रांचीः झारखंड राज्य के सभी जिलों में पारदर्शिता बनाकर रखने और ठेकेदारों के बीच किसी भी तरह की मनमानी रोकने के लिए झारखंड सरकार की उत्पात विभाग ने ई-लाटरी से शराब दुकानों की बंदोबस्ती प्रक्रिया लागू की है। इसके लिए राज्य भर की शराब दुकानों का आवंटन इस वर्ष 22 अगस्त को ई-लाटरी प्रणाली के माध्यम से पूरा किया गया। इस प्रक्रिया के बाद वार्षिक अनुज्ञप्ति शुल्क, जमानत राशि और अग्रिम उत्पात परिवहन कर की राशि जमा करना है। इसके साथ ही झारखंड राज्य में लागू नई शराब नीति को लेकर व्यापारी संघ ने कड़ा एतराज जताया है।
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झारखंड शराब व्यापारी संघ के महासचिव सुबोध कुमार जायसवाल ने कहा है कि उत्पाद विभाग ने पूर्व में शराब लाइसेंस हेतु एनएससी को मान्य बताया था। इसी आधार पर सैकड़ों इस-लाटरी प्रक्रिया में भाग लेने वाले आवेदकों ने लाखों रुपये निवेश कर एनएससी बनावाया। अब अचानक से उत्पात विभाग ने नया निर्देश जारी कर कहा है कि विभाग के पास जमा की जाने वाली राशि में एनएससी स्वीकार नहीं होगा और इसके स्थान पर ड्राफ्ट जमा करना अनिवार्य है। सुबोध कुमार जायसवाल का कहना है कि यह निर्णय अनुचित है और इससे व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। साथ ही, इससे पूरे राज्य में आवेदकों के बीच असमंजस और असुविधा की स्थिति बन गई है। उन्होंने झारखंड शराब व्यापारी संघ की ओर से उत्पात विभाग से तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। जिसमें पूर्व के आदेश के अनुरूप एनएससी को मान्यता दी जाए। यदि तकनीकी कारणों से ड्राफ्ट आवश्यक है, तो आवेदकों को पर्याप्त समय और विकल्प दिया जाए। साथ ही विभाग तुरंत स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर भ्रम की स्थिति खत्म करने का काम करे। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उत्पात विभाग उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो झारखंड शराब व्यापारी संघ आंदोलन करने को बाध्य होगी।




