नए वक्फ बोर्ड कानून का झामुमो ने किया विरोध, कहा- 1932 का खतियान हो स्थानीयता की पहचान

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रांचीः सत्तारुढ़ दल झारखंड मुक्ति मोर्चा का 13वां केंद्रीय केंद्रीय महाधिवेशन खेलगांव में हो रहा है। इस दौरान झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड के गांवों तक बदलाव लाना है। झामुमो ने लंबा सफर तय कर यह मुकाम हासिल किया है। 108 पेज का सांगठनिक रिपोर्ट पेश किया गया। महाधिवेशन 15 अप्रैल तक चलेगा।

इस दौरान पार्टी के वरीय नेता स्टीफन मरांडी ने राजनीतिक प्रस्ताव प्रस्तुत किया। केंद्र सरकार की ओर से संसद से पास वक्फ बोर्ड संशोधन कानून का झारखंड मुक्ति मोर्चा विरोध किया है। कहा गया कि ऐसा करना संविधान की मूल भावना के अनुरूप नहीं है। क्योंकि संविधान में देश में सभी धर्मों को अपने तरीके से कार्य करने की छूट मिली है।

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उन्होंने कहा कि 1932 के खतियान को ही स्थानीयता का प्रमाण माना जाए। बढ़े आरक्षण को संविधान की नौवीं सूची में रखा जाए। सरना धर्म कोड को मान्यता मिले और राज्य में प्राथमिक से हाई स्कूल तक की पढ़ाई स्थानीय भाषा में होनी चाहिए। इसके अलावा पार्टी ने राज्य में जाति जनगणना कराने की मांग की है।

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