रांची: झारखंड के रामगढ़ के रहने वाले पत्रकार रूपेश कुमार सिंह को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। यूएपीए के आरोपी पत्रकार रूपेश कुमार सिंह को कोर्ट ने जमानत देने से इंकार कर दिया है। रूपेश को 17 जुलाई 2022 को पुलिस ने प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी से सांठगांठ के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
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इससे पहले 2024 में झारखंड हाईकोर्ट ने रूपेश को जमानत देने से इंकार कर दिया था जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया था। रूपेश के वकील ने कोर्ट में बताया था कि रूपेश एक स्वतंत्र पत्रकार है, विस्थापन और पुलिस मुठभेड़ की खबरें करते रहे है, इस वजह से ही उनके खिलाफ साजिश की गई थी और गिरफ्तार किया गया था। वहीं पुलिस ने आरोप लगाया था कि रूपेश कुमार सिंह नक्सली संगठन भाकपा माओवादी का सक्रिय सदस्य था, वो नक्सली प्रशांत बोस, शीला मरांडी समेत कई नक्सलियों के ठिकानों के बारे में जानता था। रूपेश के खिलाफ चार्जशीट दायर हो चुकी है।