दावोसः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्द विराम उनकी वजह से हुआ । वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में ट्रंप ने खुद को शांति दूत बताते हुए ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की बात दोहराई । ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान को लेकर इससे पहले भी कई बार सीजफायर कराने का श्रेय लिया है।
ग्रीनलैंड पर ट्रंप ने आधे घंटे से अधिक तक बोला और कहा ग्रीनलैंड दे दो नहीं तो अमेरिका याद रखेगा । डावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मंच से अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो और यूरोप को लेकर कड़े और विवादास्पद बयान दिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका नाटो को बहुत अधिक देता है, लेकिन बदले में उसे बहुत कम मिलता है। ट्रंप के शब्दों में, अमेरिका को “मौत, अव्यवस्था और भारी मात्रा में पैसा ऐसे लोगों को देना पड़ता है, जो हमारे काम की कद्र नहीं करते।”
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिका को नाटो से “कुछ भी हासिल नहीं हुआ”, सिवाय इसके कि उसने यूरोप को रूस से बचाया। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद नाटो प्रमुख मार्क रूटे की ओर इशारा किया, जिन्होंने हाल ही में नाटो देशों के रक्षा खर्च बढ़ाने को लेकर ट्रंप के दबाव की सराहना की थी।
दावोस में डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत पाकिस्तान के बीच हुए युद्धविराम का क्रेडिट लिया और कहा उन्होंने एक दिन में ये कर के दिखा दिया । #indiapakistanwar #DonaldTrump #WEF26 pic.twitter.com/UiGpEmPiWw
— Live Dainik (@Live_Dainik) January 21, 2026
ग्रीनलैंड के मुद्दे पर ट्रंप ने कहा कि वह इसे हासिल करने के लिए बल प्रयोग नहीं करेंगे, लेकिन यह भी जोड़ा कि “अगर मैं अत्यधिक ताकत और बल का इस्तेमाल करूं, तो हम अजेय होंगे।” इसके तुरंत बाद उन्होंने ग्रीनलैंड को लेकर अपनी पुरानी इच्छा दोहराते हुए कहा कि अमेरिका इसके अधिग्रहण पर “तत्काल बातचीत” चाहता है।
हालांकि, डेनमार्क पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि उसका अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड बिक्री के लिए नहीं है। यूरोप पर निशाना साधते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका यूरोप के लोगों की परवाह करता है और सभ्यतागत रिश्तों में विश्वास रखता है, लेकिन ऊर्जा, व्यापार, आव्रजन और आर्थिक नीतियों के मामले में यूरोप “खुद को नष्ट कर रहा है।” उन्होंने कहा, “हमें मजबूत सहयोगी चाहिए, कमजोर नहीं।”
ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप ने द्वितीय विश्व युद्ध का हवाला देते हुए कहा कि उस समय डेनमार्क जर्मनी के सामने जल्दी हार गया था और तब अमेरिका को भारी कीमत चुकाकर ग्रीनलैंड में सैन्य ठिकाने बनाने पड़े। उन्होंने दावा किया, “अमेरिका ने दूसरा विश्व युद्ध जीता। हमारे बिना आप आज जर्मन और जापानी बोल रहे होते।” युद्ध के बाद ग्रीनलैंड डेनमार्क को लौटाने पर भी ट्रंप ने सवाल उठाए। ट्रंप के इन बयानों से डावोस में मौजूद यूरोपीय नेताओं और विश्लेषकों के बीच नई बहस छिड़ गई है और ट्रांस-अटलांटिक संबंधों में तनाव की आशंका एक बार फिर गहराती दिख रही है।




