झारखंड में राजभवन का नाम बदला गया, राज्यपाल सचिवालय ने जारी की अधिसूचना

रांची और दुमका राजभवन का नाम बदलने का प्रस्ताव, लोक भवन की जगह बिरसा भवन और सिदो-कान्हो भवन रखने का प्रस्ताव

रांचीः बिहार के बाद अब झारखंड के राजभवन का नाम भी बदल दिया गया है। रांची और दुमका में स्थित राजभवन का नाम बदलकर लोकभवन कर दिया गया है। इसको लेकर अधिसूचना राज्यपाल सचिवालय की ओर से जारी कर दी गई है। यह निर्णय केंद्र सरकार की उस नीति का हिस्सा है, जिसमें राज्यपाल आवासों के नाम अधिक जनसरोकार वाले स्वरूप में परिवर्तित किए जा रहे हैं। अधिसूचना लागू होते ही सभी विभागों में पुराने नाम का उपयोग बंद कर दिया गया है।

G7OYR4PbgAM6Prp

बिहार में राजभवन का नाम बदला गया, अब लोक भवन के नाम से जाना जाएगा

झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार के अपर मुख्य सचिव नितीश मदन कुलकर्णी ने अधिसूचना जारी कर इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। यह निर्णय केंद्र सरकार की उस नीति का हिस्सा है, जिसमें राज्यपाल आवासों के नाम अधिक जनसरोकार वाले स्वरूप में परिवर्तित किए जा रहे हैं। अधिसूचना लागू होते ही सभी विभागों में पुराने नाम का उपयोग बंद कर दिया गया है।केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 25 नवंबर 2025 को यह आदेश जारी किया था। इस कदम के पीछे सरकार की मंशा शासन व्यवस्था को और अधिक जनोन्मुखी तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप बनाना है।राज भवन और राज निवास जैसे नाम ब्रिटिश शासनकाल की उस परंपरा से जुड़े हुए थे, जब इन भवनों का उपयोग औपनिवेशिक प्रशासन के शीर्ष पदाधिकारियों के आवास के रूप में किया जाता था।

See also  लोहरदगा में भीषण गर्मी के बीच प्यास से बेहाल हिरण कुएं में गिरी, डूबने से हुई मौत

हेमंत सोरेन ने दिल्ली दौरे के दौरान BJP से गठबंधन पर दे दी सहमति! JMM ने दिया अपने अंदाज में जवाब

रांची राजभवन का इतिहास
झारखंड का राजभवन ब्रिटिश शासनकाल में वर्ष 1930 में बनना शुरू हुआ था। तब इंग्लैंड में जॉर्ज पंचम का शासन था और झारखंड एकीकृत बिहार का हिस्सा था। रांची बिहार की ग्रीष्मकालीन राजधानी हुआ करती थी। राजभवन का निर्माण 1930 में शुरू हुआ और मार्च 1931 में यह बन कर तैयार हो गया था। उस वक्त इसे बनाने में कुल सात लाख रुपये खर्च हुए थे। कुल 62 एकड़ क्षेत्र में फैले राजभवन की डिजाइन ब्रिटिश आर्किटेक्ट सैडलॉ बैलर्ड ने की थी।इस पूरे क्षेत्र की 10 एकड़ जमीन में आड्रे हाउस का निर्माण कराया गया है, जिसे वर्तमान में राज्यपाल सचिवालय बनाया गया है। इसे कैप्टन हैलिंग्टन ने बनाया था। कैप्टन हैलिंग्टन उस वक्त दक्षिणी छोटानागपुर के डिप्टी कमिश्नर थे। राजभवन की 38 एकड़ जमीन में उद्यान बनाया गया है।

See also  हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के खिलाफ JMM की संकल्प सभा, मुख्यमंत्री बोल- 'न तो झारखंड झूकेगा न झारखंडी झूकेगा'

navbharat times
यहां अकबर गार्डेन के अलावा बुद्धा गार्डेन, 52 हजार वर्गफीट में अशोका गार्डेन, 15 हजार वर्गफीट में मूर्ति गार्डेन, औषधीय पौधों से भरा महात्मा गांधी गार्डेन के अलावा राजीव गांधी रोज गार्डेन व चार म्यूजिकल फव्वारे भी हैं। राजभवन के एक हिस्से में राज्यपाल रहते हैं। राज्यपाल का कार्यालय सहित आगंतुकों से मिलने के लिए दरबार हॉल है। राजभवन के एक हिस्से में अति विशिष्ट व्यक्तियों के ठहरने का विशेष इंतजाम हैं। राजभवन में प्रवेश करने के लिए चार गेट हैं। मुख्य द्वार गेट नंबर एक कहलाता है।
संभवतः यह पूरे देश की गिनी-चुनी ऐसी इमारतों में है, जो गुप्त भूमिगत सुरंग से जुड़ी है। इस सुरंग में जाने के लिए दो द्वारों के निशान राजभवन के दरबार हॉल और डाइनिंग हॉल के पास मौजूद हैं। कहते हैं कि इन द्वारों से जो सुरंग कनेक्ट होती थी, वह कहां तक जाती थीं, इसका पता किसी को नहीं है। झारखंड राजभवन की वेबसाइट में भी इन द्वारों और इनसे जुड़ी सुरंग का जिक्र है। झारखंड राजभवन की वेबसाइट में बताया गया है कि राजभवन के ग्राउंड फ्लोर में दो ट्रैप डोर्स हैं जो भूमिगत सुरंगों से जुड़े हुए हैं और ये सुरंगें किसी गुप्त स्थान तक जाती हैं।अंग्रेजों के जमाने में किसी विपत्ति से बच निकलने के लिए महत्वपूर्ण भवनों में सुरंगों का निर्माण किया जाता था।

See also  बिहार बंद में भाजपा नेताओं ने गुंडागर्दी की, भाड़े पर लोग बुला लेते: तेजस्वी यादव
WhatsApp Channel Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now