रांचीः मंगलवार को रांची में प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन से जुड़े 16 नक्सलियों ने झारखंड पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने वालों में छह इनामी नक्सली शामिल हैं, जिन पर कुल 39 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इस समूह में पांच महिला नक्सली भी शामिल हैं।आत्मसमर्पण करने वालों में संगठन के विभिन्न स्तरों के कमांडर और दस्ता सदस्य शामिल हैं। इनके पास से 11 हथियार तथा 1562 गोलियां भी बरामद हुई हैं।
नक्सलियों पर बढ़ रहा दबाव
डीजीपी तदाशा मिश्र के अनुसार, झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ, कोबरा बटालियन और झारखंड जगुआर के संयुक्त अभियान के कारण माओवादी संगठन पर लगातार दबाव बढ़ रहा है।दूसरी ओर, झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर कई नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं।
आत्मसमर्पण करने वालों में पांच महिलाएं भी शामिल
आत्मसमर्पण करने वाले 16 नक्सलियों में 11 पुरुष और 5 महिलाएं शामिल हैं. इनमें एक रीजनल कमेटी सदस्य (RCM), तीन जोनल कमेटी सदस्य (ZCM), तीन सब-जोनल कमेटी सदस्य (SZCM), छह एरिया कमेटी सदस्य (ACM) तथा तीन दस्ता सदस्य शामिल हैं। ये सभी कोल्हान और सारंडा के दुर्गम जंगल-पहाड़ी क्षेत्रों में सक्रिय थे तथा संगठन के शीर्ष नेताओं मिसिर बेसरा उर्फ सागर जी और असीम मंडल की टीम से जुड़े बताए गए हैं।
128 आपराधिक मामलों में संलिप्त था संतोष महतो
आत्मसमर्पण करने वालों में सबसे प्रमुख नाम संतोष महतो उर्फ बसुदेव दा उर्फ दिलीप का है। वह प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) का रीजनल कमेटी सदस्य था और उसके ऊपर 15 लाख रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस के मुताबिक, संतोष महतो 128 आपराधिक मामलों में वांछित था। उसके ऊपर एक मार्च को मनोहरपुर, छोटानगर और झारियाकेला थाना क्षेत्र की सीमा से लगे जंगल में आईईडी विस्फोट की घटना में शामिल होने का भी आरोप है। इस विस्फोट में कोबरा बटालियन का एक जवान घायल हो गया था।


आत्मसमर्पण करने वालों में जोनल कमेटी सदस्य चंदन लोहरा भी शामिल है। उसके खिलाफ 78 मामले दर्ज हैं और उस पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस का मानना है कि उसके आत्मसमर्पण से संगठन की गतिविधियों को बड़ा झटका लगेगा।
सरेंडर करने वाले नक्सली के नाम
- संतोष उरांव उर्फ बासुदेव दा उर्फ गांधी उर्फ दिलीप उर्फ संजय महतो उर्फ बासूकू उर्फ श्याम (पिता – माधव महतो उर्फ लोधा महतो, गम्हर, थाना – पीरटाड़, गिरिडीह) – रैंक आरसीएम, 15 लाख का इनामी. बरामदगी: इंसास राइफल – 01, मैगजीन – 05, कारतूस – 136 राउंड
- संतोष मांझी उर्फ जगबंधु (पिता – मंझला मांझी, तिलैया, थाना – विष्णुगढ़, हजारीबाग) – रैंक जेडसीएम, 32 कांड. बरामदगी: इंसास राइफल – 01, मैगजीन – 05, कारतूस – 125 राउंड
- चंदन लोहरा (पिता – एतवा लोहरा, बारीगढ़ा, थाना – अड़की, खूंटी) – रैंक जेडसीएम, 78 कांड, 10 लाख का इनामी. बरामदगी: एके-47 राइफल – 01, मैगजीन – 02, कारतूस – 129 राउंड
- जयकांत मुंडा उर्फ गूंगा उर्फ बंगाली (पिता – स्व. जादा मुंडा, पत्नी – मणिका मुंडा, झिरपानी, थाना – कोइड़ा, सुंदरगढ़, ओडिशा) – रैंक जेडसीएम, 38 कांड. बरामदगी: एके-47 राइफल – 01, मैगजीन – 02, कारतूस – 100 राउंड
- राजनाथ हांसदा उर्फ गुना हांसदा (पिता – मुसुंगू हांसदा, हतनाबुरू, थाना – छोटानागरा, प. सिंहभूम) – रैंक एसजेडसीएम, 06 कांड. बरामदगी: एचके-33 राइफल – 01, एलएमजी मैगजीन – 03, कारतूस – 208 राउंड
- अनिल तुरी उर्फ उज्ज्वल (पिता – भोंदुआ तुरी, चैनपुर, थाना – पेशरार/बगडू, लोहरदगा) – रैंक एसजेडसीएम, 22 कांड, 05 लाख का इनामी. बरामदगी: इंसास राइफल – 01, मैगजीन – 04, कारतूस – 150 राउंड
- सुखलाल बिरंजिया उर्फ अकेला (पिता – स्व. चांदो बिरंजिया, कबरी कोटाम- बारीबांध, थाना – गारू, लातेहार) – रैंक एसजेडसीएम, 12 कांड, 05 लाख का इनामी. कोई हथियार बरामद नहीं
- सुरेश होनहागा उर्फ सोनाराम होनहागा उर्फ सोना (पिता – कांडे होनहागा, थलकोबाद, टोला-दुमांगदिरी, थाना – छोटानागरा, पश्चिम सिंहभूम) – रैंक एसीएम, 33 कांड, 02 लाख का इनामी. बरामदगी: इंसास राइफल – 01, मैगजीन – 05, कारतूस – 125 राउंड
- एतवारी मांझी उर्फ सोनोत उर्फ संत उर्फ शनिचरवा (पिता- मंझला मांझी, मोहनपुर जबरदाहा, थाना – मधुबन, गिरिडीह) – रैंक एसीएम, 09 कांड. बरामदगी: इंसास राइफल – 01, मैगजीन – 05, कारतूस – 125 राउंड
- देवान मुर्मू उर्फ शनिचर (पिता- बुधन मुर्मू, मोहनपुर, थाना – निमियाघाट, गिरिडीह) – रैंक एसीएम, 06 कांड. बरामदगी: इंसास राइफल – 01, मैगजीन – 04, कारतूस – 125 राउंड
- सुमित्रा सुरीन (पिता- तुरी सुरीन, तिरिलबुरू, छोटा कुईडा, थाना – गोईलकेरा, पश्चिम सिंहभूम) – रैंक एसीएम, 15 कांड. कोई हथियार बरामद नहीं
- चंपा मंझियाईन उर्फ गुड़िया ( पिता- रामदेव मुर्मू, गोरगोरवा, थाना – नावाडीह, बोकारो) – रैंक कैडर, 05 कांड. बरामदगी: यूएस कार्बाइन राइफल – 01, मैगजीन – 02, कारतूस – 95 राउंड
- रिसिव (पिता- बुधु सोय, माईलपी, टोला- सोयसाई, थाना – सोनुआ, पश्चिम सिंहभूम) – रैंक एसीएम, 18 कांड, 02 लाख का इनामी. कोई हथियार बरामद नहीं
- सालमी मुंडा उर्फ पारूल (पिता- पांडा मुडा, पति – चंदन लोहरा, बारूहातु, थाना – बुंडू, रांची) – रैंक एसीएम, 06 कांड. बरामदगी: एम-16 राइफल – 01, मैगजीन – 01, कारतूस – 244 राउंड
- मुन्नी सुरीन उर्फ मुरीन सुरीन (पिता – सतीश सुरीन, लोवाबेड़ा, थाना – सोनुआ, पश्चिम सिंहभूम) – रैंक कैडर, 14 कांड, कोई हथियार बरामद नहीं
- सीता मुंडा, (पिता- बुला मुंडा, रोलाहातू, थाना-कुचाई, जिला- सरायकेला-खरसावां)- रैंक कैडर, 03 कांड, कोई हथियार बरामद नहीं
- पुलिस के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक चलाए गए अभियानों के दौरान 93 नक्सलियों की गिरफ्तारी हुई है। 45 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है तथा पुलिस मुठभेड़ में 22 नक्सली मारे गए हैं। इससे पहले 21 मई 2026 को 27 नक्सलियों ने तथा जुलाई माह में शीर्ष माओवादी कमांडरों के विरुद्ध कार्रवाई और एक महिला एरिया कमेटी सदस्य के आत्मसमर्पण जैसी महत्वपूर्ण सफलताएं भी मिली थीं।
डीजीपी के अनुसार लगातार अभियान, संगठन के भीतर बढ़ते असंतोष और सरकार की पुनर्वास नीति के कारण माओवादी संगठन कमजोर हो रहा है। विशेष रूप से पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) और आसपास के क्षेत्रों में नक्सली गतिविधियां अब समाप्ति की ओर हैं।झारखंड पुलिस ने शेष सक्रिय नक्सलियों से भी अपील की है कि वे हिंसा और भय का रास्ता छोड़कर सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का लाभ उठाएं और समाज की मुख्यधारा से जुड़कर सम्मानजनक जीवन की शुरुआत करें।
इधर, छत्तीसगढ़ में भी झारखंड से जुड़े आठ माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें जोनल कमेटी सदस्य अश्विन उर्फ लच्छू कोरसा समेत कई एरिया कमेटी सदस्य और संगठन के अन्य सदस्य शामिल हैं। बताया गया कि ये सभी झारखंड में भी सक्रिय रहे थे. इनमें सोहन पुनेम (जिला बीजापुर, छत्तीसगढ़), राती उर्फ मंगली कुंजाम (जिला बीजापुर, छत्तीसगढ़), अनुषा कुंजाम (जिला सुकमा, छत्तीसगढ़), रजनी मुडकेम (जिला बीजापुर, छत्तीसगढ़), राहत मांडवी (जिला नारायणपुर, छत्तीसगढ़), सुबनी (जिला बीजापुर, छत्तीसगढ़) और जेलानी (जिला बीजापुर, छत्तीसगढ़) के नाम शामिल हैं।बता दें कि इससे पहले 21 मई को भी झारखंड में 25 माओवादियों और जेजेएमपी के दो उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया था। लगातार हो रहे इन सरेंडर को सुरक्षा एजेंसियां नक्सल विरोधी अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रही हैं। फिलहाल, पुलिस और सुरक्षा बलों की नजर एक-एक करोड़ के इनामी सेंट्रल कमेटी सदस्य मिसिर बेसरा और असीम मंडल पर टिकी हुई जिनके सारंडा जंगल में ही छिपे होने का संभावना है।





