डेस्कः बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की मुश्किलें और बढ़ गई है। बांग्लादेश की इंटरनेशनल कोर्ट ने जुलाई विद्रोह मामले में शेख हसीना को दोषी माना है। शेख हसीना के खिलाफ छह पार्ट में कोर्ट का फैसला आया है, जिसमें 400 पेज है। हसीना पर जुलाई विद्रोह मामले में निर्दोष लोगों पर गोली चलवाने का आरोप है।बांग्लादेश की अंतर्राष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल (ICT ) ने पूर्व पीएम शेख हसीना को कथित तौर पर मानवता के खिलाफ अपराध का दोषी करार दिया है। उन्हें मौत की शेख हसीना को तीन आरोपों (तीन काउंट) में दोषी पाया गया है और मौत की सजा सुनाई गई है। ICT ने कहा कि तीनों आरोपों के लिए हमने एक ही मौत की सजा देने का किया है। अदालत की इस घोषणा के साथ ही कोर्ट में वकीलों ने तालियां बजाई।
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बांग्लादेशी मीडिया प्रथम आलो के मुताबिक कोर्ट ने फैसला सुनाते वक्त हसीना का वो ऑडियो भी जारी किया, जो बांग्लादेश में खूब वायरल हुआ था। इस ऑडियो में हसीना पुलिस प्रमुख से लोगों पर गोलियां चलाने के लिए कह रही हैं। कोर्ट ने फैसला सुनाते वक्त मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट का भी जिक्र किया।
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जस्टिस मुर्तजा की अगुवाई वाली ट्रिब्यूनल में जस्टिस मोहम्मद शफीउल आलम महमूद और जस्टिस मोहम्मद मोहितुल हक एनाम चौधरी भी हैं। ट्रिब्यूनल ने कहा है कि हमने मानवाधिकार संगठन और अन्य संगठनों की कई रिपोर्ट्स पर विचार किया है। हमने क्रूरताओं का विवरण भी दिया है। शेख हसीना ने मानवता के खिलाफ अपराध किए।शेख हसीना को इन तीन अपराधों के लिए मौत की सजा दी गई है।
1. निहत्थे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ घातक बल प्रयोग का आदेश देना (OrderS to kill)
2. भड़काऊ बयान देना (Incitement)
3. और ढाका तथा आसपास के क्षेत्रों में कई छात्रों की हत्या के लिए कार्रवाई को अधिकृत करना
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ट्रिब्यूनल ने फैसले में यह भी कहा है कि बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी मारे गए हैं। शेख हसीना ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हेलीकॉप्टर से बम गिराने के आदेश दिए थे। ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा है कि अवामी लीग के कार्यकर्ता कथित रूप से सड़कों पर उतर आए और पार्टी नेतृत्व की पूरी जानकारी में सुनियोजित हमले किए।
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ट्रिब्यूनल में शेख हसीना और उनके मंत्री हसनुल हक इनु के बीच कई बार फोन पर हुई बातचीत भी पढ़कर सुनाई जा रही है, जिससे अवामी लीग के शीर्ष नेतृत्व की भूमिका हिंसा में साबित की जा सके। यह बताया जा रहा है कि किस तरह से शेख हसीना ने छात्रों के प्रोटेस्ट को आतंकी गतिविधि के रूप में पेश करने की कोशिश की।




