रांचीः जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष दिलीप प्रसाद को गबन के 21 साल पुराने एक मामले में दोषी करार कर सीबीआई की विशेष न्यायाधीश एसएन तिवारी की अदालत ने 2 साल कैद की सजा सुनाई है। साथ ही उन पर 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है। इसी मामले में अभियुक्त सुरेंद्र जैन और सुधीर जैन को भी 2 साल कैद की सजा सुनाई गई है। मामले में अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने 21 जुलाई को फैसले की तारीख निर्धारित की थी। दिलीप प्रसाद के खिलाफ दर्ज मामलों में से पहले मामले (आरसी 6/2013)में फैसला आया है। सीबीआई ने साल 2004 में हुए घोटाले को लेकर 2013 में प्राथमिकी दर्ज की थी। जांच अधिकारी ने जांच पूरी करते हुए 34 गवाहों के साथ 2014 में चार्जशीट दाखिल की थी। दिलीप प्रसाद अध्यक्ष रहते कई नियुक्तियों में अपने पद का दुरुपयोग किया है। सीबीआई ने सभी गड़बड़ियों में प्राथमिकी दर्ज की है।
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क्या है पूरा मामलाः
राज्य गठन के बाद दिलीप प्रसाद जेपीएससी का प्रथम अध्यक्ष बनें। उन्होंने सरकारी पद का दुरुपयोग कर अपने लाभ के लिए मनपसंद कंपनी को ओएमआर स्कैनिंग मशीन का टेंडर दिया। यह टेंडर एसपीएस इंटरनेशनल लिमिटेड को दी थी। इस तथ्य के बावजूद की उच्च और बेहतर क्षमताओं वाली ओएमआर स्कैनिंग मशीने के लिए फर्म मेसर्स मेथोडैक्स सिस्टम्स लिमिटेड की बोली की कीमत कम थी। जिससे जेपीएससी को 13.56 लाख रुपए का राजस्व का नुकसान हुआ और आरोपी फर्म को इसी अनुपात में गलत लाभ हुआ।




