बिहार में DM ऑफिस की संपत्ति होगी जब्त! कोर्ट ने कुर्की का दिया आदेश

बिहार में DM ऑफिस की संपत्ति होगी जब्त! कोर्ट ने कुर्की का दिया आदेश

डेस्कः बिहार के रोहतास में कोर्ट ने एक बड़ा फैसला लिया है। कोर्ट के आदेश की अवहेलना को गंभीरता से लेते हुए जिला जज-4 अनिल कुमार की अदालत ने जिलाधिकारी कार्यालय की संपत्ति कुर्क करने का आदेश जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जिलाधिकारी द्वारा लगातार आदेशों की अनदेखी की जा रही है, जो न्यायिक प्रक्रिया के साथ लुका-छिपी के समान है।

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DM कार्यालय की संपत्ति कुर्क करने का आदेश : अदालत ने बताया कि इस मामले में पहले ही 23 दिसंबर 2025 को जिलाधिकारी पर आदेश की अवहेलना के लिए 10 हजार रुपये का हर्जाना लगाया जा चुका है। इसके बावजूद निष्पादन की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे अदालत को यह कठोर कदम उठाना पड़ा। अदालत ने आदेश में कहा है कि कुर्की की कार्रवाई तब तक जारी रहेगी, जब तक जुर्माने की राशि के साथ-साथ निर्गत रकम की पूरी वसूली नहीं हो जाती।
क्या है पूरा मामला? : ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी के ब्रांच मैनेजर द्वारा वर्ष 2014 में संजय कुमार गुप्ता के विरुद्ध वाहन दुर्घटना क्लेम से संबंधित मामला दायर किया गया था। इस केस में निर्गत राशि का भुगतान कराने के लिए न्यायालय ने जिलाधिकारी को निर्देशित किया था, लेकिन वर्षों बाद भी आदेश का अनुपालन नहीं हो सका।

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‘आवश्यक पुलिस बल उपलब्ध कराया जाए’ : न्यायालय ने नगर थाना अध्यक्ष को निर्देश दिया है कि कुर्की की कार्रवाई के लिए नाजिर को आवश्यक पुलिस बल उपलब्ध कराया जाए। साथ ही पूरी प्रक्रिया शीघ्र पूरी कर अदालत को सूचित करने का भी आदेश दिया गया है। इस आदेश के बाद जिला प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है और मामले को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।यह मामला वर्ष 2003 में दाखिल दावा वाद संख्या 113/2003 से जुड़ा है। उस समय कोर्ट ने आवेदक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी, सासाराम को 3 लाख 43 हजार रुपए भुगतान करने का आदेश दिया था। साथ ही यह भी कहा गया था कि बीमा कंपनी पहले आवेदक को राशि अदा करे और बाद में चाहे तो वाहन स्वामी से वसूली कर सकती है।इसके बाद ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी ने वर्ष 2014 में वाहन स्वामी के खिलाफ इजराय वाद संख्या 01/2014 दाखिल किया। लेकिन बीते करीब 11 वर्षों से वाहन स्वामी द्वारा निर्णीत राशि का भुगतान नहीं किया गया। इस मामले में कोर्ट ने जिलाधिकारी, रोहतास से बीमा कंपनी के माध्यम से राशि की वसूली को लेकर रिपोर्ट मांगी थी।
‘कानूनी कार्रवाई में शिथिलता बरती गई’ : कोर्ट के अनुसार, आदेश के बावजूद जिलाधिकारी की ओर से कानूनी कार्रवाई में शिथिलता बरती गई। इससे नाराज होकर अदालत ने पूर्व में जिलाधिकारी पर 10 हजार रुपए का स्थगन शुल्क तत्काल कोर्ट नजारत में जमा करने का आदेश दिया था, लेकिन वह भी जमा नहीं किया गया।

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