीं दोनों बहनें

पटनाः बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए नेताओं के दामादों को अलग-अलग आयोगों में जगह दिये जाने को लेकर राजीतिक घमासान छिड़ा हुआ है। अब ताजा विवाद जेडीयू नेता और राज्यसभा सांसद संजय झा की दोनों बेटियों को सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से वकील बनाये जाने को लेकर शुरू हो गया है। आरजेडी ने अपनी ओर से इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

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बिहार राज्य अनुसूचित जाति आयोग में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के बहनोई मृणाल पासवान और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के दामाद देवेंद्र मांझी, बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड में बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौघरी के दामाद सायन कुणाल को जगह दी गई है। हालांकि अशोक चौधरी ने इस मामले में सफाई देते हुए कहा कि सायन के चयन में उनकी कोई भूमिका नहीं उनका मनोनयन आरएसएस के कोटे से हुआ है।

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नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इन सबको लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से कहा है कि वो एक जमाई आयोग गठन कर ले। उन्होने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रधान सचिव दीपक कुमार की पत्नी रश्मि रेखा सिन्हा को महिला आयोग का सदस्य बनाये जाने पर भी सवाल उठाया है। अब आरजेडी ने जेडीयू सांसद और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा की बेटियों को सुप्रीम कोर्ट में सरकारी वकील बनाये जाने का विरोध किया है और सवाल भी उठाए है।

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आरजेडी के एक्स हैंडल से केंद्र सरकार के आदेश की कॉपी पोस्ट करके दलितों, पिछड़ों और अति पिछड़ों की हकमारी का सवाल उठाया है। कानून मंत्रालय के 9 अक्टूबर 2024 के आदेश के जरिए सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की तरफ से केस लड़ने के लिए संजय झा की बेटियों अद्या झा और सत्या झा की सेवा तीन साल के लिए ली गई है। कानून की पढ़ाई कर चुकी दोनों बेटियों की सेवा वकीलों के ग्रुप ए पैनल में ली गई है। बताते चलें कि केंद्र और राज्य सरकारें जिला से सुप्रीम कोर्ट तक वकीलों की सेवा लेती है, जिसके लिए पैनल में नाम होना चाहिए। जिल स्तर पर पीपी व एपीपी की सेवा भी इसी तरह ली जाती है।

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राजद ने ट्वीट में आरोप लगाया है कि संजय झा जी की दोनों बेटियों को कोई विशेष अनुभव नहीं है। राजद ने पूछा है कि जदयू के कितने दलित, पिछड़े और अति पिछड़े नेताओं, सांसदों, मंत्रियों या कार्यकर्ताओं के बेटे-बेटियों को यह विशेषाधिकार प्राप्त है कि बिना अनुभव यह उपलब्धि प्राप्त कर लें। राजद ने कहा है कि यह इस बात का उदाहरण है कि दलितों, पिछड़ों और अति पिछड़ों की प्रतिभा और अधिकार को छिनकर कुछ लोग कैसे जन्मजात श्रेष्ठ और मेरिटधारी बने रहने का स्वांग रचते हैं।


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