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IGIMS में MBBS परीक्षा में गड़बड़ी, 8 लाख में पेपर की डील, एक ई-मेल से खुला खेल

IGIMS में MBBS परीक्षा में गड़बड़ी, 8 लाख में पेपर की डील, एक ई-मेल से खुला खेल

पटनाः IGIMS में एमबीबीएस परीक्षा में गड़बड़ी हुई है। संस्थान की जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में इस बात को स्वीकार किया है। इसके बाद संस्थान प्रशासन ने एमबीबीएस के सेकेंड सेमेस्टर 2025 की परीक्षा रद्द कर दी है।संस्थान प्रशासन ने डीन एग्जामिनेशन सेक्शन से जुड़े कर्मियों और कुछ छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही, एग्जाम कमिटी में बड़े पैमाने पर फेरबदल का फैसला लिया गया है।
हालांकि, संस्थान के शिक्षकों-छात्रों ने जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं। छात्रों का आरोप है कि रिपोर्ट में लीपापोती की गई है और मुख्य दोषी को बचाया गया है। उनका यह भी कहना है कि जिस व्यक्ति पर सबसे ज्यादा आरोप थे, उनकी जिम्मेदारी कम करने की बजाए उन्हें और अधिक अधिकार दे दिए गए हैं, जिससे छात्रों में आक्रोश है।परीक्षा शाखा में बदलाव करते हुए डॉ. अंजू सिंह, डॉ. विनोद कुमार और डॉ. सरिता मिश्रा को सब डीन (एग्जाम) का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। अन्य कर्मचारियों का इस डिपार्टमेंट से तबादला किया जा रहा है। बताया जाता है कि 8 लाख में पेपर का सौदा किया गया।
एक ईमेल से खुला पेपर लीक का खेल
मामले की शुरुआत 13 मार्च को एक अनजान ई-मेल से हुई थी, जिसमें परीक्षा में पेपर लीक और पैसों के लेन-देन का आरोप लगाया गया था। हालांकि आरोप सामने आने के करीब 1 महीने बाद डॉ. ओम की अध्यक्षता में इंटरनल जांच कमिटी गठित की गई।बाद में मीडिया में खबर प्रकाशित होने के बाद फिर से तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन पीएसएम विभागाध्यक्ष डॉ. संजय कुमार की अध्यक्षता में किया गया, जिसमें डॉ. ज्ञान भास्कर और डॉ. अश्विनी को सदस्य बनाया गया।समिति को 7 कार्य दिवस में रिपोर्ट सौंपनी थी, लेकिन रिपोर्ट सौंपने में एक महीने से भी अधिक समय लग गया। इस बीच कई प्रशासनिक उलट-फेर किए गए और संस्थान में पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठाए जाते रहे।विवाद में एक और बड़ा सवाल यह है कि कॉलेज के प्रिंसिपल को जांच प्रक्रिया से दूर रखा गया। छात्रों और कुछ शिक्षकों का कहना है कि 13 मार्च के बाद हुई किसी भी बैठक में प्रिंसिपल को नहीं बुलाया गया। जांच समिति को परीक्षा की कॉपी तक नही दी गई ।
5 से 8 लाख में पेपर की हुई डील
एमबीबीएस सेकंड सेमेस्टर ईयर परीक्षा में पेपर लीक और उत्तर पुस्तिका में हेर फेर के लिए 5 से 8 लाख रुपए तक की डील की गई। पेपर लीक और आंसर शीट की कीमत अलग-अलग तय की गई थी। यही नहीं परीक्षा शाखा के सीसीटीवी में संदिग्ध लोगों की आवाजाही के भी सबूत मिले हैं। शुरुआती जांच में उत्तर पुस्तिकाओं पर साइन से जुड़ी गलतियां भी सामने आईं हैं।

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