डेस्कः इस्लाम धर्म में ईद और बकरीद का खासा महत्व होता है। ईद-अल-अजहा इस्लाम धर्म का दूसरा सबसे बड़ा पर्व है। इस दिन बकरे के अलावा कुछ विशेष पशुओं की कुर्बानी दी जाती है। इस त्योहार को पूरे श्रद्धा और भाईचारे के साथ मनाया जाता है। इस्लामिक कलेंडर में 12 महीनें होते हैं और इसका धुल्ल हिज अंतिम महीना होता है और इसी महीने की दसवीं तारीख को ईद उल अजहा यानी बकरीद मनाई जाती है।
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बकरीद के दिन नमाज अदा करने के बाद बकरे की कुर्बानी दी जाती है। शहर के अनुसार बकरीद के नमाज का समय तय होता है इसमें दस से बीस मिनट तक का अंतर हो सकता है। पटना में बकरीद की नमाज सुबह 7.30 बजे गांधी मैदान होगी। रांची में सुबह 9 बजे ईदगाह में नमाज अदा की जाएगी और डोरंडा ईदगाह में सुबह 8 बजे नमाज अदा होगी। दिल्ली में सुबह 6.00 से 6.20 तक, मुंबई में 6.15 से 6.55 तक, लखनऊ में सुबह 5.55 से 6.15 तक, बेंगलुरू में सुबह 6.10 से 6.30 तक, आगरा के शादी ईदगाह में 6.45 से, लखनऊ के ऐशगाह ईदगाह में सुबह 10 बजे और मुरादाबाद में सुबह 7.00 से 7.30 तक नमाज अदा की जाएगी।
पटना में अलग-अलग जगहों पर नमाज का समय
सुन्नी समुदाय की मस्जिदों का समय
हाईकोर्ट की जामा मस्जिद : 7.00 बजे
– कोतवाली जामा मस्जिद : 7:30 बजे
– मरकजे इस्लामी, पत्थर की मस्जिद : 6.30 बजे
– हज भवन स्थित मस्जिद: 6.30 बजे- शनिचरा ईदगाह: 6.00 बजे
– सिडनी ग्राउंड, शक्का टोली, आलमगंज : 6.15 बजे
– खानमाह मुजीबिया, फुलवारीशरीफ :8.30 बजे
– खानकाह फैयाजिया सिमली : 7.30 बजे
– खानकाह एमादिया मंगल तालाब : 6.30 बजे
– बारगाहे इश्क तकिया शरीफ मीतन घाट : 8.30 बजे
– शाही ईदगाह गुलजारबाग : 8.00 बजे
– खानकाह मुनएमिया मीतन घाट : 7.30 बजे
– दरगाह शाह अरजा, दरगाह रोड : 6.45 बजे
– मदरसा मस्जिद, झाउगंज : 7.45 बजे
– खानकाह शाह अरजानी, शाहगंज : 7.00 बजे
– तौहीद जामा मस्जिद, फुलवारीशरीफ : 6.15 बजे
– नया टोला जामा मस्जिद, फुलवारीशरीफ : 7.00 बजे
– ईसापुर जामा मस्जिद, फुलवारीशरीफ : 7.00 बजे
– हारूण नगर जामा मस्जिद : 6.45 बजे
शिया समुदाय की मस्जिदों का समय
– इमामबांदी वक्फ स्टेट, गुलजारबाग : 10.00 बजे
– बाली इमामबाड़ा मस्जिद : 9.00 बजे
– कबुतरी मस्जिद काठ का पुल : 8.00 बजे
– हजन साहिब मस्जिद पश्चिम दरवाजा : 10 बजे
– हाजीपुर महुआ नवादा कला : 10.30 बजे
– पत्थर की मस्जिद : 9.30 बजे
– शाइस्तान मस्जिद : 9.00 बजे
– मुरादपुर मस्जिद : 9.00 बजे
– गोलकपुर मस्जिद : 10.00 बजे
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बकरीद क्यों मनाई जाती है? 🐐
इस्लाम के प्रमुख त्योहारों में से एक बकरीद को ‘कुर्बानी की ईद’ भी कहा जाता है। यह त्योहार हजरत इब्राहिम की उस परीक्षा की याद में मनाया जाता है, जब उन्होंने अल्लाह के आदेश पर अपने बेटे की कुर्बानी देने का निश्चय किया था। लेकिन अल्लाह ने उन्हें अंतिम क्षण में रोक दिया और एक जानवर की कुर्बानी देने का आदेश दिया। इस घटना के बाद से इस्लामी कैलेंडर के अंतिम महीने जिल-हिज्जा की 10वीं तारीख को बकरीद मनाई जाती है। इस दिन मुस्लिम समुदाय नमाज अदा कर जानवर की कुर्बानी देता है और उसका मांस जरूरतमंदों में बांटता है।
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कुर्बानी के पीछे की कहानी
कहते हैं कि पैगंबर इब्राहीम को अल्लाह की तरफ से सपना आया जिसमें उनसे अपने सबसे प्यारे बेटे को कुर्बान करने को कहा गया। इब्राहीम ने इसे अल्लाह की आज्ञा मानकर अपने बेटे इस्माईल को लेकर कुर्बानी के लिए निकल पड़े। जैसे ही उन्होंने बेटे की आंखों पर पट्टी बांधी और कुर्बानी के लिए चाकू चलाया, अल्लाह ने इस्माईल को बचा लिया और उसकी जगह एक दुम्बा (मेंढ़ा) भेज दिया। इस घटना से यह सीख मिलती है कि जब कोई इंसान अल्लाह के हुक्म को पूरी तरह मान लेता है, तो अल्लाह उसकी नीयत और ईमान की कद्र करता है।
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कैसे मनाई जाती है बकरीद?
1. ईद की नमाज
सुबह-सुबह लोग नए कपड़े पहनकर ईदगाह या मस्जिद में नमाज पढ़ने जाते हैं. ये नमाज आम दिनों की नमाज से थोड़ी अलग होती है और इसके बाद इमाम एक छोटा सा खुतबा (भाषण) देते हैं.
2. कुर्बानी
नमाज के बाद कुर्बानी की रस्म अदा की जाती है। इसके तहत बकरी, दुम्बा, भैंस या ऊंट की कुर्बानी की जाती है। इसका मकसद इब्राहीम की भक्ति और त्याग की याद को ताजा करना है।
3. गोश्त का बंटवारा
कुर्बानी के जानवर का मांस तीन हिस्सों में बांटा जाता है- एक हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों को दिया जाता है। एक हिस्सा रिश्तेदारों और दोस्तों को दिया जाता है। एक हिस्सा खुद के लिए रखा जाता है। इसका मकसद समाज में भाईचारा, मदद और समानता का भाव फैलाना है।
4. खास पकवान
बकरीद पर खासतौर पर कुर्बानी के गोश्त से बने पकवान जैसे कीमाकरी, बिरयानी, कबाब, निहारी और खीर बनाई जाती है। घर-घर दावतों का माहौल होता है और लोग एक-दूसरे को मिठाइयां और पकवान खिलाकर मुबारकबाद देते हैं।




