रांचीः झारखंड सरकार ने पंचायती राज विभाग के माध्यम से बहुप्रतीक्षित पेसा नियमावली 2025 को अधिसूचित कर दिया है। 23 दिसंबर को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में सहमति के बाद, मंत्रियों के सुझावों के अनुरूप संशोधन कर इसे अंतिम मंजूरी दी गई।
नई नियमावली के लागू होते ही यह राज्य के सभी पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में प्रभावी हो गई है। इसके तहत ग्राम सभा को सर्वोच्च इकाई का दर्जा दिया गया है और उसकी अनुमति के बिना गांव में कोई विकास योजना लागू नहीं हो सकेगी। जल, जंगल और जमीन के प्रबंधन का अधिकार भी ग्राम सभा को दिया गया है। इस फैसले को आदिवासी और जनजातीय समाज को सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
राज्य सरकार ने झारखंड में पेसा कानून हेतु नियमावली को भी लागू कर दिया है, जिससे अब ग्रामसभा और ग्राम पंचायतों के माध्यम से ग्रामीणों को उनके अधिकार प्राप्त होंगे। यह कानून हमारे जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा का आधार है। इसके माध्यम से ग्रामीण अपने संसाधनों पर स्वयं निर्णय ले सकेंगे… pic.twitter.com/3vQLRpsFrF
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) January 1, 2026
इस बीच पंचायती राज विभाग की पूर्व निदेशक निशा उरांव ने सोशल मीडिया पर पेसा नियमावली के अधिसूचना की जानकारी देते हुए मूल ड्राफ्ट में कई संशोधनों का जिक्र किया है ।
झारखंड में पेसा नियमावली आज जारी हो गई है ।
जुलाई 2023 में मेरे कार्यकाल में प्रकाशित प्रारूप तथा मार्च 2024 में विधि विभाग द्वारा अनुमोदित प्रारुप से यह अलग है – इसमें कई संशोधन हुए हैं ।
इसका मैं विस्तार से विश्लेषण करूंगी ।
— Nesha Oraon 🇮🇳 (@OraonNesha) January 2, 2026




