रांची: अधिवक्ता, भाजपा नेता और झारखण्ड अलग राज्य के आंदोलनकारी डॉ. प्रणव कुमार बब्बू ने कहा है कि गुमला में घाघरा के प्रखण्ड सह अंचल कार्यालय परिसर में धरती आबा भगवान बिरसा मुण्डा की विखंडित प्रतिमा का उसके उस रूप में वहाँ लम्बे समय से मौजूद रहना दुर्भाग्यपूर्ण है.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भेजे गये एक पत्र में डॉ. बब्बू ने कहा कि लोहरदगा से गुमला जाने के क्रम में कुछ देर के लिये जब वे घाघरा के प्रखण्ड सह अंचल कार्यालय में गये तो वहाँ के विस्तृत कार्यालय परिसर में स्थापित धरती आबा भगवान बिरसा मुण्डा की प्रतिमा को विखंडित स्थिति में पाया और पूछने पर पता चला कि लम्बे समय से इस प्रतिमा की स्थिति ऐसी ही है. उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुण्डा की प्रतिमा की यह अवस्था न केवल प्रशासन की पोल खोल रही है बल्कि, सही मायने में यह झारखण्ड के सभी लोगों के चेहरे पर करारा तमाचा है. डॉ. बब्बू ने मुख्यमंत्री को भेजे गये अपने पत्र में लिखा है कि धरती आबा भगवान बिरसा मुण्डा, झारखण्ड की वैसी सशक्त पहचान हैं जो यहाँ रहनेवाले आदिवासियों, मूलवासियों के साथ ही सभी को निरंतर प्रेरित करते हैं और वैसे वीर क्रांतिकारी एवं वैश्विक स्तर पर जनजातीय समाज के गौरव के प्रतीक भगवान बिरसा मुण्डा की प्रतिमा का इस विखंडित रूप में रहना दुर्भाग्यपूर्ण है.
डाॅ. बब्बू ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि वह इस मामले को अविलंब सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए गुमला के घाघरा के प्रखण्ड सह अंचल कार्यालय में स्थापित इस विखंडित प्रतिमा को पुनर्स्थापित करने के लिये संबंधित अधिकारियों को निर्देश दें साथ ही इस प्रतिमा के इतने लंबे समय तक इस रूप में वर्तमान रहने के पीछे की जांच-पड़ताल करवाते हुए दोषी अधिकारियों के खिलाफ अविलंब कार्रवाई करें.


