डेस्कः आखिर अचानक उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे की पहली अभी तक नहीं सुलझी है । भले ही उन्होंने इस्तीफे की वजह सेहत बताई हो लेकिन ये बात किसी के गले नहीं उतर रही । तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं । जगदीप धनखड़़ की इस्तीफे की पहले सुलझाने के लिए पहले क्रोनोलॉजी समझनी समझनी होगी। माना जा रहा है कि जगदीप धनखड़ के इस्तीफे की वजह जस्टिस यशवंत वर्मा और जस्टिस शेखर यादव के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का कनेक्शन है ।
द इंडियन एक्सप्रेस की वरिष्ठ पत्रकार लीज मैथ्यू के कॉलम के मुताबिक जगदीप धनखड़ के इस्तीफे की वजह यही हो सकता है । जगदीप धनखड़ के अचानक फैसले को समझने के लिए पहले समझिए क्रोनोलॉजी
पिछले दो हफ्ते में विपक्ष की तैयारी
- विपक्ष ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव की तैयारी शुरू की।
- न्यूनतम 50 राज्यसभा सांसदों के हस्ताक्षर जुटाने की कोशिश।
सरकार की रणनीति
- सरकार भी न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ लोकसभा में प्रस्ताव लाने की योजना बना रही थी।
- 145 सांसदों के हस्ताक्षर पहले ही जुटाए जा चुके थे।
13 दिसंबर 2024
- विपक्ष ने न्यायमूर्ति शेखर यादव के खिलाफ राज्यसभा में महाभियोग प्रस्ताव दिया था (अब तक लंबित)।
सोमवार, 21 जुलाई 2025
- सुबह: मानसून सत्र शुरू, विपक्ष अभी भी यशवंत वर्मा के खिलाफ प्रस्ताव के लिए हस्ताक्षर जुटा रहा था।
- 1:00 PM: धनखड़ ने बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक बुलाई। बैठक बेनतीजा रही।
- 3:00 PM: विपक्ष ने न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ प्रस्ताव राज्यसभा अध्यक्ष (धनखड़) को सौंपा।
- 3:12 PM: जयराम रमेश ने ट्वीट किया: 63 राज्यसभा सांसदों के हस्ताक्षर के साथ प्रस्ताव दाखिल।
- 4:05 PM: धनखड़ राज्यसभा पहुंचे और प्रस्ताव की जानकारी सदन में दी।
- 4:30 PM: BAC की अगली बैठक तय। विपक्ष पहुँचा, लेकिन सरकार के कोई प्रतिनिधि नहीं आए।
- 9:25 PM: धनखड़ ने राष्ट्रपति को भेजा अपना इस्तीफा पत्र X (ट्विटर) पर सार्वजनिक किया – स्वास्थ्य कारणों का हवाला।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्या कहा
- 12:13 PM: प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर धनखड़ के योगदान को सराहा और उनके स्वास्थ्य की कामना की।
- जेपी नड्डा ने मीडिया से कहा कि वे और किरण रिजिजू पहले ही धनखड़ को सूचना दे चुके थे कि वे बैठक में नहीं आ सकेंगे।
- कांग्रेस और विपक्ष ने कहा कि BAC बैठक में सरकार की अनुपस्थिति और धनखड़ के साथ “असम्मान” उनके इस्तीफे की वजह बनी।
दो- दो महाभियोग से घबरा गई सरकार ?
द इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाल से लिखा है कि धनखड़ के इस अप्रत्याशित कदम के पीछे विपक्ष द्वारा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की दो अलग-अलग पहलें मानी जा रही हैं।
पहली पहल विपक्ष ने दो सप्ताह पूर्व शुरू की थी, जिसने रविवार को जोर पकड़ा। इसका उद्देश्य था – राज्यसभा में न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए आवश्यक न्यूनतम 50 सांसदों के हस्ताक्षर जुटाना।
इसी बीच सरकार भी लोकसभा में इस प्रस्ताव को लाने की तैयारी कर रही थी, जहां 145 सांसदों के हस्ताक्षर इकट्ठा किए गए थे (लोकसभा में न्यूनतम आवश्यकता 100 होती है)। सरकार चाहती थी कि न्यायमूर्ति वर्मा की बर्खास्तगी आम सहमति से हो और इसे दलगत राजनीति के रूप में न देखा जाए। इसके अलावा, विपक्ष न्यायमूर्ति शेखर यादव के खिलाफ भी प्रस्ताव लाना चाहता था, जिन्होंने एक विहिप कार्यक्रम में विवादास्पद बयान दिए थे।
सूत्रों के अनुसार, सरकार इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से खुश नहीं थी क्योंकि इससे राज्यसभा में उनकी योजना पीछे रह गई। इसके बाद एनडीए सांसदों से हस्ताक्षर जुटाने की हड़बड़ी शुरू हुई। कई भाजपा सांसदों ने कहा कि उनसे न्यायमूर्ति वर्मा के “महाभियोग” के लिए हस्ताक्षर करवाए गए, जबकि कुछ ने बताया कि उन्हें “कोरे कागज़” पर हस्ताक्षर करने को कहा गया। तीन केंद्रीय मंत्रियों ने बताया कि ये हस्ताक्षर केवल नोटिस देने के लिए थे और प्रक्रिया लोकसभा में ही चलेगी। लेकिन चूंकि धनखड़ ने इसे राज्यसभा में स्वीकार कर लिया, इसलिए अब दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारी एक तीन सदस्यीय समिति गठित करेंगे जो आरोपों की जांच करेगी।
धनखड़ ने राज्यसभा में क्या कहा
शाम 4:05 बजे धनखड़ राज्यसभा पहुंचे और प्रस्ताव मिलने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 271(1)(b), 218 और 124(4) और न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 की धारा 3(1B) के तहत प्रस्ताव लाया गया है। धनखड़ ने न्यायमूर्ति शेखर यादव के खिलाफ दिसंबर 2024 में आए एक अन्य प्रस्ताव का भी उल्लेख किया और कहा कि उसमें हस्ताक्षर संबंधी भ्रम के कारण प्रक्रिया लंबित है। इसके बाद धनखड़ ने राज्यसभा में फरवरी 2024 में सांसद अभिषेक मनु सिंघवी की सीट से नकद मिलने की घटना को भी “गंभीर मामला” बताते हुए कहा कि इस पर भी विचार आवश्यक है ।
माना जा रहा है कि सरकार धनकड़ के द्वारा राज्यसभा में विपक्षी सांसदों के प्रस्ताव को स्वीकार करने के फैसले से खुश नहीं थी साथ ही जस्टिस शेखर यादव का नाम आने से भी सरकार की रणनीति फेल होती हुई दिख रही थी । रही सही कसर जेपी नड्डा के ‘नथिंग विल गो ऑन रिकॉर्ड’ वाले बयान ने पूरी कर दी।




