हेमंत सोरेन बनेंगे JMM के अध्यक्ष, शिबू बनेंगे पार्टी के संरक्षक, कल्पना को मिलेगा बड़ी जिम्मेदारी!

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April 14, 2025

JMM केंद्रीय कार्यकारिणी समिति की हुई घोषणा, 8 उपाध्यक्ष बनाये गये, कल्पना सोरेन को मिली ये जिम्मेदारी

रांचीः झारखंड मुक्ति मोर्चा अपने सर्वश्रेष्ठ दौर से गुजर रही है। पार्टी के पास शिबू सोरेन के साथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और लोकसभा-विधानसभा चुनाव में पार्टी के स्टार प्रचारक रही कल्पना सोरेन तीन बड़े चेहरे है। शिबू सोरेन पार्टी के संस्थापक है और राष्ट्रीय अध्यक्ष भी है। बढ़ती उम्र की वजह से वो राजनीतिक रूप से बहुत सक्रिय नहीं है उनकी जिम्मेदारी को हेमंत सोरेन ने बखूबी निभाया है और पार्टी को संगठन के तौर पर और विधायकों की संख्या के तौर पर काफी आगे ले जाने का काम किया है।

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जेएमएम के राष्ट्रीय कार्यकारिणी में मंगलवार को बड़ा फैसला होना है। माना जा रहा है कि पार्टी में अबतक कार्यकारी अध्यक्ष की भूमिका निभाने वाले हेमंत सोरेन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष बन सकते है। शिबू सोरेन को पार्टी का संस्थापक और संरक्षक की भूमिका में रखा जा सकता है। कल्पना सोरेन को पार्टी के अंदर कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।

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स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के बावजूद शिबू सोरेन अपनी पत्नी रूपी सोरेन के साथ पार्टी के राष्ट्रीय महाधिवेशन में मौजूद रहे और हाथ उठाकर पार्टी के महाधिवेशन में मौजूद करीब चार हजार प्रतिनिधियों को आर्शीवाद दिया। मुख्यमंत्री और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन खुद विलचेयर पर अपने पिता और मां को लेकर अधिवेशन में पहुंचे और उन्हे अधिवेशन के बाद अपने साथ ले गये।

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पार्टी के संविधान संशोधन से संबंधित विधेयक पर मंगलवार को महाधिवेशन के अंतिम दिन मुहर लग जाएगी। इसके साथ ही नई केंद्रीय समिति का भी गठन होगा। हेमंत सोरेन ने झामुमो को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के दौर में पहुंचाया है। वर्ष 2015 में उन्हें झामुमो के 10वें महाधिवेशन के दौरान जमशेदपुर में कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था। शुरू में उनकी नेतृत्व क्षमता को लेकर संदेह प्रकट किया जाता था, लेकिन उन्होंने स्वयं को साबित कर दिखाया।नेता प्रतिपक्ष के पद पर रहते हुए उन्होंने संघर्ष यात्रा के जरिए तत्कालीन रघुवर दास सरकार के खिलाफ ऐसा माहौल बनाया कि भाजपा को वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में हार का मुंह का देखना पड़ा। हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री बने। एक-दो विधानसभा उपचुनाव को छोड़कर सभी उपचुनावों में भी उन्होंने बढ़त बनाए रखी।

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