डेस्कः सारंडा के जंगल में करीब 4000 जवानों ने एक करोड़ के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा के दस्ते को घेर लिया है। घेराबंदी के बाद मिसिर बेसरा का दस्ता दाने-दाने को मोहताज हो गया है। इसी बीच मिसिर बेसरा के बेटे सिद्धार्थ बेसरा ने पिता से सरेंडर करने की अपील की है। एक समाचार पत्र से बातचीत के दौरान सिद्धार्थ ने पिता के नक्सली संगठन से जुड़ने और परिवार के दर्द को लेकर खुलकर बातचीत की है।
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सिद्धार्थ बेसरा ने बातचीत के दौरान बताया कि जब मैं सात साल का था, तभी पिता हमें छोड़कर चले गए। बाद में दादाजी से पता चला कि वे अन्याय के खिलाफ बंदूक उठाकर नक्सली बन चुके हैं। मैंने कई बसा उन्हें ढूंढने की कोशिश की, लेकिन कभी मिल नहीं पाया। इसी दौरान मां भी घर छोड़कर चली गई और कुछ साल बाद मेरी इकलौती बहन शांति की भी मौत हो गई। परिवार बिखर गया, लेकिन मैंने खुद को संभाला और पढ़ाई जारी रखी। 10वीं तक पढ़ाई करने के बाद रोजगार की तलाश में महाराष्ट्र गया। वहां कई काम किए, अब एक पाउडर मिल में काम करता हूं। 9 हजार रुपए महीना मिलता है। किसी तरह जीवन चल रहा है। पिछले एक महीने से रांची में नौकरी ढूंढ रहा हूं, ताकि अपने राज्य में रह सकूं।
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दादाजी बताते थे कि पिता को शिक्षक की नौकरी मिल रही थी, लेकिन ज्वाइनिंग के लिए आठ हजार रुपए रिश्वत मांगी जा रही थी। वे जमीन बेचकर पैसे देने को तैयार थे, लेकिन पिता इसके खिलाफ थे। उनका कहना था कि जब योग्यता है तो घूस क्यों दें। नौकरी नहीं मिली तो वे आहत हो गए। बाद में पीके राय कॉलेज, धनबाद से पीजी करने के बावजूद नौकरी नहीं मिली और वे नक्सली बन गए। हाल ही में अखबार के जरिए पता चला कि वे सारंडा जंगल में पुलिस से घिरे हुए हैं। यह खबर पढ़कर मैं डर गया। 28 साल से उन्हें देखा नहीं है। अब बस एक बार उनसे मिलने की इच्छा है। परिवार की एक ही इच्छा है कि पिताजी अब घर लौट आएं और अपना बुढ़ापा परिवार के बीच बिताएं। पुलिस भी उनसे संपर्क कर रही है। दो सप्ताह पहले खुखरा पुलिस पिता के बार में जानकारी लेने आई थी, लेकिन हमें भी उनके बारे में कुछ पता नहीं है। अगर मेरी बात पिता तक पहुंचे तो मैं उनसे हाथ जोड़कर विनती करता हूं कि वे जल्द से जल्द सरेंडर कर दें। उन्होंने अन्याय के खिलाफ बहुत लड़ाई लड़ ली, अब आराम की जरूरत है। पिता करीब 70 साल के हो चुके हैं। अब उन्हें जंगल में भटकने या बंदूक उठाने की नहीं, बल्कि घर में रहने की जरूरत है। मैं चाहता हूं कि एक बार उनसे मुलाकात हो जाए, फिर मैं उन्हें सरेंडर कराने की पूरी कोशिश करूंगा। सरकार और पुलिस से भी अपील है कि गोली चलाने के बजाय सरेंडर का मौका दिया जाए, ताकि उनके पिता सुरक्षित घर लौट सें और परिवार को उनका साथ मिल सके।


