कौन है अमन साहू का एनकाउंटर करने वाला प्रमोद सिंह PK , नाम से ही थर्राते है ख़ूँख़ार अपराधी

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रांचीः  अमन साहू का एनकाउंटर किसी और ने नहीं बल्कि झारखंड पुलिस के इनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रमोद कुमार सिंह उर्फ PK  ने किया है। झारखंड पुलिस ने ही उन्हें अमन साहू को रायपुर से रांची लाने के लिए भेजा था  । माना जा रहा है कि अमन साहू के रांची लाने के दौरान किसी अनहोनी की आशंका पुलिस को पहले से ही थी लिहाजा उन्होंने  प्रमोद कुमार सिंह उर्फ पीके भेजा था । बताया जा रहा है कि अमन सिंह जब पुलिस की गिरफ्त से भाग रहा था तब जांबाजी से प्रमोद सिंह ने अमन को मार गिराया । एटीएस में डीएसपी हैं पीके । 

प्रमोद सिंह ने किया अमन साहू का इनकाउंटर

झारखंड पुलिस का इनकाउंटर स्पेशलिस्ट। प्रमोद कुमार सिंह उर्फ पीके सिंह। 2022 में धनबाद के बैंक मोड़ में अपराधियों ने मुथूट फाइनेंस में डकैती की कोशिश की। इनकाउंटर में अपराधी मारे गए। अकेले दम पर पीके ने अपराधियों का इनकाउंटर किया। अमन साव का इनकाउंटर भी पीके ने किया।

नक्सलियों के खात्मे में अहम भूमिका

 मार्च 2006 में, जब नावाडीह थाना क्षेत्र का ऊपरघाट इलाका उग्रवादियों के लिए सेफ जोन माना जाता था, तब बोकारो के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक प्रिया दुबे ने प्रमोद कुमार सिंह को नावाडीह थाना का प्रभारी नियुक्त किया। उस समय यह क्षेत्र माओवादी गतिविधियों से ग्रस्त था, जहां नक्सली जन अदालतें लगाते, विध्वंसक घटनाओं को अंजाम देते और जगह-जगह पोस्टर चिपकाकर दहशत फैलाते थे।

प्रमोद सिंह की रणनीति  की वजह से कई हार्डकोर नक्सलियों को गिरफ्तार किया जा सका था । इसके अलावा, उन्होंने पुल-पुलियों के नीचे छिपाकर रखे गए कई लैंडमाइंस बरामद कर नक्सलियों की साजिश नाकाम कर दी।

बहादुरी की मिसाल है प्रमोद सिंह

नवाडीह में अपने कार्यकाल के केवल पांच महीनों में, प्रमोद कुमार सिंह ने ऊपरघाट के चेचरिया जंगल में माओवादियों के एक बंकर का भंडाफोड़ किया, जहां से बड़ी मात्रा में हथियार, गोलियां और अन्य सामग्री बरामद की गई। इस दौरान एक माओवादी को गिरफ्तार भी किया गया। इस कार्रवाई से बौखलाए नक्सलियों ने कंजकिरो की नई बस्ती के पास एक बड़ी विध्वंसक घटना को अंजाम दिया, लेकिन इसके बावजूद प्रमोद कुमार सिंह रुके नहीं। उन्होंने उग्रवादियों की धर-पकड़ और तेज कर दी।

दिसंबर 2006 में उनका स्थानांतरण बोकारो पुलिस लाइन कर दिया गया, लेकिन पांच जून 2007 को उन्हें फिर से नावाडीह थाना प्रभारी बनाया गया। इस बार उन्होंने सड़क लूट के लिए कुख्यात पंद्रह माइल जंगल में एक अपराधी को एनकाउंटर में मार गिराया। उनके साहसिक अभियानों ने नावाडीह क्षेत्र को नक्सलवाद और अपराध के भय से काफी हद तक मुक्त किया।

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