डेस्कः राष्ट्रपति दौपर्दी मुर्मू शनिवार को 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल कांफ्रेंस में भाग लेने पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी पहुंची। सिलीगुड़ी महकमा परिषद के फांसीवाद क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम के दौरान स्थल को लेकर राष्ट्रपति ने नाराजगी जताई। इस कार्यक्रम में न तो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहुंची थी और न ही उनके मंत्रिमंडल का कोई सदस्य। राज्यपाल का तबादला हो जाने के कारण वो भी इस कार्यक्रम में पहुंच नहीं पाए।
नेपाल के चुनाव में बालेन शाह की बड़ी जीत, पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली को 50 हजार वोट से हराया
राष्ट्रपति के कार्यक्रम को प्रशासन ने अनुमति नहीं दी इसलिए ये कार्यक्रम बागडोगरा के गोशाईपुर में स्थानांतरित कर दिया गया। अपना कार्यक्रम पूरा करने के बाद राष्ट्रपति द्रौपर्दी मुर्मू मूल कार्यक्रम स्थल पर गई और कहा कि यहां 5 हजार तो क्या 5 लाख लोग भी आ सकते है, इतनी बड़ी जगह है। दरअसल में राष्ट्रपति को विधाननगर उपमंडल में कार्यक्रम करना था लेकिन प्रशासन ने अनुमति नहीं दी। राष्ट्रपति ने कहा, “मैं बंगाल की बेटी हूं, फिर भी मुझे यहां आने की अनुमति नहीं है।ममता मेरी छोटी बहन जैसी हैं, पता नहीं, शायद वह मुझसे नाराज हैं। इसीलिए मुझे कार्यक्रम में भाग लेने के लिए वहां (गोशाईपुर) जाना पड़ा। कोई बात नहीं, मुझे इस बात का कोई गुस्सा या नाराजगी नहीं है।”
UPSC में 301वीं रैंक पर 2 आकांक्षा सिंह ने किया दावा, इनमें से 1 ब्रह्मेश्वर मुखिया की पोती
संथाल कॉन्फ्रेंस के बाद राष्ट्रपति एक अन्य कार्यक्रम में शामिल होने के लिए विधाननगर मैदान पहुंचीं। वहां पहुंचकर उन्होंने मैदान का आकार देखकर आश्चर्य व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विधाननगर का मैदान काफी बड़ा है और यहां लाखों लोगों के आने की क्षमता है।राष्ट्रपति ने कहा कि अगर अंतरराष्ट्रीय संथाल कॉन्फ्रेंस का आयोजन इस बड़े मैदान में किया जाता तो करीब पांच लाख लोग इसमें शामिल हो सकते थे।उन्होंने सवाल उठाया कि जब इतना बड़ा मैदान उपलब्ध था तो फिर कॉन्फ्रेंस के लिए इतनी छोटी जगह क्यों तय की गई।
निशांत कुमार ने जेडीयू नेताओं के साथ की बैठक, संजय झा के आवास पर हुआ विधायकों और नेताओं का जमावड़ा
राष्ट्रपति की नाराजगी के बाद बीजेपी ने ममता सरकार पर साधा निशाना
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल दौरे पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नहीं पहुंचने और आदिवासी समाज के कार्यक्रम में गैरहाजिर होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निशाना साधा है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि यह शर्मनाक और अभूतपूर्व है। लोकतंत्र और आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण में विश्वास रखने वाला हर व्यक्ति निराश है। स्वयं आदिवासी समुदाय से आने वाली राष्ट्रपति जी द्वारा व्यक्त की गई पीड़ा और दुख ने भारत की जनता के मन में गहरा दुख पहुंचाया है। पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार ने सारी हदें पार कर दी हैं। राष्ट्रपति के इस अपमान के लिए उनका प्रशासन जिम्मेदार है। यह भी उतना ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि पश्चिम बंगाल सरकार संथाल संस्कृति जैसे महत्वपूर्ण विषय को इतनी लापरवाही से ले रही है। राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर है और इस पद की गरिमा का हमेशा सम्मान किया जाना चाहिए। आशा है कि पश्चिम बंगाल सरकार में सुधरने की भावना विकसित होगी।
PM Modi (@narendramodi) posts, “This is shameful and unprecedented. Everyone who believes in democracy and the empowerment of tribal communities is disheartened. The pain and anguish expressed by Rashtrapati Ji, who herself hails from a tribal community, has caused immense… pic.twitter.com/W1dHDhsxtK
— Press Trust of India (@PTI_News) March 7, 2026
राष्ट्रपति मुर्मू की नाराजगी के बाद बीजेपी ने ममता बनर्जी पर निशाना साधा। पश्चिम बंगाल के सह प्रभारी अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट कर राज्य सरकार पर हमला किया। उन्होंने कहा, “आज पश्चिम बंगाल में घटी घटनाओं से ममता बनर्जी सरकार के नेतृत्व में संवैधानिक ढांचे के पूर्ण पतन का संकेत मिलता है। एक दुर्लभ और अभूतपूर्व घटनाक्रम में, भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने सिलीगुड़ी यात्रा के दौरान तैयारियों और प्रोटोकॉल के अभाव पर खुले तौर पर नाराजगी व्यक्त की. ससे भी अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि राज्य सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय संथाली सम्मेलन के लिए अनुमति देने से इनकार कर दिया, जहां स्वयं राष्ट्रपति मुख्य अतिथि थीं।”
The events in West Bengal today point to a complete collapse of the constitutional framework under the Mamata Banerjee government.
In a rare and unprecedented development, the Hon’ble President of India, Smt Droupadi Murmu, openly expressed displeasure over the lack of… pic.twitter.com/ZMiRwZkVbJ
— Amit Malviya (@amitmalviya) March 7, 2026
अमित मालवीय ने कहा कि, जब कोई राज्य सरकार भारत के राष्ट्रपति के पद की गरिमा का अनादर करने लगती है, तो यह न केवल प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है, बल्कि संवैधानिक मर्यादा और शासन व्यवस्था के पतन को भी दर्शाता है। यह केवल अभद्रता नहीं है। यह संस्थागत अनादर है और एक बार फिर इस बात का प्रमाण है कि बंगाल में शासन व्यवस्था किस प्रकार अराजकता में डूब गई है।उन्होंने कहा कि साल 2003 को संथाल समुदाय के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा। उस साल, संथाल भाषा को भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था।पिछले साल, पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर, संथाल भाषा में ओल चिकी स्क्रिप्ट में लिखा गया भारत का संविधान जारी किया गया था।




