डेस्कः सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले मेंं सुनवाई करते हुए सख्त निर्देश जारी किया है। अदालत ने कहा है कि विश्वविद्यालय सहित सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में सभी शैक्षणिक एवं गैर शैक्षणिक रिक्त पदों को चार माह में भरा जाए। कुलपति और रजिस्ट्रार जैसे पद एक माह के भीतर भरा जाए। झारखंड की बात करें तो यहां के विश्वविद्यालय लंबे समय से रिक्त पदों की समस्या से जूझ रहे हैं।
यहां स्थिति यह है कि कभी एक व्यक्ति को दो-दो विश्वविद्यालयों के कुलपति का प्रभार दिया जाता है तो कभी कुलपति पद की जिम्मेदारी प्रमंडलीय आयुक्त को दे दी जाती है। कई बार तो विभागीय सचिव ही इस पद की जिम्मेदारी संभालने लग जाते हैं।
वर्तमान में रांची विश्वविद्यालय, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, झारखंड मुक्त विश्वविद्यालय तथा जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय में कुलपति का पद पिछले वर्ष जून माह से ही रिक्त है। झारखंड तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डीके सिंह को रांची विश्वविद्यालय तथा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के कुलपति का भी अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
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इससे पहले इन दोनों विश्वविद्यालयों के कुलपति के कामकाज संभालने की जिम्मेदारी दक्षिणी छोटानागपुर के आयुक्त अंजनी कुमार मिश्रा को भी दी गई थी। इसी तरह, जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय के कुलपति पद का अतिरिक्त प्रभार कोल्हान विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. अंजिला गुप्ता को दी गई है।
हालांकि इन चारों विश्वविद्यालयों में कुलपति पद की नियुक्ति प्रक्रिया पिछले वर्ष मई माह में ही शुरू हो गई थी। बताया जाता है कि आवेदनों की स्क्रूटनी हो चुकी है तथा नियुक्ति प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
वहीं, झारखंड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय में भी कुलपति का पद भी रिक्त है।उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के सचिव राहुल पुरवार ही इसके प्रभार में हैं। इधर, राज्य के छह विश्वविद्यालयों में प्रतिकुलपति के पद भी लंबे समय से रिक्त हैं। प्रक्रिया शुरू किए जाने के बाद भी अभी तक नियुक्ति नहीं हो सकी है।
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इन विश्वविद्यालयों में रिक्त हैं प्रतिकुलपति के पद
- रांची विश्वविद्यालय, रांची
- कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा,
- नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय, पलामू,
- विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग,
- सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय, दुमका
- विनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय, धनबाद
विश्वविद्यालयों में कुलपतियों एवं अन्य पदाधिकारियों के पद रिक्त रहने से विश्वविद्यालय का कामकाज प्रभावित होता है। किसी को प्रभार भी दिया जाता है तो वह सिर्फ रूटीन कार्यों के लिए। इस कारण विश्वविद्यालयों में नीतिगत निर्णय नहीं लिए जाते।
सर्वोच्च न्यायालय का भी कहना है कि कुलपति और रजिस्ट्रार जैसे लीडरशिप पदों पर लंबे समय तक खाली रहने से संस्थानों की गवर्नेंस, शिकायत निवारण और जवाबदेही और कमज़ोर होती है। इसलिए इसने निर्देश दिया कि ऐसे पदों को आमतौर पर खाली होने के एक महीने के भीतर भरा जाना चाहिए।
राज्य के विश्वविद्यालयों में गैर शैक्षणिक पदाधिकारियों के भी 23 पद रिक्त हैं। कुल छह श्रेणी के ये पद रिक्त हैं। हालांकि झारखंड लोक सेवा आयोग में इन पदों के विरुद्ध नियुक्ति प्रक्रिया जारी है। आवेदनों की स्क्रूटनी कर ली गई है। साक्षात्कार का आयोजन होना है।
रांची विश्वविद्यालय में वित्त पदाधिकारी तथा परीक्षा नियंत्रक, विनोबा भावे विश्वविद्यालय में वित्त पदाधिकारी, परीक्षा नियंत्रक, डिप्टी रजिस्ट्रार, सिदो कान्हू विश्वविद्यालय, नीलांबर पीतांबर विश्वविद्यालय, कोल्हान विश्वविद्यालय, जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय तथा विनोद बिहारी महतो विश्वविद्यालय में वित्त पदाधिकारी और परीक्षा नियंत्रक के पद रिक्त हैं।
झारखंड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय में वित्त पदाधिकारी, परीक्षा नियंत्रक, रजिस्ट्रार, डिप्टी रजिस्ट्रार, असिस्टेंट रजिस्ट्रार चारों पद रिक्त हैं। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय में रजिस्ट्रार, वित्त पदाधिकारी तथा परीक्षा नियंत्रक के पद रिक्त हैं। इनमें से कभी पदों पर प्रभार से काम चलाया जा रहा है।
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