रांची : गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर राजधानी के मोरहाबादी स्थित तरन्नुम संगीत संस्थान में भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा का अनूठा उत्सव देखने को मिला। संस्थान में आयोजित गुरु सूत्र बंधन एवं गुरु वंदना कार्यक्रम में प्रशिक्षु विद्यार्थियों ने संगीत गुरु डॉ. मृणालिनी अखौरी का वंदन कर उनके प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट की। पूरे आयोजन में भक्ति, संगीत और भारतीय संस्कृति का सुंदर संगम दिखाई दिया। कार्यक्रम के दौरान डॉ. मृणालिनी अखौरी ने सभी विद्यार्थियों की कलाई पर गुरु सूत्र बांधकर उन्हें आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि गुरु केवल कला का प्रशिक्षण नहीं देते, बल्कि व्यक्तित्व, संस्कार और जीवन मूल्यों का भी निर्माण करते हैं। भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा सदियों से ज्ञान, अनुशासन और समर्पण की पहचान रही है। कार्यक्रम में निरंजन, रीमा, खुशी, स्नेहा, सौम्या, वर्षा, सुषमा, मनोज, रूपक, ऋषभ, तेजस, हिमांशी और इंदु कुमारी सहित कई प्रशिक्षुओं ने गुरु वंदना एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम का समापन गुरुजनों के आशीर्वाद और भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।





साधना और अनुशासन से ही मिलती है कला में सफलता
डॉ. अखौरी ने विद्यार्थियों से नियमित रियाज, अनुशासन और समर्पण के साथ शास्त्रीय संगीत की साधना करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संगीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का माध्यम भी है। यदि युवा पीढ़ी भारतीय शास्त्रीय संगीत से जुड़ती है तो देश की समृद्ध सांगीतिक परंपरा और मजबूत होगी।








