रांची में 5 साल की बच्ची को हुआ गुलियन बेरी सिंड्रोम, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जीबीएस की रोकथाम को लेकर अधिकारियों के साथ की बैठक

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January 31, 2025

रांची में 5 साल की बच्ची को हुआ गुलियन बेरी सिंड्रोम, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जीबीएस की रोकथाम को लेकर अधिकारियों के साथ की बैठक

रांची: राजधानी रांची की एक 5 साल की बच्ची को गुलियन बेरी सिंड्रोम होने की पुष्टि हो गई है। दीपाटोली की रहने वाली बच्ची अपने माता-पिता के साथ महाराष्ट्र में अपने नानीगांव रहकर आई थी। रांची वापस आने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई जिसके बाद बरियातू के बालपन अस्पताल में उसे भर्ती कराया गया जिसका पिछली 12 दिनों से इलाज चल रहा है।

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बच्ची के परिजनों ने बताया कि महाराष्ट्र से लौटने के बाद अचानक बच्ची का दोनों पैर काम करना बंद कर दिया था। शुरू में बच्ची को रिम्स में भर्ती करने का प्रयास किया गया, लेकिन वहां वेंटिलेटर नहीं होने का हवाला देते हुए भर्ती नहीं लिया गया। इसके बाद परिजनों ने उसे बालपन अस्पताल में भर्ती किया।शुक्रवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जीबीएस की रोकथाम को लेकर आला अधिकारियों के साथ बैठक की।

 

आम जनमानस को जीबीएस से बचाव हेतु जागरूक करें

समीक्षा के क्रम में मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) बीमारी से ग्रस्त मरीजों की पहचान करने एवं अस्पतालों में उनके समुचित ईलाज की विशेष व्यवस्था रखें। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जीबीएस के संक्रमण से बचने के लिए राज्य में व्यापक प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुइलेन-बैरे सिंड्रोम से बचाव के लिए आम जनमानस को जागरूक करने की आवश्यकता है। यह बीमारी दूषित जल और कच्चा भोजन सेवन करने से फैलता है। लोगों में इस बीमारी को लेकर कोई भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो यह सुनिश्चित किए जाएं। यह बीमारी कोरोना संक्रमण की तरह एक-दूसरे से नही फैलता है, इस बीमारी को लेकर बहुत घबराने की जरूरत नही है, लोगों के बीच यह संदेश पहुंचाएं। जागरूकता ही इस बीमारी से बचने का सबसे बेहतर माध्यम है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिस राज्य, शहर या जगहों पर गुइलेन-बैरे सिंड्रोम बीमारी के मरीज ज्यादा पाए गए है उन क्षेत्रों से झारखंड पहुंचने वाले व्यक्तियों की जांच की व्यवस्था करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि शहर के किसी स्थान पर गुइलेन-बैरे सिंड्रोम जांच की एक निःशुल्क सेंटर स्थापित करें।

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अस्पतालों में बेड, दवा सहित अन्य जरूरी व्यवस्था पुख्ता रखें

मुख्यमंत्रीृ हेमन्त सोरेन ने अधिकारियों से कहा कि गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) बीमारी से निपटने के लिए सभी अस्पतालों में बेड, दवा, मेडिकल ऑक्सीजन इत्यादि की पुख्ता व्यवस्था रखें। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बीमारी से संबंधित कोई भी केस मिलने पर तत्काल रिम्स रेफर करें। संदिग्ध मरीजों को रिम्स तक पहुंचाने के लिए ट्रांसपोर्ट सिस्टम को अलर्ट रखें ताकि ससमय मरीज को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा उपलब्ध कराई जा सके। मुख्यमंत्री ने सभी जिलों के सिविल सर्जनों को निर्देश दिया कि इस बीमारी से संबंधित न्यूज, एक्टिविटीज एवं अपडेट पर पैनी नजर रखें ताकि बीमारी के खतरे की तैयारी समय रहते की जा सके। बीमारी के इलाज में किसी को कई दिक्कत न हो यह भी सुनिश्चित करें।

रिम्स में है पूरी तैयारियां

समीक्षा के क्रम में रिम्स निदेशक प्रो० (डॉ०) राजकुमार ने सभी जिलों के सिविल सर्जनों को वर्चुअल माध्यम से गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) बीमारी के मरीज की पहचान तथा उनके समुचित इलाज किस प्रकार की जाए इसकी विस्तृत जानकारी साझा की, साथ ही इस बीमारी से बचाव की गाईडलाइन शीघ्र सभी सिविल सर्जन सहित संबंधित तक उपलब्ध कराए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि इस बीमारी के गुणवत्तापूर्ण इलाज के लिए रिम्स पूरी तरह तैयार है, कोई भी संदिग्ध केस मिलने पर आप तुरंत मरीज को रिम्स रेफर करें। रिम्स जेबीएस को लेकर हाई अलर्ट मोड में है। रिम्स निदेशक ने कहा कि अपने-अपने क्षेत्र में सभी लोग इस बीमारी से बचाव के लिए आमजनों को अधिक से अधिक जागरूक करें।

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क्या है  गुलियन  बैरी सिंड्रोम

जूलियन बैरी सिंड्रोम (Julian Berry Syndrome) एक दुर्लभ तंत्रिका संबंधी विकार है, जो आमतौर पर प्रतिरक्षा प्रणाली की गड़बड़ी के कारण होता है। इस विकार में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से तंत्रिकाओं पर हमला कर देती है, जिससे विभिन्न न्यूरोलॉजिकल समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। हालाँकि, इस सिंड्रोम पर चिकित्सा जगत में अधिक शोध जारी है, और इसे अक्सर गुइलेन बैरी सिंड्रोम (Guillain-Barré Syndrome) से भ्रमित किया जाता है।

गुलियन  बैरी सिंड्रोम के लक्षण

इस सिंड्रोम के लक्षण व्यक्ति विशेष के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन आमतौर पर निम्नलिखित लक्षण देखे जाते हैं:

  • मांसपेशियों में कमजोरी
  • हाथों और पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन
  • संतुलन में समस्या
  • चलने-फिरने में कठिनाई
  • कभी-कभी साँस लेने में दिक्कत

क्यों होती है   गुलियन  बैरी सिंड्रोम

 

इस विकार का सटीक कारण अभी पूरी तरह से ज्ञात नहीं है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह प्रतिरक्षा प्रणाली की गड़बड़ी के कारण होता है। कुछ संभावित कारण इस प्रकार हैं:

  • बैक्टीरिया या वायरस संक्रमण के बाद प्रतिरक्षा प्रणाली का असामान्य रूप से सक्रिय हो जाना
  • आनुवंशिक कारक
  • कुछ ऑटोइम्यून बीमारियाँ
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क्या है उपचार

इस सिंड्रोम का कोई विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है, लेकिन कुछ उपचार लक्षणों को कम करने और सुधारने में मदद कर सकते हैं:

  1. इम्यूनोथेरेपी: प्रतिरक्षा प्रणाली को नियंत्रित करने के लिए दवाएँ दी जाती हैं।
  2. फिजियोथेरेपी: मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए व्यायाम और थेरेपी आवश्यक होती है।
  3. प्लाज्मा एक्सचेंज (Plasmapheresis): खून से हानिकारक एंटीबॉडी को निकालने की प्रक्रिया।
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