सरहूल पर हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन ने सरना स्थल पर की पूजा अर्चना, मुख्यमंत्री ने की दो दिनों के राजकीय अवकाश की घोषणा

रांची:मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पान सोरेन ने अपने बेटों के साथ सिरमटोली स्थित सरना स्थल पर जाकर पूजा अर्चना की। पूरे विधि विधान से पूजा अर्चना करने के बाद बाद राज्य के सर्वागीण विकास, सुख, समृद्धि और शांति की कामना की। सरहूल के मौके पर मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों की पूर्व से चली आ रही मांग को मानते हुए सरहूल के मौके पर दो दिवसीय राजकीय अवकाश की घोषणा की।

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झारखंड सरकार ने आदिवासी समुदाय के सबसे बड़े और पावन पर्व सरहुल पर दो दिन का राजकीय अवकाश घोषित करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। वर्षों से आदिवासी समाज इस माँग को उठाता आ रहा था, जिसे अब राज्य सरकार ने स्वीकार कर लिया है। इस निर्णय से झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूती मिलेगी और आदिवासी समाज की परंपराओं को संरक्षित करने में मदद मिलेगी।

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सरहुल: प्रकृति पूजा का महापर्व
सरहुल झारखंड के आदिवासी समाज का प्रमुख पर्व है, जिसे खासतौर पर मुंडा, संथाल, उरांव और अन्य आदिवासी समुदाय बड़ी श्रद्धा के साथ मनाते हैं। यह पर्व वसंत ऋतु के आगमन और प्रकृति की आराधना का प्रतीक है। इस दिन साल (शाल) वृक्ष के फूलों की पूजा की जाती है, जिससे यह संदेश दिया जाता है कि मनुष्य और प्रकृति के बीच गहरा संबंध है। इस दिन आदिवासी समाज अपने पारंपरिक रीति-रिवाजों, लोकगीतों और नृत्यों के माध्यम से प्रकृति के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट करता है।

लंबे समय से उठ रही थी माँग
आदिवासी समाज लंबे समय से सरहुल पर्व के अवसर पर दो दिन के अवकाश की माँग कर रहा था। यह पर्व पूरे झारखंड में धूमधाम से मनाया जाता है और इसे पूरी श्रद्धा के साथ मनाने के लिए लोगों को समय की आवश्यकता होती है। झारखंड के विभिन्न सामाजिक संगठनों और आदिवासी नेताओं ने सरकार से बार-बार अनुरोध किया था कि इस पर्व के महत्व को देखते हुए अवकाश बढ़ाया जाए।

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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने किया ऐलान
सरकार ने इस माँग को गंभीरता से लेते हुए सरहुल पर दो दिन का राजकीय अवकाश घोषित करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ट्विटर (X) पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी है
“पिछले कई वर्षों से सरहुल के अवसर पर दो दिन के राजकीय अवकाश की माँग उठ रही थी। आदिवासी समाज के इस महा पावन पर्व के महत्व को देखते हुए, मैंने इस वर्ष से दो दिन का राजकीय अवकाश घोषित किया है। झारखंड की संस्कृति एवं परंपराओं की गौरवशाली धरोहर को हम सहेजते आए हैं और सदैव सहेजेंगे। जय सरना, जय झारखंड।”

आदिवासी समाज में हर्ष का माहौल
सरकार के इस फैसले का आदिवासी समाज ने खुले दिल से स्वागत किया है। झारखंड के विभिन्न जिलों में रहने वाले लोगों ने इसे ऐतिहासिक निर्णय बताया। आदिवासी संगठनों ने इस घोषणा के लिए मुख्यमंत्री और सरकार का आभार प्रकट किया।

आदिवासी नेता बिरसा मुंडा संगठन के अध्यक्ष रमेश मुंडा ने कहा,
“सरहुल सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, हमारी परंपरा और हमारी आस्था का प्रतीक है। इस फैसले से हमारी सांस्कृतिक पहचान को मजबूती मिलेगी और आने वाली पीढ़ियाँ भी अपनी परंपराओं को सहेजकर रख सकेंगी।”

संस्कृति और परंपराओं को मिलेगा बढ़ावा
सरहुल पर दो दिन के अवकाश से न केवल आदिवासी समाज को अपना पर्व धूमधाम से मनाने का अवसर मिलेगा, बल्कि इससे झारखंड की सांस्कृतिक विरासत को भी बढ़ावा मिलेगा। यह निर्णय झारखंड की विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाता है।

सरकार के इस कदम से झारखंड में सांस्कृतिक समरसता को भी बढ़ावा मिलेगा और अन्य समुदायों को भी आदिवासी समाज की परंपराओं को समझने और अपनाने का मौका मिलेगा।

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