रांची: झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन फिलहाल समाप्त हो गया है। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में पिछले 26 दिनों से जारी आंदोलन को बुधवार शाम छात्रों ने विराम देने का फैसला किया। हालांकि, आंदोलनकारी छात्रों ने सरकार को 60 दिनों की समय-सीमा दी है। छात्रों का कहना है कि इस अवधि में परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की न्यायिक जांच को लेकर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे एक बार फिर सड़क पर उतरेंगे।
मुकुंद नायक ने तुड़वाया अनशन
आंदोलन के अंतिम दिन धरना स्थल पर अनशन कर रहे दो छात्रों का अनशन भी समाप्त कराया गया। इसके लिए प्रसिद्ध लोकगायक और पद्मश्री सम्मानित मुकुंद नायक को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। मुकुंद नायक ने अपने हाथों से अनशन तुड़वाया, जिसके बाद आंदोलन के पहले चरण की औपचारिक समाप्ति की घोषणा की गई।


सरकार के फैसले पर छात्रों ने जताया आभार
आंदोलनकारी छात्रों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रति आभार जताया। छात्रों का कहना है कि सरकार ने उनके भविष्य को ध्यान में रखते हुए उनकी प्रमुख मांगों को स्वीकार किया और संबंधित परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया।
छात्र नेताओं के मुताबिक, सरकार की ओर से परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की न्यायिक जांच पर भी सहमति जताई गई है। इसी आधार पर छात्रों ने फिलहाल आंदोलन को स्थगित करने का निर्णय लिया है।

60 दिन की मोहलत, कार्रवाई नहीं हुई तो फिर आंदोलन
छात्र नेता उमेश प्रसाद ने स्पष्ट किया कि आंदोलन को पूरी तरह खत्म नहीं किया गया है, बल्कि फिलहाल स्थगित किया गया है। उन्होंने कहा कि JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की न्यायिक जांच की मांग अभी भी कायम है।
छात्रों ने सरकार को जांच की दिशा में ठोस कदम उठाने के लिए 60 दिनों का समय दिया है। उनका कहना है कि यदि निर्धारित अवधि में जांच को लेकर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई, तो छात्र दोबारा आंदोलन शुरू करेंगे और सड़क पर उतरने से पीछे नहीं हटेंगे।
26 दिनों तक चला छात्रों का संघर्ष
JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ शुरू हुआ यह आंदोलन लगातार 26 दिनों तक चला। इसमें झारखंड के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए।
आंदोलन के दौरान छात्रों ने भूख हड़ताल, सत्याग्रह, सांस्कृतिक कार्यक्रम और तिरंगा यात्रा के जरिए अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया। आंदोलनकारियों का मुख्य जोर परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच पर रहा।
बुधवार को आंदोलन का पहला चरण समाप्त हो गया, लेकिन छात्रों ने साफ कर दिया है कि अब उनकी नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर रहेगी। 60 दिनों के भीतर जांच को लेकर ठोस पहल नहीं हुई तो आंदोलन फिर शुरू करने की चेतावनी दी गई है।






