रांचीः झरिया से पूर्व बीजेपी विधायक संजीव सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने धनबाद के पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह समेत चार की हत्या के मामले में शुक्रवार को जमानत दे दी है।इसके पूर्व संजीव सिंह की जमानत अर्जी तीन बार निचली अदालत से व तीन बार उच्च न्यायालय से खारिज हो चुकी थी।
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संजीव सिंह पिछले आठ सालों से जेल में बंद है और लंबे समय से बीमार चल रहे थे। संजीव सिंह की पत्नी रागिनी सिंह अभी झरिया से बीजेपी विधायक है जिन्होने 2024 के विधानसभा चुनाव के दौरान नीरज सिंह की पत्नी पूर्णिमा सिंह को चुनाव में शिकस्त दी थी। संजीव सिंह अपने चचेरे भाई समेत चार लोगों की हत्या के मामले में 2017 से जेल में बंद है।लोअर कोर्ट और झारखंड हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद संजीव सिंह ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था जहां से उन्हे शुक्रवार को राहत मिल गई।
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पूर्व विधायक के वकील ने कोर्ट में दलील दी थी कि संजीव सिंह सात तरह के बीमारियों से ग्रसित है। अभी तक मामले की सुनवाई पूरी नहीं हो पाई है, यह उनके संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन है। जेल में संजीव की स्थिति लगातार बिगड़ रही है।उन्होंने बताया कि संजीव के विरुद्ध पुलिस ने 28 जून 2017 को आरोपपत्र दायर किया था। तीन जनवरी 19 को अदालत ने संजीव समेत छह के विरूद्ध आरोप का गठन कर दिया था। वर्तमान समय में मुकदमे में बचाव पक्ष की ओर से बहस चल रही है।
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धनबाद के पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह की हत्या मामले में पूर्व विधायक संजीव सिंह 11 अप्रैल 2017 से जेल में हैं। 21 मार्च 2017 को सरायढेला में नीरज सिंह सहित चार लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी। 23 मार्च को सरायढेला थाने में नीरज के भाई अभिषेक सिंह की लिखित शिकायत पर पिंटू सिंह, मनीष सिंह, महंत पांडेय, गया प्रताप सिंह और अन्य के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी। बाद में इस केस में शूटरों के अलावा अन्य लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के बाद पुलिस ने झरिया के तत्कालीन विधायक संजीव सिंह को गिरफ्तार किया था। तब से वे जेल में ही हैं। पूर्व विधायक संजीव सिंह की ओर से जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गयी। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट से शुक्रवार को जमानत मिली है।
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झरिया के पूर्व विधायक रहे संजीव सिंह के रूतबे की चर्चा झारखंड ही नहीं उसके बाहर भी हुआ करता था। अपने चचेरे भाई नीरज सिंह की हत्या के मामले में जेल जाने से पहले उनके बाहुबल को लेकर खूब चर्चाएं हुआ करती थी। दोनों के परिवार की अदावत पुरानी रही है। धनबाद में सिंह मेंशन के नाम से संजीव सिंह का बंगला और रघुकुल के नाम से नीरज सिंह का बंगला जाना जाता है। आठ साल पहले धनबाद के पूर्व मेयर नीरज सिंह गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उनके काफिले पर 100 से ज्यादा गोलियां चलाई गई थी। संजीव सिंह उस समय झारखंड के दबंग विधायक माने जाते थे। नीरज सिंह के भाई अभिषेक सिंह की शिकायत के बाद उन्हे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। 2019 के विधानसभा चुनाव में एक तरफ संजीव सिंह की पत्नी रागिनी सिंह बीजेपी उम्मीदवार के रूप में मैदान में थी तो दूसरी ओर नीरज सिंह की पत्नी पूर्णिया सिंह कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरी थी। उस चुनाव में संजीव सिंह की पत्नी चुनाव हार गई और पूर्णिमा सिंह विधायक बनीं। लेकिन 2024 के चुनाव में पूर्णिमा नीरज सिंह को रागिनी सिंह ने शिकस्त दे दी और वो झरिया से पहली बार विधायक बनीं।
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रागिनी सिंह ने अपने देवर संजीव सिंह से दूसरी शादी की है। रागिनी सिंह के पहले पति राजीव सिंह जो संजीव सिंह के बड़े भाई थे उनकी 2003 में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। 2013 में संजीव सिंह ने अपनी भाभी रागिनी सिंह से शादी कर ली। कोर्ट मैरेज के दौरान परिवार और कुछ करीबी लोग ही शामिल हुए थे। इस शादी के दौरान राजीव सिंह और रागिनी सिंह की बेटी साक्षी भी मौजूद रही थी।संजीव सिंह का परिवार झारखंड के बड़े राजनीतिक और ताकतवर घरानों में शामिल रहा है। उनके पिता सूर्यदेव सिंह धनबाद के कोल किंग के नाम से मशहूर थे। उनकी मां कुंती सिंह भी झरिया से विधायक रह चुकी है। संजीव सिंह जब विधायक रहते सड़कों पर चला करते थे तो वे बुलेट प्रूफ कार से ही जाते थे। उनके काफिले में सात से आठ गाड़ियां हुआ करती थी सभी काले रंग का और सबके अंत में नंबर 7007 हुआ करता था। 2014 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हे झरिया से उम्मीदवार बनाया था और उस चुनाव में उन्होने जीत दर्ज की थी। संजीव सिंह के जेल जाने के बाद अब उनके राजनीतिक विरासत को उनकी पत्नी रागिनी सिंह आगे बढ़ा रही है जो वर्तमान में झरिया से बीजेपी की विधायक है।




