कौन है नखरेबाज ट्रेनी IAS पूजा खेड़कर, ऑडी पर नीली बत्ती, झूठ बोलकर UPSC पास करने का आरोप

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July 11, 2024

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प्रोबेशन के दौरान ‘VIP’ मांगों और अब ट्रेनी IAS डॉक्टर पूजा खेड़कर चर्चा में हैं। एक बार फिर उनकी विवादित नियुक्ति का मुद्दा उठने लगा है। खास बात है कि पूजा पर फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट लगाकर पद हासिल करने के आरोप हैं। उस सर्टिफिकेट के जरिए दावा किया गया था कि वह दृष्टिबधित हैं। अब एक और खुलासा हुआ है कि खेड़कर परिवार के पास करोड़ों रुपये की संपत्ति है।

माता-पिता दोनों हैं करोड़पति

पुणे की एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, खेड़कर के पास 17 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति है। UPSC में जमा स्टेटमेंट ऑफ एसेट्स के हवाले से यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, पूजा के रिटायर्ड अधिकारी पिता दिलिप खेड़कर के पास 40 करोड़ रुपये और मां मनोरमा के पास 15 करोड़ रुपये की संपत्ति है। रिपोर्ट के अनुसार, UPSC को दी गई जानकारी के अनुसार, IAS अधिकारी के तौर पर ज्वाइन करने से पहले पूजा के पास 17 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति थी। उनकी सालाना आय 43 लाख रुपये थी।

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नखरेबाज ट्रेनी IAS पूजा खेड़कर ा लगा ली नीली बत्ती, UPSC से पहले जुटाई इतनी संपत्ति

रिपोर्ट के अनुसार, पूजा की तरफ से UPSC को बताया गया है कि उनके पास म्हालुंगे में 5.81 और 5.90 गुंठा का प्लॉट, कोंधवा में 724 वर्गफीट का प्लॉट, 4.74 हेक्टेयर जमीन धादवली में, नंदूर में 2.89 हेक्टेयर, 0.81 हेक्टेयर पचुंदे और सरेड़ी में 984 वर्गफीट जमीन है।

सर्टिफिकेट पर सवाल

पूजा खेड़कर पर नॉन क्रीमी लेयर यानी NCL सर्टिफिकेट लगाने के भी आरोप हैं। खास बात है कि उनके पिता दिलिप पूर्व गैजेटेड ऑफिसर हैं। वह साल 2024 में अहमदनगर से लोकसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं। उस दौरान उन्होंने 40 करोड़ की संपत्ति घोषित की थी। पूजा ने OBC वर्ग में UPSC परीक्षा दी थी।

जांच के लिए कभी नहीं पहुंचीं

पूजा ने PWD वर्ग के तहत UPSC की परीक्षा दी थी। साथ ही उन्होंने मानसिक रूप से बीमार होने के सर्टिफिकेट भी जमा किया था। अब जब उन्हें मेडिकल जांच के लिए बुलाया गया तो, वह नहीं पहुंची। कहा जा रहा है कि वह 6 बार जांच से गायब रहीं। परीक्षा में कम अंक प्राप्त करने के बावजूद, इन रियायतों के कारण वह परीक्षा पास करने में सफल रहीं और उन्होंने ऑल इंडिया रैंक (एआईआर) 841 हासिल की। चयन के बाद यूपीएससी ने उनकी विकलांगता की पुष्टि करने के लिए मेडिकल टेस्ट कराने को कहा।

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खेडकर ने छह अलग-अलग मौकों पर इन टेस्ट में शामिल होने से इनकार कर दिया। उनका पहला मेडिकल एग्जामिनेशन 22 अप्रैल, 2022 को दिल्ली के एम्स में शेड्यूल था। लेकिन उन्होंने कोविड पॉजिटिव होने का दावा करते हुए टेस्ट के लिए जाने से मना कर दिया। इसके बाद दिल्ली के एम्स और सफदरजंग अस्पताल में 26 और 27 मई को उनका मेडिकल एग्जामिनेशन होना था लेकिन वह वहां भी नहीं गईं। वह लगातार इन टेस्ट से बचती रहीं। 1 जुलाई को एक और अपॉइंटमेंट था लेकिन इस बार भी वह जाने से चूक गईं।

बाहर से कराई MRI, यूपीएससी ने की खारिज

हालांकि वह शुरू में 26 अगस्त, 2022 को किसी तरह एक मेडिकल एग्जामिनेशन के लिए सहमत हो गई थीं। इस बार वह टेस्ट के लिए गई थीं। कुछ टेस्ट करने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें 2 सितंबर को एक बेहद जरूरी एमआरआई कराने के लिए बुलाया था। इस एमआरआई का उद्देश्य उनकी दृष्टि हानि (vision loss) का आकलन करना था। लेकिन वह नहीं गईं।

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इन टेस्ट में शामिल होने के बजाय, खेडकर ने एक बाहरी सेंटर से एमआरआई कराई और रिपोर्ट लाकर दी। लेकिन यूपीएससी ने इस रिपोर्ट को खारिज कर दिया। इसके बाद यूपीएससी ने उनके चयन को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) में चुनौती दी, जिसने 23 फरवरी, 2023 को उनके खिलाफ फैसला सुनाया। इसके बावजूद, बाद में उनके एमआरआई प्रमाणपत्र को स्वीकार कर लिया गया और उनकी आईएएस के तौर पर नियुक्ति हो गई। विकलांगता के दावों के अलावा, खेडकर के ओबीसी नॉन-क्रीमी लेयर दर्जे के दावों में भी विसंगतियां पाई गईं।

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