दो हिन्दू, एक मुसलमान..पहलगाम में बीजेपी कार्यकर्ताओं की कहानी सुन ‘नफरती’ नेताओं का सिर शर्म से झुक जाएगा

bjp cader arvind agrwal and poorva sthapak tell story of nazakat

पहलगामः आतंकी हमले के बेइंतहा दर्द से उपजे नफरत की आग कुछ किरदार और कहानियां भड़कने नहीं दे रहे हैं। इन्हीं कुछ किरदारों में है नजाकत चाचा, अरविंद अग्रवाल और पूर्वा स्थापक । दो हिन्दू  परिवार और एक मुसलमान। दो हिन्दू और एक मुसलमान जब मिल गए तो देश में आतंकियों द्वारा 26 लोगों की निर्मम हत्या के बाद  फैल रही नफरत की आग बूझ गई । इंसानियत और मोहब्बत के इसी जादू की वजह से शायद हिन्दुस्तान आज हिन्दुस्तान है और पाकिस्तान… पाकिस्तान है । 

पहलगाम में इंसानिय की कहानी

बीजेपी के बड़े-बड़े नेता सोशल मीडिया पर उल जलूल पोस्ट के जरिए कहीं कलमा पढ़ने की नसीहतें दे रहे हैं तो कहीं हर आतंक का धर्म बता रहे हैं ऐसे में मध्य प्रदेश की पूर्वा स्थापक द्वारा आतंक की आंखों देखी नजाकत चाचा की मोहब्बत ना सिर्फ पाक परस्त आतंकवाद के मंसूबों को नाकाम करता है बल्कि नफरती नेताओं की नापाक नीयत को भी नीचा दिखाता है।

बीजेपी कार्यकर्ता पूर्वा स्थापक की कहानी

पूर्वा स्थापक बीजेपी की कार्यकर्ता हैं । मध्य प्रदेश के चिरीमिरी की वार्ड संख्या 12 की पार्षद है । उनके इंस्टाग्राम पर 75 पोस्ट हैं जिनमें 74 बीजेपी कार्यकर्ता के तौर पर बधाईयां और दूसरे संदेश हैं लेकिन एक पोस्ट ऐसा है जो पहलगाम आतंकी घटना के ठीक पांच मिनट पहले लिया गया हैं । अपने मासूम बेटे को नजाकत चाचा के हवाल कर परिवार निश्चिंत था । नजाकत चाचा का धर्म भी भरोसे को टूटने नहीं दिया । खुद पूर्वा स्थापक लिखती हैं

आज भी वो घटना से पाँच मिनट पहले का ये वीडियो मेरे ज़हन में ठहरे हैं—जब आप मेरे बेटे के साथ खेल रहे थे, सब कुछ सामान्य था… और फिर अचानक वो हमला। गोलियों की आवाज़, चीख-पुकार… और उस खौफनाक मंज़र के बीच सिर्फ एक चीज़ ठहरी रही—आपकी हिम्मत।

आपने मेरे बेटे को सीने से लगाया, मेरे पति, पूजा भाभी और उनके बेटे को संभाला… और हमें मौत के साये से बाहर निकाल लाए। आपकी आँखों में डर नहीं था, सिर्फ इंसानियत थी।

आप उस दिन हमारे लिए भगवान बनकर आए थे।
आपने सिर्फ जान नहीं बचाई, हमारी पूरी दुनिया बचा ली।

मैं ये कर्ज़ ज़िंदगी भर नहीं भूल सकती।
आप हमेशा हमारी दुआओं में रहेंगे।

—आपकी हमेशा शुक्रगुज़ार
एक मां, एक पत्नी, एक बहन

पूर्वा स्थापक ने नजाकत का एहसान माना

पूर्वा अपने घर लौट चुकी हैं । उनके जेहन में देश और दुनिया को हिला देने वाली आतंक का जख्म तो है ही लेकिन साथ में है नजाकत चाचा का  मरहम जिसका वो एहसान ता उम्र नहीं चुका पाएंगीं।

बीजेपी कार्यकर्ता अरविंद अग्रवाल का पोस्ट

पूर्वा स्थापक की तरह एक और बीजेपी कार्यकर्ता हैं जो कश्मीर की वादियों में सुरक्षा की गारंटी की सरकारी गारंटी के बाद छुट्टियां मनाने गए थे । छत्तीसगढ़ के अरविंद अग्रवाल । उन्होंने भी इंस्टाग्राम पर दो पोस्ट साझा किए हैं । एक पोस्ट में वो लिखते हैं आपने अपनी जान दाव में लगाके हमारी जान बचायी , हम नज़ाकत भाई का एहशान कभी नहीं चुका पाएंगे।

नजाकत की वजह से फिर आएंगे पहलगाम

अरविंद अग्रवाल ने एक और पोस्ट लिखी। पहलगाम से अपने घर लौटते वक्त । हवाई जहाज में चेहरे पर खौफ और बच पाने की राहत के साथ । अरविंद अग्रवाल ने लिखा  कश्मीर हमारा है वो सारे का सारा है।।
ज़ल्द ही फिर से आऊंगा।।

नजाकत ने आतंकियों के मंसूबों को किया नाकाम

नजाकत भाई और नजाकत चाचा एक ही इंसान के नाम हैं लेकिन इंसानियत को उन्होंने आतंकियों के खूंखार और निर्मम हाथों से बचा लिया । जब-जब पहलगाम की कहानी लिखी जाएगी तो धार्मिक कट्टरता पर नजाकत चाचा और नजाकत भाई की दास्तां हावी होती रहेगी । पूर्वा स्थापक और अरविंद अग्रवाल..निशिकांत और इनके जैसे तमाम नेताओं को याद दिलाते रहेंगे… कार्यकर्ता जमीन हकीकत जानता हैं  उन्हें मत बरगलाएं …

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