गुरू दत्त की जन्मशती : उनके जाने से आज तक ‘प्यासा’ है भारतीय सिनेमा, ‘बहारें फिर भी आएंगी’ पर बात करते-करते चले गए थे गुरुदत्त

Picture of Live Dainik

Live Dainik

July 9, 2025

guru dutt

मुंबईः गुरु दत्त आज होते तो पूरे सौ वर्ष के होते । हिन्दी सिनेमा को इस बात का आज तक मलाल है कि गुरुदत्त अपनी पूरी जिंदगी नहीं जी पाए। गुरुदत्त के जन्म से पहले उनकी मां जब 12 साल की थी तब साधु ने भविष्यवाणी की थी कि एक बेटा होगा जो नाम करेगा और पूरे परिवार का ख्याल रखेगा । गुरदत्त की मां वसंती पादुकोण ने ये बात 1989 में बनी  ‘इन सर्च ऑफ गुरुदत्त’ डॉक्यूमेंट्री में कही थीं। गुरुदत्त मशहूर तो हुए लेकिन वक्त से पहले अलविदा कह गए । 9 जुलाई 2025 को उनकी जन्मशती है ,9 जुलाई 1925 को गुरुदत्त का जन्म मंगलोर में हुआ था । 

गुरु दत्त की मां वसंती पादुकोण
गुरु दत्त की मां वसंती पादुकोण

गुरुदत्त का हिन्दी में हाथ तंग था

गुरुदत्त का असली नाम वसंत कुमरा शिवशंकर पादुकोण था । बाद में उन्होंने इसे गुरु दत्त पादुकोण रख लिया । हैरानी की बात ये है कि गुरु दत्त को हिन्दी बहुत अच्छी नहीं आती थी। कहा तो ये भी जाता है कि वे अंग्रेजी में ही बात करते थे और यहां तक की सोचते भी अंग्रेजी में ही थे । हांलाकि गुरुदत्त ने जिस तरह फिल्मों में संवाद बोले उससे किसी को अंदाजा भी लगता था कि हिन्दी गुरुदत्त की मातृभाषा नहीं थी ।

See also  पाक अफसर पत्रकार बनकर CRPF के ASI से लेता था खुफिया जानकारी, हर माह देते थे इतने पैसे

गुरुदत्त के बचपन की तस्वीर

ऐसे बनी जॉनी वॉकर का तेल मालिश वाली सॉन्ग

गुरु दत्त के साथ ‘प्यासा’ में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले जॉनी वॉकर ने इस फिल्म के मशहूर गीत मालिश..तेल मालिश.. सर तेरा जो चकराए के बनने का जिक्र करते हुए एक बार बताया था कि गुरुदत्त और वे एक बार कोलकाता गए थे । फुचका खा रहे थे और इसी दौरान एक तेल मालिश वाला पास में आकर किसी की तेल मालिश करने लगा । गुरुदत्त ने जॉनी वॉकर से कहा कि तुम इसी की स्टाइल अपनाओ और आवाज मेले में खटमल बेचने वाले की तरह रखो । इस तरह जॉनी वॉकर टाइमलेस सॉन्ग बना ।

pyasa

‘प्यासा’ में लाइड और शेड का कमाल

‘प्यासा’ गुरुदत्त की सबसे चर्चित और कलात्मक फिल्म थी । इस फिल्म में उन्होंने लाइट और शेड के साथ जो एक्सपेरिमेंट शुरु किया वो भारतीय सिनेमा में पहली बार हुआ था । पहली बार क्लोज शॉट लिए गए । इमोशन को इस तरह फिल्माया गया कि आज तक ‘प्यासा’ का हर सीन लोगों के जेहन में हैं । गुरुदत्त के फोटोग्राफी निर्देशक मूर्ति आजीवन उनके साथ काम करते रहे । गुरुदत्त ने लाइड औऱ शेड के साथ कैमरा का जो प्रयोग किया उस जमाने में गुरुदत्त स्टाइल कहलाने लगा । लोग अक्सर कहते सुने जाते थे जरा 74 mm, 100mm लेंस लगा कर गुरुदत्त स्टाइल में फोटो खींचों ।

गुरुदत्त का परिवार

जब देवानंद को चलाते-चलाते गाना फिल्मा दिया

फिल्म ‘CID’ में जिसे राज खोसला ने निर्देशित किया और गुरु दत्त ने प्रोड्यूस किया में देवानंद पर एक गाना फिल्माया गया ” ये है मुंबई मेरी जान” । इस गीत में देवानंद सिर्फर चलते हुए नजर आते हैं । जब ये गाना फिल्माया जा रहा था तो देवानंद ने गुस्से में राज खोसला से कहा कि मैं सिर्फ पैदल चलूंगा… दरअसल देवानंद को उनके  हाथ को इधर-उधर करने वाले अंदाज को भी इस गाने में रोक दिया गया था इससे उन्हें समझ नहीं आया कि कोई गाना सिर्फ पैदल चल कर कैसे पूरा होगा। ये गुरु दत्त का आईडिया था और आज भी ये गाना सुपरहिट है ।

See also  साहिबगंज में ग्राम प्रधान को अपराधियों ने मारी गोली, इलाज के दौरान भागलपुर में तोड़ा दम

kagaj ke phool

गुरुदत्त ने काट ली आधी मूंछ

प्यासा के सेट का एक दिलचस्प वाक्या ये था कि फिल्म के शॉट पर बात करते करते गुरुदत्त ने अपनी आधी मूंछें काट दी । वे अपने वीडियोग्राफर मूर्ति पर चीखने लगे । वहीदा रहमान भी वहीं पर थीं । मूर्ति ने कहा इसमें मेरी क्या गलती । आखिर में गुरुदत्त को उस रात नकली मूंछे लगा कर शॉट पूरी करनी पड़ी ।

‘बहारें फिर भी आएंगी’ और गुरुदत्त की मौत की रात

प्यासा, कागज के फूल, चौदहवीं का चांद, साहिब बीवी और गुलाम जैसी कालजयी फिल्में देने वाले गुरुदत्त महज 39 वर्ष की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह कर चले गए । 10 अक्टूबर 1964 की रात गुरुदत्त सोए तो कभी नहीं उठे । उनके साथ आखिरी मुलाकात हुई फिल्म निर्देशक और लेखक अबरार अल्वी की । 9-10 अक्टूबर 1964 की रात दोनों में शाम साढ़े छह बजे से बातचीत चल रही थी। अबरार अल्वी  ने एक इंटरव्यू में बताया कि गुरु दत्त आने वाली ‘बहारें फिर भी आएंगीं’ के सीन पर चर्चा कर रहे थे, वे लगातार शराब पीए जा रहे थें और मौत और बीमारी जैसी चीजों पर बात किए जा रहे थे। अबरार अल्वी बताते हैं कि वे रात के डेढ़ बजे उनके घर से गए, सुबह उनकी मौत की खबर आई । वे कहते हैं कि उन्हें जरा भी इल्म होता कि वे जान देने वाले हैं तो जरुर रोक देते । ‘बहारें फिर भी आएंगीं’  में बाद में गुरदत्त की जगह धर्मेंद्र ने ली थी ।

See also  रांची में कफ सीरप के लिए डॉक्टर की हत्या, गांव वालों ने एक आरोपी वारिस अंसारी को पकड़ा

कैफी आजमी ने इस तरह दी विदाई

उनकी फिल्मों के लिए कई गीत लिखने वाले कैफी आजमी ने उनकी मौत के खबर के बाद लिखा

“रहने को सदा दहर में आता नहीं कोई
तुम जैसे गए ऐसे भी जाता नहीं कोई
डरता हूं कहीं ख़ुश्क न हो जाए समुंदर
राख अपनी कभी आप बहाता नहीं कोई

इक बार तो ख़ुद मौत भी घबरा गई होगी
यूं मौत को सीने से लगाता नहीं कोई
माना कि उजालों ने तुम्हें दाग़ दिए थे
बे-रात ढले शमा बुझाता नहीं कोई

साक़ी से गिला था तुम्हें मय-ख़ाने से शिकवा
अब ज़हर से भी प्यास बुझाता नहीं कोई
हर सुब्ह हिला देता था ज़ंजीर ज़माना
क्यूं आज दिवाने को जगाता नहीं कोई
अर्थी तो उठा लेते हैं सब अश्क बहा के
नाज़-ए-दिल-ए-बेताब उठाता नहीं कोई

 

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

Trending Now