सुप्रीम कोर्ट ने IIT धनबाद को दलित छात्र का दाखिला करने का दिया आदेश, पैसे की तंगी के कारण सही समय पर नहीं भर पाया था फीस

Picture of Live Dainik

Live Dainik

September 30, 2024

सुप्रीम कोर्ट ने IIT धनबाद को दलित छात्र का दाखिला करने का दिया आदेश, पैसे की तंगी के कारण सही समय पर नहीं भर पाया था फीस

दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने आईआईटी धनबाद में गरीब दलित छात्र का दाखिला करने का आदेश जारी किया है। छात्र सही समय पर फीस जमा करने से चूक गया था। 18 साल के अतुल कुमार ने प्रतिष्ठित जेईई परीक्षा को अंतिम कोशिश में पास किया था लेकिन फीस के रूप में साढ़े सतरह हजार रुपया सही समय पर भर नहीं पाया इसलिए उसे दाखिला नहीं मिला।

 

नोट में गांधी जी की जगह अनुपम खेर की तस्वीर, धोखाधड़ी का अनोखा मामला आया सामने
अतुल ने आईआईटी धनबाद में इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर में सीट आवंटित की थी। यूपी के मुजफ्फरनगर का रहने वाले अतुल के पिता दिहाड़ी मजदूर है। उसने अंतिम वक्त में फीस जमा करने की कोशिश की थी लेकिन फीस जमा करने से 10 मिनट पहले ही वेबसाइट बंद हो गया और वो फीस जमा नहीं कर पाया। 24 जून को समय सीमा तक फीस जमा नहीं करने की वजह से उसे अपनी सीट गंवानी पड़ी। पैसे की तंगी के बावजूद पहले उसने झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, आखिरकार वो सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और वहां से उसे राहत मिली है। कोर्ट में सुनवाई के दौरान अतुल के वकील ने कोर्ट को बताया कि अतुल के पिता दिहाड़ी मजदूर है और रोजाना 450 रुपया कमाते है ऐसे में उसके लिए 17,500 रुपया का इंतजाम करना बड़ा मुश्किल काम था। गांव वालों की मदद से उसने रकम जुटाई। वही आईआईटी धनबाद के वकील ने दावा किया कि राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) ने अतुल कुमार को एसएमएस भेजा और आईआईटी ने उन्हें दो व्हाट्सएप चैट के जरिए पेमेंट करने की जानकारी दी थी। वकील ने कहा, “वह हर दिन लॉगिन करता था.”

इसके बाद जस्टिस पारदीवाला ने कहा, “आप इतना विरोध क्यों कर रहे हैं? रास्ता निकालने की कोशिश क्यों नहीं करते? सीट अलॉटमेंट की पर्ची दिखाती है कि आप चाहते थे कि वह पेमेंट करे, और अगर उसने किया, तो कुछ और की जरूरत नहीं था.”फिर चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, “वह एक बेहतरीन स्टूडेंट है. सिर्फ 17,000 रुपये की कमी के कारण उसे रोका गया है.”

सुनवाई के दौरान, चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने कहा, "हम एक ऐसे यंग टैलेंट को नहीं गंवा सकते. वह झारखंड की कानूनी शरण में गया, फिर चेन्नई की कानूनी सेवाओं तक पहुंचा और आखिरी में हाईकोर्ट पहुंचा. एक दलित लड़के को हर दरवाजे पर धक्के दे दिए गए."

See also  नकदी विवाद के बाद कोर्ट नहीं पहुंचे जस्टिस यशवंत वर्मा, फायर डिपार्टमेंट भी मौन
WhatsApp Channel Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

Trending Now