दिल्ली: लोकसभा चुनाव में मिली बहुमत के बाद एनडीए संसदीय दल की बैठक शुक्रवार को पुराने संसद भवन में हुई। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एनडीए संसदीय दल का नेता चुना गया। नरेंद्र मोदी जब बैठक में पहुंचे तो सदस्यों ने मोदी-मोदी के नारे लगाए। मोदी ने खड़े होकर हाथ जोड़ते हुए अभिवादन स्वीकार किया।
इस बैठक में सबसे पहले बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पीएम मोदी को संसदीय दल का नेता चुने जाने का प्रस्ताव पेश किया। इसके बाद अमित शाह, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, कुमारस्वामी, चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार ने नरेंद्र मोदी को संसदीय दल का नेता बनाने का प्रस्ताव रखा।
बीजेपी अध्य़क्ष जेपी नड्डा ने अपने संबोधन में कहा कि “आज भारत पुनः इतिहास रच रहा है कि तीसरी बार लगातार बहुमत के साथ NDA की सरकार आ रही है…हमने ओडिशा में भी अपनी विचारधारा की सरकार बनाई और वहां भी हमें सफलता मिली…10 साल पहले उदासीन भारत था, 10 साल पहले भारत के बारे में कहा जाता था कि यहां कुछ बदलने वाला नहीं है और आज 10 साल बाद पीएम मोदी के नेतृत्व में वही भारत आकांक्षी भारत बन गया है।”
अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि “अभी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा सदन के नेता, भाजपा संसदीय दल के नेता और NDA संसदीय दल के नेता के रूप में नरेंद्र मोदी के नाम का प्रस्ताव रखा है, इसका मैं समर्थन करता हूं…यह प्रस्ताव 140 करोड़ की देश की जनता के मन का प्रतिघोष है…”
राजनाथ सिंह ने कहा कि भाजपा सांसद राजनाथ सिंह ने कहा, “आज हम भाजपा के संसदीय दल के नेता और NDA संसदीय दल के नेता और लोकसभा के नेता के चयन के लिए यहां एकत्रित हुए हैं। मैं समझता हूं कि मोदी जी का नाम इन सारे पदों के लिए सबसे योग्य और उपयुक्त है…”
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, “पिछले 10 साल में उनके(PM मोदी) नेतृत्व में कार्य करने का सौभाग्य हमें मिला हमारा देश सुखी हो संपन्न हो समृद्ध हो विश्व की महाशक्ति बने और समाज के सर्वांगिन क्षेत्र में उन्नति और विकास हो इसके लिए समर्पित भाव से उन्होंने(पीएम नरेंद्र मोदी) काम किया है… रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जो प्रस्ताव रखा है मैं उसका अनुमोदन करता हूं। ”
TDP प्रमुख चंद्रबाबू नायडू ने कहा, “हम सभी को बधाई देते हैं, हमने शानदार बहुमत हासिल किया है। मैंने चुनाव प्रचार के दौरान देखा है कि 3 महीने तक पीएम मोदी ने कभी आराम नहीं किया। दिन-रात उन्होंने प्रचार किया। उन्होंने उसी भावना के साथ शुरुआत की और उसी भावना के साथ खत्म किया। आंध्र प्रदेश में हमने 3 जनसभाएं और 1 बड़ी रैली की और इसने आंध्र प्रदेश में चुनाव जीतने में बहुत बड़ा अंतर पैदा किया…”




