घाटशिला उपचुनाव से पहले हेमंत सोरेन ने बुलाई JMM की बैठक, चंपाई की राजनीतिक ताकत का लिटमस टेस्ट, जयराम पर सबकी नजर

घाटशिला उपचुनाव से पहले हेमंत सोरेन ने बुलाई JMM की बैठक, चंपाई की राजनीतिक ताकत का लिटमस टेस्ट, जयराम पर सबकी नजर

रांचीः घाटशिला में उपचुनाव को लेकर सोमवार को चुनाव आयोग ने तारीख का एलान कर दिया। 11 नवंबर को घाटशिला में वोट डाले जाएंगे और 14 नवंबर को बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम के साथ इसका भी रिजल्ट आएगा। पूर्व शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन के निधन के बाद हो रहे इस चुनाव में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है तो पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के लिए ये चुनाव उनके राजनीतिक ताकत का लिटमस टेस्ट है।

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उपचुनाव की घोषणा के बाद मुख्यमंत्री और जेएमएम के केंद्रीय अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने झारखंड मुक्ति मोर्चा की विस्तारित बैठक 15 अक्टूबर को बुलाई है। सुबह 11 बजे से हरमू स्थित सोहराई भवन में होने वाली बैठक में पार्टी की केंद्रीय समिति के सभी पदाधिकारी, सदस्य, सभी जिलाध्यक्ष, सचिव, महानगर अध्यक्ष, जिला एवं महानगर संयोजकों को बुलाया गया है। इस बैठक में घाटशिला उपचुनाव, बिहार विधानसभा चुनाव के अलावा पार्टी के 13वें केंद्रीय महाधिवेशन के बाद सांगठिक स्थिति, वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति, सदस्यता अभियान की समीक्षा की जाएगी।

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घाटशिला उपचुनाव में न केवल बीजेपी और जेएमएम आमने-सामने होगी, बल्कि वर्तमान मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री की साख भी दांव पर होगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार के दूसरे कार्यकाल का यह पहला उपचुनाव है, इसलिए इसे सरकार की साख से जोड़कर देखा जा रहा है। इस चुनाव के रणबाकुंरें भी तय हैं। माना जा रहा है कि जेएमएम की ओर से दिवंगत रामदास सोरेन के बेटे सोमेश सोरेन और बीजेपी की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के बेटे बाबूलाल सोरेन उम्मीदवार होंगे। हालांकि अभी तक दोनों दलों की ओर से उम्मीदवारों का एलान नहीं किया गया है। कोल्हान टाइगर कहे जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के राजनीतिक ताकत का भी लिटमस टेस्ट होगा। 2024 के विधानसभा चुनाव में बाबूलाल सोरेन को रामदास सोरेन ने 22 हजार से ज्यादा वोटों से करारी शिकस्त दी थी, ऐसे में सहानुभूति की लहर को रोकना उनकी सबसे बड़ी चुनौती होगी।

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इस उपचुनाव में जयराम महतो पर भी सभी की नजर होगी। 2024 के चुनाव में जयराम महतो की पार्टी जेएलकेएम के उम्मीदवार को करीब आठ हजार वोट मिले थे। रामदास सोरेन के निधन के बाद हो रहे चुनाव में जयराम अपने उम्मीदवार उतारेंगे या नहीं ये देखना होगा, क्योंकि पूर्व शिक्षा मंत्री जगन्नाथ महतो के निधन के बाद डुमरी में हुए उपचुनाव में जेएलकेएम ने कोई उम्मीदवार नहीं दिया था और जेएमएम की बेबी देवी की उस सीट पर जीत हुई थी। हालांकि उस चुनाव से पहले ही हेमंत सोरेन ने जगन्नाथ महतो की पत्नी बेबी देवी को मंत्री बना दिश था। लेकिन इस बार ऐसा नहीं है, रामदास के बड़े बेटे सोमेश को मंत्री नहीं बनाया गया है। ये जरूर है कि जेएमएम की ओर से संकेत दिए गए है कि सोमेश ही उपचुनाव में उम्मीदवार होंगे। इसलिए घाटशिला में जेएलकेएम कोई उम्मीदवार देता है या नहीं ये भी एक फैक्टर बन सकता है। जयराम को एनडीए उपचुनाव में अपने साथ लाने में जुटी हुई है, जबकि जयराम ने खुद को अभी तक उपचुनाव से दूर रखा है। घाटशिला में उनका कार्यक्रम सितंबर महीने में होना था लेकिन तबीयत खराब होने के बाद उसे कैंसिल कर दिया गया और अभी तक ऐसी कोई गतिविधि देखने को नहीं मिला है।

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