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मेडल नहीं जीतने पर टीचर का टॉर्चर, छात्रों को कमरे में बंद कर डंडे से पीटा

student pitai

रांची के कांके रोड स्थित डीएवी गांधीनगर स्कूल के खेल शिक्षक द्वारा छात्रों को बेरहमी से पीटने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। शिक्षक आयुष ने बोकारो में 23 जुलाई को आयोजित खेलकूद में मेडल नहीं जीतने पर एक दर्जन से अधिक छात्रों को कमरे में बंद कर डंडे से बेरहमी से पीटा। इतना ही नहीं, कमरे में लगे सीसीटीवी कैमरे को भी रुमाल से ढंक दिया, ताकि पीटने का साक्ष्य नहीं मिले। आरोपी ने छात्रों को घटना के बारे में किसी को बताने पर टीसी से वंचित करने की भी धमकी दी।

घटना की जानकारी मिलने पर परिजनों ने बुधवार को स्कूल में जमकर हंगामा किया। हंगामे को देखते हुए आरोपी शिक्षक आयुष को निलंबित कर दिया गया है। बच्चों के परिजन रांची के गोंदा थाने पहुंचे और स्पोर्ट्स टीचर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। वहीं प्रभारी प्राचार्य एन आचार्य ने कहा कि स्कूल की ओर से जांच कमेटी गठित कर डीएवी के सहायक क्षेत्रीय पदाधिकारी और चेयरमैन को जानकारी दे दी गई है।

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डीएवी गांधीनगर के छात्रों की पिटाई के मामले में पता चला कि डीएवी ग्रुप की खेलकूद प्रतियोगिता बोकारो में 22 एवं 23 जुलाई को हुई थी। इसमें गांधीनगर डीएवी स्कूल के छात्रों ने भी हिस्सा लिया था। प्रतियोगिता में छात्रों का खराब प्रदर्शन रहा, जिससे स्कूल को एक भी ट्रॉफी नहीं मिला। गुस्साए खेल शिक्षक आयुष ने छात्रों को पीटा।

डीएवी गांधीनगर के प्रभारी प्राचार्य एन आचार्य ने कहा कि बुधवार को शिक्षक स्कूल नहीं आए और मोबाइल भी बंद आ रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ मारपीट को स्वीकार नहीं किया जा सकता है। इसके बाद सभी परिजन एक साथ रांची के गोंदा थाना पहुंचे और बच्चों के साथ हुई बर्बरता पूर्वक पिटाई के खिलाफ स्पोर्ट्स टीचर के खिलाफ गोंदा थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी है।

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अभिभावक सुमित रंजन ने आवेदन में कहा है कि 21 जुलाई को सभी छात्र बोकारो चले गए थे। खेलकूद प्रतियोगिता में बच्चों का प्रदर्शन खराब रहा। जब बच्चे रात में वापस कमरे में लौटे, तब स्पोर्ट्स टीचर आयुष ने उनका कमरा बंद किया। इसके बाद बच्चों को रॉड और छड़ी से पीटना शुरू कर दिया। इसमें बच्चों के पैर और पीठ में चोट आई है। आरोप है कि शिक्षक ने छात्रों को किसी को बताने पर स्कूल से टीसी दिलाने की भी धमकी दी थी।

शारीरिक दंड प्रतिबंधित

सीबीएसई की गाइडलाइंस के अनुसार, बच्चों को शारीरिक दंड देना प्रतिबंधित है। इसके लिए शिक्षक को 10 हजार रुपये का जुर्माना हो सकता है। स्कूल पर एक लाख रुपए तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। स्कूल किसी भी नियम का उल्लंघन करता है, तो उसकी मान्यता भी रद्द की जा सकती है। आरटीई के तहत भी इस मामले में कई प्रावधान हैं।

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