हजारीबागः मुफस्सिल थाना क्षेत्र स्थित पौता जंगल की नदी में सोमवार को दो युवतियों और एक युवक का शव बरामद किया गया था। मृतकों की पहचान 19 साल की खुशी परवान, 19 साल के सानिया परवीन और 27 साल के आदिल हसन के रूप में हुई। तीनों आपस में ममेरे-मौसेरे और फुफेरे भाई-बहन थे।
19 मई को होने वाली थी खुशी परवीन की शादी
सानिया ने हाल ही में दुमका एग्रीकल्चर काॅलेज में दाखिला लिया था जबकि खुशी केबी महिला काॅलेज हजारीबाग में पढ़ाई कर रही थी। परिजनों के मुताबिक, 23 अप्रैल को तीनों आम तोड़ने की बात कहकर घर से निकले थे, लेकिन देर रात तक नहीं लौटे। इसके बाद मुफस्सिल थाना में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई गई थी। परिजनों ने बताया कि पुलिस जांच के दौरान आदिल के मोबाइल का लोकेशन मोरांगी क्षेत्र में मिली, लेकिन तीनों का पता नहीं चल सका। आदिल के चाचा जो झारखंड जगुआर के जवान है उन्होंने आरोप लगाया कि मुफस्सिल पुलिस ने हमारे साथ इंसाफ नहीं किया। हम दो दिन यहां रहे बड़ा बाबू का पैर-हाथ पकड़े, डीएसपी साहब से फोन करवाये फिर भी कोई सुनवाई नहीं हुई। जब हम लोगों का ये हालत है तो आम जनता का क्या होगा। मुफस्सिल थाना सिर्फ दलाल से चल रहा है। उन्होंने बताया कि लड़की खुशी परवीन की शादी 19 मई को होने वाली थी। सुल्ताना के दो लोगों ने धमकी दी कि लड़की की शादी होने नहीं देंगे। कुछ मैटर है जिस वजह से वो शादी नहीं होने देने की धमकी दे रहा था, थाना में सबकुछ दिया हुआ है। प्रशासन ने कुछ भी नहीं किया।
हजारीबाग में लापता भाई-बहनों का शव नदी में मिलने के बाद परिजनों का पुलिस पर गंभीर आरोप
19 मई को होने वाली थी मृतका खुशी परवीन की शादी pic.twitter.com/NvOghKsWL2— Live Dainik (@Live_Dainik) April 28, 2026
ठिकाना बताने के लिए मांगे 50 हजार रुपये
मृतका खुशी के भाई शाहिद अंसारी ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि लापता बच्चों की तलाश के नाम पर पुलिस ने उनसे 4500 रुपये लिए, लेकिन बाद में यह कहकर गुमराह किया गया कि “बच्चे सुरक्षित हैं और अजमेर शरीफ पहुंच गए हैं।”परिजनों का आरोप है कि मामले में एक कथित यूट्यूबर और दलाल ने भी बच्चों को खोजने के बदले 50 हजार रुपये की मांग की थी। इससे परिवार पहले ही परेशान था और अब शव मिलने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं।शाहिद अंसारी ने कहा कि जिस स्थान से शव बरामद हुए, वहां ग्रामीण पहले भी खोजबीन कर चुके थे, लेकिन उस समय वहां कुछ नहीं मिला था। ऐसे में पूरे मामले को लेकर संदेह और गहरा गया है। शाहिद ने आरोप लगाया कि प्रशासन उसे गुमराह करती रही, खर्चा-पानी के नाम पर पैसा लिया और झूठमुठ का धूमाती रही, फिर कहां कि लड़का-लड़की का लोकेशन पता चल गया है ये बड़काकाना से गरीब रथ पकड़कर अजेमर चले गये है। प्रशासन ने झूठा रिपोर्ट हमें बताया लड़के का पर्सनल फोटो हमलोगों को दिखाया। पुलिस को ये फोटो देने वाला सुहैल जो मफस्सिल थाना का दलाल है उसने दिया। इसके एक दिन बात वो दलाल सुहैल ने हमारे भाई को फोन किया कहा कि लड़का-लड़की का पता चल गया है, वो मिल जाएगा और 50 हजार का डिमांड किया। तीनों में सिर्फ लड़के के पास मोबाइल था तो आखिर लड़के का पर्सनल फोटो सुहैल के पास कैसे गया ये बड़ा सवाल है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हजारीबाग एसपी अमन कुमार ने जांच के आदेश दिए हैं। एडीशनल एसपी अमित कुमार और एसडीपीओ अमित आनंद को पूरे प्रकरण की जांच सौंपी गई।



