रांचीः राजस्थान कैडर के 2014 बैच के आईएएस अधिकारी आशीष मोदी के कथित गलत जाति प्रमाण पत्र का मामला राज्यस्तरीय जाति छानबीन समिति में पहुंच गया है। उनका ओबीसी जाति प्रमाण पत्र गिरिडीह में बना है। समिति ने गिरिडीह के एसपी से इस संबंध में विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है।

राज्य के कल्याण सचिव की अध्यक्षता वाली इस समिति में आदिवासी कल्याण आयुक्त, टीआइआई के निदेशक, कार्मिक विभाग के अपर सचिव, पिछड़ा वर्ग आयोग के सचिव, कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव और पिछड़े वर्ग की जातियों के सबंध में विशेषता रखने वाले डॉक्टर एलएन राणा सदस्य हैं। मालूम हो कि आशीष मोदी के ओबीसी जाति प्रमाण पत्र गलत होने की शिकायत राजस्थान की 2013 बैच की आईएएस अधिकारी भारती दीक्षित ने की है। कभी दोनों पति-पत्नी थे। 15 दिसंबर 2025 को आपसी सहमति से दोनों का तलाक हो गया। अब भारती दीक्षित ने सवाल उठाया है कि झारखंड से ओबीसी के रूप में मोदी का जाति प्रमाण पत्र कैसे बना है, जबकि झारखंड में मोदी जाति ओबीसी की सूची में नहीं है। केंद्र सरकार भी झारखंड के मुख्य सचिव अविनाश कुमार से इस संबंध में रिपोर्ट मांग चुकी है। मुख्य सचिव ने केंद्र सरकार के पत्र को गिरिडीह डीसी को भेजा था। डीसी ने उसे एसडीओ को भेज दिया है। एसडीओ इस मामले की जांच कर रहे हैं। लेकिन अब इस मामले का अंतिम फैसला राज्यस्तरीय जाति छानबीन समिति से होगा, क्योंकि यही समिति जाति प्रमाण पत्र और किसी के आरक्षित जाति के होने या नहीं होने की बात तय करती है। इस सक्षम प्राधिकार के पास कार्मिक विभाग से मामला रेफर हो जाने के कारण अंतिम फैसला इसी समिति में होगा।


रिपोर्ट आने पर दोनों को आमने-सामने बैठाकर सुनवाई होगी
जाति छानबीन समिति मामले की जांच पुलिस के माध्यम से कराती है। जांच अधिकारी संबंधित कार्यालय और स्थल निरीक्षण के बाद समिति को रिपोर्ट देंगे। अगर रिपोर्ट में पाया जाता है कि संबंधित व्यक्ति का सामाजिक स्तर पर दावा सही नहीं है या संदेहास्पद है या गलत रूप से दावा पेश किया गया है तो समिति आवेदन को कार्यालय प्रमुख के माध्यम से शोकॉज करेगा। नोटिस मिलने के 15 से 30 दिनों के भीतर जवाब देना होगा। अगर आवेदक उसे सुनने और बचाव में कुछ पेश करने का अवसर चाहता है तो अध्यक्ष समिति की बैठक बुलाएंगे। उसे साक्ष्य पेश करने का अवसर देंगे। आरोपी और शिकायतकर्ता को आमने-सामने बैठाकर सुनवाई करेंगे। फिर आदेश जारी किया जाएगा। इस समिति का आदेश अंतिम होगा।





