Manoj Kumar Death News: नहीं रहे दिग्गज एक्टर मनोज कुमार, 87 साल की उम्र में ली अंतिम सांस, इंडस्ट्री में शोक की लहर

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April 4, 2025

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डेस्कः बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री से एक बेहद दुखत खबर सामने आ रही है। हिंदी फिल्म जगत के दिग्गज अभिनेता और फिल्म डायरेक्टर मनोज कुमार अब इस दुनिया में नहीं रहे। खास कर अपनी देशभक्ति फिल्मों के लिए जाने जानेवाले मनोज कुमार को लोग प्यार से ‘भारत कुमार’ भी कहते हैं।

87 वर्ष की आयु में कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में उनका निधन हो गया। एक्टर के निधन की वजह के बारे में अभी ज्यादा जानकारी नहीं मिल पाई है। माना जा रहा है कि उम्र संबंधी तकलीफों से वो जूझ रहे थे।

उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से नवाजा गया था। उन्हें भारतीय सिनेमा और कला में उनके योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा 1992 में पद्म श्री और 2015 में सिनेमा के क्षेत्र में सर्वोच्च पुरस्कार दादा साहब फाल्के पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। लीड रोल के तौर पर उनकी 1964 में आई राज खोसला की रहस्य थ्रिलर ‘वो कौन थी?’ सुपरहिट साबित हुई। इस फिल्म के गाने जैसे ‘लग जा गले’ और ‘नैना बरसे रिमझिम’ को लोगों ने खूब प्यार दिया जिन्हें लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी थी।

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कौन थे मनोज कुमार

उनका जन्म ब्रिटिश भारत (मौजूदा समय में जिसे खैबर पख्तूनख्वा , पाकिस्तान कहते हैं ) के उत्तर-पश्चिमी प्रांत के एक शहर एबटाबाद में एक पंजाबी हिंदू ब्राह्मण परिवार में हुआ था । एक्टर का जन्म का नाम हरिकृष्ण गिरि गोस्वामी है। जब वह 10 साल के थे तो उनका परिवार बटवारे के कारण जंडियाला शेर खान से दिल्ली आ गया।

मनोज कुमार इन फिल्मों के लिए मशहूर

मनोज कुमार ने ‘सहारा’ (1958), ‘चांद’ (1959) और ‘हनीमून’ (1960) जैसी फिल्मों में खाम किया और फिर उन्हें मिली ‘कांच की गुड़िया’ (1961) जिसमें वो पहली बार लीड रोल में दिखे। इसके बाद ‘पिया मिलन की आस’ (1961), ‘सुहाग सिंदूर’ (1961), ‘रेशमी रूमाल’ (1961) आई।

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मनोज कुमार की फिल्में

उनकी पहली रिलीज़ देशभक्ति फिल्म ‘शहीद’ थी, जो स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह के जीवन पर आधारित थी । इस फिल्म को क्रिटिक्स और दर्शकों के साथ-साथ भारत के तत्कालीन प्रधान मंत्री लाल बहादुर शास्त्री से भी जमकर तारीफ मिली और ये बॉक्स ऑफिस पर हिट रही। साल 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद, प्रधान मंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने उन्हें लोकप्रिय नारे ‘जय जवान जय किसान’ पर आधारित एक फिल्म बनाने के लिए कहा।

इसके बाद उन्होंने देशभक्ति फिल्म ‘उपकार’ (1967) बनाई, जिसे क्रिटिक्स की खूब तारीफें मिली और यह उस वर्ष बॉक्स ऑफिस पर हिट रही और ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर बनकर उभरी । इस फिल्म का संगीत 1960 के दशक का छठा सबसे अधिक बिकने वाला हिंदी फिल्म एल्बम था। फिल्म ‘उपकार’ का एक गीत , ‘मेरे देश की धरती’ हर साल भारत में गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान बजाया जाता है ।

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