रांची : झारखंड मुक्ति मोर्चा के विनोद पांडे ने महागठबंधन के नेताओं की ओर से राष्ट्रपति द्रोपर्दी मुर्मू को पत्र लिखकर उनसे मिलने का समय मांगा था। सरना धर्म कोड, ओबीसी आरक्षण और 1932 खातियान को लेकर जेएमएम-कांग्रेस और आरजेडी का प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति से मिलना चाह रहा था।
मंगलवार को जेएमएम महासचिव और प्रवक्ता विनोद पांड ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि पत्र के माध्यम से राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा गया था जिसमें सांसद, विधायक और पार्टी के पदाधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल को मिलना था। मिलने का समय मांगने के लिए जो पत्र लिखा गया था उसके जवाब में जो पत्र मिला है वो बहुत आश्चर्यजन और दुर्भायपूर्ण है। इस राज्य के लोगों के लिए, जेएमएम के लिए और गठबंधन के लिए भी। राष्ट्रपति महोदया के यहां से जो सूचना मिली है उसमें कहा गया है कि समय अभाव के कारण इस प्रतिनिधिमंडल से मिला संभव नहीं है। आप लोगों को भी मालूम है उस पत्र में इस राज्य और देश का ज्वलंत मांग सरना धर्म कोड को लागू करना। विधानसभा के अंदर से लेकर सड़क तक इसको लेकर संघर्ष जारी है, ओबीसी आरक्षण को लेकर भी उनसे मिलना था। इससे संबंधित विधेयक विधानसभा से पास करके राजभवन भेजने का काम किया गया था लेकिन सबको मालूम है कि राजभवन में इस मामले को काफी लंबे समय तक लंबित रखने के बाद राज्यपाल महोदय की तरफ से जो टिप्पणी आई वो इस राज्य के भावना के विपरित थी। उन्होने सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए विधयेक को वापस भेज दिया। इसके साथ ही 1932 खातियान मामले को भी लटकाया गया है। जिस तरह का व्यवहार राज्य की जनता की भावनाओं के साथ किया जा रहा है वो सही नहीं है। जो भी जनता के हीत का विधेयक विधानसभा से पास कर राजभवन भेजा जाता है, या तो उसपर टिप्पणी नहीं की जाती है, या टिप्पणी की भी जाती है कि तो इस तरह से की मामला लंबित रहे।
विनोद पांडे ने आगे कहा कि जब राष्ट्रपति महोदया के यहां से हमें ये सूचना आई कि हमें मिलने का समय नहीं दिया जाता तो हमलोगों के अंदर ये बात आई कि आखिर क्यों हम लोगों को मिलने नहीं दिया जा रहा है , हो सकता है उनकी व्यस्तता रही हो , लेकिन जो विषय है वो राज्य के लिए काफी ज्वलंत मुद्दा है, हम चाहते है कि हमलोगों को मिलने का समय दिया जाए और यहां के लोगों की भावनाओं को समझा जाए। हम लोग प्रयास करेंगे कि हम लोगों को उनकी ओर से हमें मिलने का समय दिया जाए, एक हफ्ता नहीं, 15 दिन नहीं, एक महीने बाद ही हमें मिलने का समय दिया जाए।
सरना कोड, OBC आरक्षण और 1932 खातियान मामले पर JMM प्रतिनिधिमंडल को नहीं मिला राष्ट्रपति से मिलने का समय

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