कांग्रेस की चाल से लालू यादव नाराज, हेमंत सोरेन और पशुपति पारस की पार्टी के सीट शेयरिंग को लेकर मामला फंसा

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September 11, 2025

कांग्रेस की चाल से लालू यादव नाराज, हेमंत सोरेन और पशुपति पारस की पार्टी के सीट शेयरिंग को लेकर मामला फंसा

डेस्कः बिहार में विधानसभा चुनाव को लेकर शनिवार को तेजस्वी यादव के आवास पर इंडिया गठबंधन की बैठक हुई। इस बैठक में गठबंधन के सहयोगी दलों की संख्या छह से बढ़ाकर आठ करने का फैसला लिया गया। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा और पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस की पार्टी आरएलजेपी को गठबंधन में शामिल करने को लेकर सहमति बनी।

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सीट शेयरिंग को लेकर 15 सितंबर तक फार्मूला तय होने का दावा किया जा रहा है। इस बार कांग्रेस के सीटों की संख्या कम की जा रही है। 2020 के चुनाव में सबसे खराब स्ट्राइक रेट कांग्रेस पार्टी का रहा था इसलिए उसके सीटों को कम करने का दवाब बनाया जा रहा है। कांग्रेस पार्टी भी अपनी ओर से सीटों की संख्या में विशेष कटौती का विरोध कर रही है। कहा जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी को 52-53 सीटों के बीच समेटने की तैयारी चल रही है। वहीं कांग्रेस पार्टी की ओर से कहा जा रहा है कि गठबंधन के सहयोगी की संख्या में बढ़ोतरी होने की वजह से वो अपनी सीटों में थोड़ी कमी यानी कि चार-पांच सीटों की कुर्बानी दे सकते है लेकिन उससे ज्यादा कम सीट कांग्रेस को कबूल नहीं होगा।
माना जा रहा है कि राहुल गांधी की बिहार में यात्रा के बाद कांग्रेस पार्टी अपने आप को बिहार में फ्रंट फूट पर देख रही है। कांग्रेस के इस रवैये से आरजेडी अध्यक्ष लालू यादव नाराज है। लालू चाहते थे कि तेजस्वी यादव का नाम राहुल गांधी मुख्यमंत्री पद के लिए घोषित कर दे लेकिन ऐसा नहीं किया गया। वो ये भी चाहते थे कि तेजस्वी वोटर अधिकार यात्रा में राहुल गांधी के साथ पूरी यात्रा नहीं करें लेकिन ऐसा हो नहीं सका। सीट शेयरिंग पर भी तेजस्वी यादव थोड़े साफ्ट माने जाते है इसलिए लालू यादव ने सीट शेयरिंग का मामला और हेमंत सोरेन के साथ पशुपति पारस की पार्टी को एडजस्ट करने का मामला खुद देखने का फैसला किया है, वो किसी भी कीमत पर 53 सीटों के आसपास ही कांग्रेस को समेटना चाहते है।

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वहीं दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी भी 2020 वाली गलती करने से बचना चाह रही है और अपेक्षाकृत मजबूत सीटों पर दावेदारी कर रही है। 2020 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी 144 सीटों पर लड़ी थी जिसमें उसे 75 सीटों पर जीत मिली थी। कांग्रेस पार्टी 70 सीटों पर चुनाव लड़ी थी जिसमें उसे 19 सीटों पर सफलता हासिल हुई थी। माले ने 19 में से 12 सीट पर जीत दर्ज किया था उसका स्ट्राइक रेट सबसे अच्छा रहा था। सीपीएम ने चार में से दो और सीपीआई 6 में से 2 सीट जीतकर आई थी।पिछले चुनाव में भले ही कांग्रेस 70 सीटों पर चुनाव लड़ी थी जिसमें से 45 सीटें उसे ऐसी मिली थी जहां पिछले चार चुनावों से एनडीए ही जीत दर्ज करती रही है। कांग्रेस की कुछ मजबूत सीटें भी वामदलों के पास चली गई थी। इन 70 सीटों में 30 सीट ऐसी थी जहां आरजेडी पिछले चार-पांच चुनाव से हार रही थी। सीमांचल में आवैसी के फैक्टर से नुकसान हुआ तो मिथिलांचल में कांग्रेस का खाता तक नहीं खुल पाया था। कांग्रेस को ज्यादातर शहरी इलाकों की सीट दी गई थी जहां उसका बीजेपी से सीधा मुकाबला हुआ था।

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कांग्रेस पार्टी और आरजेडी के बीच जारी खींचतान की वजह से सीट शेयरिंग का मामला फंसा हुआ है। एक तरफ लालू यादव 53 सीटों के आसपास कांग्रेस को समेटना चाह रहे है, प्रदेश कांग्रेस के नेताओं को दो टूक कह दिया गया है कि पहले अपने उम्मीदवार बताओं तब जाकर इससे आगे कि सीट को लेकर फैसला होगा। लालू सीट को लेकर कांग्रेस पर पूरा दवाब बनाए हुए है उनको लगता है कि अगर 53 सीट के आसपास की अभी बात होगी तो अंतिम समय में राहुल गांधी के कहने पर कुछ सीटें बढ़ाकर कांग्रेस को 55 सीटों के आसपास रखा जाए। दूसरी ओर मुकेश सहनी भी 60 सीट गठबंधन में मांग रहे है उन्हे 15 से 18 सीटों के बीच रखने की कोशिशें की जा रही है। वाम दलों के प्रदर्शन को देखते हुए उनकी सीटों में कटौती होने की गुंजाइश नहीं दिख रही है। जिस फॉर्मूले के तहत सीट शेयरिंग करने की कोशिश हो रही है उसके अनुसार, आरजेडी- 136 से 140 सीट, कांग्रेस पार्टी 52 से 55, वाम दल 34 से 35 और मुकेश सहनी की वीआईपी 18 से 20 सीट पर सहमति बन सकती है। वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा और आरएलजेपी को आरजेडी अपने कोटे से सीटे देगी।

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कांग्रेस पार्टी जिस तरह से 65 सीटों से नीचे नहीं जाने की जिद्द कर रही है उससे लालू यादव नाराज बताए जा रहे है, वो चाहते है कि आदिवासी नेता के रूप में हेमंत सोरेन की जो छवि बनी है और एक आदिवासी महिला नेता के रूप में कल्पना सोरेन ने जो राजनीति में अपनी जगह बनाई है उसका फायदा खासतौर पर सीमांचल के इलाके में गठबंधन को मिले और महिला वोटरों के बीच कल्पना सोरेन की छवि का फायदा उठाया जाए इसलिए जेएमएम को ज्यादा सीट देने का मन बनाया है। वोटर अधिकार यात्रा के अंतिम दिन हेमंत सोरेन भी पटना में शामिल हुए थे और उनकी लालू यादव से भी मुलाकात हुई थी इसके बाद ही ये स्पष्ट हो गया कि हेमंत अब बिहार चुनाव में गठबंधन के हिस्सा होंगे। वोटर अधिकार यात्रा में राहुल गांधी के फ्रंट पर रहने और कांग्रेस की ओर से 53 सीट कबूल नहीं होने की बातों से लालू यादव नाराज बताए जा रहे है और माना जा रहा है कि 15 सितंबर की डेडलाइन कुछ और आगे जा सकती है।

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