कल्पना सोरेन ने हेमंत सरकार से विधानसभा में पूछा सवाल, केंद्र से बकाया राशि की कैसे होगी वसूली

कल्पना सोरेन ने हेमंत सरकार से विधानसभा में पूछा सवाल, केंद्र से बकाया राशि की कैसे होगी वसूली

रांचीः गांडेय से झारखंड मुक्ति मोर्चा की विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन ने विधानसभा में हेमंत सोरेन सरकार से सवाल किया। उन्होने सरकार से पूछा कि वित्तीय वर्ष 2009-14, 2014-19 और 2019-24 तक झारखंड सरकार को विभिन्न माध्यमों से ऋण के रूप में कितनी राशि प्राप्त हुई है। सरकार वर्तमान स्थिति को देखते हुए कितनी राशि ऋण के रूप में प्राप्त करना चाहती है, करना चाहती है तो कबतक नहीं करना चाहती है तो क्यों।

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उनके इस सवाल पर मंत्री सुदिव्य सोनू ने कहा कि पूरे देश में झारखंड राज्य एकमात्र ऐसा राज्य है जिसके ऋण की राशि सबसे कम है और हमारा वित्तीय प्रबंधन सबसे बेहतर है। मंत्री ने इस दौरान तमाम आंकड़े बताये। इसके बाद विधायक कल्पना सोरेन पूरक प्रश्न पूछने के लिए उठी और उन्होने कहा कि झारखंड का भारत सरकार की कंपनियों पर जितना बकाया है, उससे कम हमारा झारखंड का कर्ज है। माननीय मंत्री जी से पूछता चाहेंगे कि भारत सरकार के उपक्रम पर झारखंड सरकार का कितना बकाया है और निकट भविष्य में उसे कैसे वसूलेंगे।

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कल्पना सोरेन के सवाल पर मंत्री सुदिव्य सोनू ने कहा कि भारत सरकार के उपक्रमों पर झारखंड सरकार के एक लाख 36 हजार करोड़ रुपये बकाया है और जब से ये चर्चा चल रही है उस समय से ये राशि और बढ़कर ज्यादा हो गई है। मै स्पष्ट रूप से कहा देना चाहता हूं कि चाहे वो न्यायपालिका के माध्यम से हो, वित्त मंत्री के माध्यम से हो, मुख्यमंत्री के माध्यम से हो, सदन के माध्यम से हो केंद्र सरकार से संबंधित मंत्रियों से लगातार ये कोशिश की है। ये सच है कि इसमें हमें बहुत ज्यादा सफलता नहीं मिली है। मै माननीय सदस्या को ये बताना चाहूंगा कि कुल बकाया की राशि विभागों से प्राप्त करने में समय लगेगा लेकिन चलते सत्र में इस राशि की गणना करके कुल राशि सदन के सामने लाउंगा और दिल्ली में चल रहे माननीय सुप्रीम कोर्ट में 26 अप्रैल को इस मामले में सुनवाई होगी। सॉलिसिटर जनरल ने इस बात को स्वीकार किया है कि केंद्र सरकार ये राशि देना चाहती है कोई न कोई रास्ता निकल जाएगा। हमें उम्मीद है कि हमारी मांग का केंद्र सरकार सकारात्मक जवाब देगी। ये सवाल सिर्फ हेमंत सोरेन का नहीं झारखंड की जनता का है और मै जानता हूं कि राज्य के साढ़े तीन करोड़ जनता की आवाज को बहुत दिनों तक दबाया नहीं जा सकता है।

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