राहुल गांधी की दलित पॉलटिक्स बिगाड़ देगी नीतीश और मांझी का खेल! गया में दशरथ मांझी के परिवार से मिलकर खेल दिया मास्टरस्ट्रोक

Picture of Live Dainik

Live Dainik

June 6, 2025

राहुल गांधी की दलित पॉलटिक्स बिगाड़ देगी नीतीश और मांझी का खेल! गया में दशरथ मांझी के परिवार से मिलकर खेल दिया मास्टरस्ट्रोक

पटनाः कांग्रेस पार्टी के नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बिहार में चुनावी साल के पहले हाफ में छठी बार बिहार दौरे पर आए। एक दिन के बिहार दौड़े पर उन्होने सबसे पहले गया में दशरथ मांझी के परिवार के साथ मुलाकात की फिर उसके बाद वो राजगीर गए जहां उन्होने संविधान सुरक्षा सम्मेलन को संबोधित किया।

अनुष्का विवाद के बाद तेजप्रताप ने शेयर किया VIDEO, कहा-‘सभी सपनें पूरे हो सकते हैं’ अगर…
ओबीसी के बाद अब दलित पॉलटिक्स
बिहार को लेकर राहुल गांधी के अलग राजनीतिक प्रयोग कर रहे है। सबसे पहले उन्होने अपने भरोसेमंद कृष्णा अल्लावरू को प्रदेश का प्रभारी बनाया। इसके बाद भूमिहार जाति से आने वाले अखिलेश प्रसाद सिंह की जगह दलित समाज से आने वाले विधायक राजेश राम को प्रदेश अध्यक्ष बनाया। ओबीसी राजनीति को राष्ट्रीय स्तर पर जोर देने वाले राहुल गांधी ने बिहार में दलित चेहरे पर दांव लगाया। राहुल गांधी ने ओबीसी वोटबैंक को ध्यान में रखकर 7 राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष उसी समाज बनाया लेकिन बिहार में ओबीसी की प्रमुख दो जाति एक यादव और दूसरी कुर्मी-कोईरी अपने-अपने नेता लालू यादव और नीतीश कुमार के साथ मजबूत तौर पर जुड़ी नजर आती है। लालू यादव के साथ गठबंधन होने की वजह से उसका लाभ कांग्रेस पार्टी को मिलता रहा है। सवर्ण प्रदेश अध्यक्ष बनाने का दांव बिहार में फेल होने के बाद राहुल गांधी ने दलित राजनीति को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।

Patna में तीन आभूषण कारोबारियों के ठिकानों पर Raid , 70 किलो सोना और 5500 किलो चांदी बरामद
दलित प्रदेश अध्यक्ष बनाने के बाद राहुल गांधी मई महीने में दरभंगा के दौरे पर आए, प्रशासनिक अनुमति नहीं मिलने के बाद भी उन्होने आंबेडकर छात्रावास में दलित छात्रों के साथ संवाद किया। इसके बाद पटना पहुंचकर फुले फिल्म देखी। अब अपने छठे दौरे पर राहुल गांधी ने इसी कड़ी को आगे बढ़ाया है। दिल्ली से गया आने के बाद वो सबसे पहले गहलौर गए जहां माउंटेन मैन के नाम से मशहूर दशरथ मांझी की मूर्ति पर माल्यार्पण किया उसके बाद उनके परिवार के सदस्यों के साथ समय बिताया। वहां से सीधे राहुल राजगीर चले गए जहां उन्होने संविधान सुरक्षा सम्मेलन को संबोधित किया और जातिगत जनगणना के बहाने मोदी सरकार पर हमला किया। उन्होने कहा कि मैने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लोकसभा में आंख में आंख डालकर कहा था कि जातिगत जनगणना होगी और आपको पता है न कि उनको सरेंडर करने की आदत है। जातिगत जनगणना के बहाने राहुल गांधी ने ओबीसी और दलित दोनों को उनके अधिकार दिलाये जाने का वादा किया।

See also  विधानसभा चुनाव को लेकर चेकिंग के दौरान हजारीबाग और जमशेदपुर में पकड़ा गया कैश

शशि थरूर से पत्रकार बेटे ईशान ने पूछे तीखे सवाल, अमेरिका में दिया ऑपरेशन सिंदूर पर मजेदार जवाब
नीतीश और मांझी के कोर वोट पर चोट
राहुल गांधी अपने बिहार दौरे से नीतीश और मांझी दोनों की सियासी जमीन खिसकाने की तैयारी कर रहे है, गया और राजगीर का दौरा तो यही कहता है। गया में दशरथ मांझी के परिवार के साथ मुलाकात फिर महिलाओं के साथ संवाद और राजगीर में संविधान सुरक्षा सम्मेलन कर राहुल दोनों बड़े नेताओं के कोर वोट को अपनी ओर खींचने की कोशिश कर रहे है। जीतन राम मांझी दलित समाज के एक बड़े नेता है, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री है और वर्तमान में गया से सांसद होने के साथ ही केंद्र सरकार में मंत्री है। महादलित समाज के बड़े नाम दशरथ मांझी के परिवार के साथ वक्त गुजारकर राहुल ने दलित वोट बैंक में पैठ बनाने की कोशिश की है, इस दौरान उनकी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम जो दलित समाज से आते है वो भी उनके साथ थे। मगध के इस इलाके में दलित वोट पर जीतन राम मांझी के प्रभाव को कम करने की कोशिश राहुल गांधी ने की है। दूसरी ओर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिला नालंदा के राजगीर में कार्यक्रम कर और फिर महिला संवाद के माध्यम से राहुल गांधी ने नीतीश कुमार के कोर वोट पर चोट की है। महिला वोटर को आम तौर पर बीजेपी का साइलेंट वोटर माना जाता है लेकिन बिहार में महिला वोटरों को अधिकांश हिस्सा नीतीश कुमार के साथ रहा है। नीतीश कुमार के इस कोर वोट का वोटिंग पैटर्न कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी की नजर में है इसलिए उसपर भी फोकस किया गया है। बिहार विधानसभा के पिछले तीन चुनावों का वोटिंग पैटर्न देखे तो पता चलता है कि पुरूष वोटरों के मुकाबले महिला वोटरों टर्नआउट ज्यादा रहा है। 2010 में पहली बार बिहार में महिला वोटरों ने पुरूषों से ज्यादा वोटिंग की और उसका नतीजा ये रहा कि नीतीश कुमार की पार्टी 115 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बन गई। 2015 में 51.1 फीसदी पुरुषों के मुकाबले 60.4 फीसदी महिलाओं ने मतदान किया था। 2020 के बिहार चुनाव में जहां 54.6 फीसदी पुरुषों ने वोट किए थे, वहीं महिलाओं का मत प्रतिशत 59.7 फीसदी रहा था। पिछले बिहार चुनाव में महिलाओं ने टर्नआउट के मामले में पुरुषों को पांच फीसदी से भी अधिक के अंतर से पीछे छोड़ दिया था।यहीं वजह रही कि चिराग फैक्टर और कुशवाहा फैक्टर के बावजूद भी नीतीश कुमार की सीटें इतनी आ गई वो फिर से बिहार के मुख्यमंत्री बन सके। माना जाता है कि अगर उस चुनाव में महिला वोटरों ने नीतीश का साथ नहीं दिया होता तो उनकी सीटें 40 से भी नीचे जा सकती थी। राहुल गांधी इसलिए उन क्षेत्रों पर या उस वोट बैंक पर ज्यादा फोकस कर रहे है जो बीजेपी या उनके सहयोगी दलों का गढ़ है।महिला के साथ साथ महादलित भी नीतीश कुमार के कोर वोटर रहे है। 2007 में नीतीश कुमार ने पासवान को छोड़कर दलित अन्य सभी दलित जातियों को महादलित का दर्जा दे दिया था। पासवान वोट रामविलास पासवान के बाद अब चिराग के साथ है लेकिन अन्य महादलित जातियां नीतीश के साथ रही है राहुल गांधी ने गया और राजगीर का दौरा कर इसी में सेंधमारी करने की कोशिश की है।

See also  नीतीश सरकार ने विकास मित्रों का बढ़ाया भत्ता और टैबलेट खरीद को मिलेंगे 25000 रुपये
WhatsApp Channel Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

Trending Now