रांचीः झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर इन दिनों नाराज चल रहे हैं। वे खासतौर पर पुलिस महानिदेशक और वित्त विभाग के एक संयुक्त सचिव से नाराज चल रहे हैं। उन्होंने अपने सारे 16 सुरक्षाकर्मियों और पुलिस से मिले सारे वाहनों को वापस कर दिया है। वो दिल्ली गए लेकिन झारखंड सरकार की ओर से आयोजित दो दिवसीय नेशनल स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन में शामिल नहीं हुए। उनकी जगह कांग्रेस पार्टी के कोटे से मंत्री बनी दीपिका पांडे सिंह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ मंच साझा करती नजर आई।

प्रोटोकॉल और हेमंत सोरेन के सहयोगियों को साथ लेकर चलने की राजनीति को अगर देखे तो हेमंत सोरेन ऐसे किसी भी कार्यक्रम में अपने सहयोगी दल से जुड़े मंत्री को अपने साथ मंच पर जगह देते है। आरजेडी के कोटे से मंत्री संजय यादव, कांग्रेस कोटे से दीपिका पांडे सिंह और जेएमएम कोटे से सुदिव्य कुमार सोनू दिल्ली में हुए इस दो दिवसीय कार्यक्रम में मौजूद रहे। संजय यादव के पास उद्योग विभाग और सुदिव्य सोनू के पास पर्यटन विभाग की जिम्मेदारी है जिनका इस कार्यक्रम में होना आवश्यक था। कांग्रेस की ओर से वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर को इस कार्यक्रम में होना चाहिए था लेकिन उन्होंने इस कार्यक्रम से दूरी बनाए रखी, नतीजा ये हुआ कि कांग्रेस कोटे से मंत्री दीपिका पांडे सिंह मुख्यमंत्री के साथ मंच पर नजर आई। राधाकृष्ण किशोर ने मीडिया से इस कार्यक्रम को लेकर जानकारी नहीं होने की बात कहीं थी लेकिन सच्चाई ये है कि उनकी जगह दीपिका पांडे सिंह गठबंधन धर्म को निभाने के लिए मंच पर मौजूद रही।इसके साथ स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
अपनी अनदेखी से नाराज वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सोशल मीडिया पर अपना दर्द बयां करते हुए लिखा कि आसमान किसी सांसरिक और भौतिक पद पर टिका हुआ नहीं है, जो उसका अंत हो जाए। मानव शरीर नश्वर, भले ही है परंतु उसके अच्छे कृत्य आसमान में चमकते हैं। मैं सूरज पर मकान बनाकर छाया तलाशने वालों में से नहीं हूं।

राज्यसभा चुनाव से पहले भी हुए थे नाराज, प्रदेश अध्यक्ष को पत्र लिखकर उठाए थे सवाल
राज्यसभा चुनाव के पहले जब प्रदेश कांग्रेस के जंबो जेट कमेटी बनी थी। तब भी वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने पहले दो पत्र प्रदेश प्रभारी को लिखा था। इसके बाद उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश को भी पत्र लिखते हुए कई सवाल उठाए थे। वित्त मंत्री का नाराजगी का यह सिलसिला काफी दिनों तक चला था।
एक आंख में सुरमा और दूसरे में काजल
राधाकृष्ण किशोर ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश को लिखे पत्र में 314 सदस्यों की नई कमेटी के आकार पर तंज कसते हुए सवाल पूछा था कि इतनी बड़ी समिति आखिर कहां बैठेगी। इसी तरह से उन्होंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा था कि पार्टी में एक आंख में सुरमा और दूसरे आंख में काजल वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। उन्होंने पूर्व मंत्री योगेंद्र साव पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का हवाला देते हुए पूछा था कि रमा खलखो जैसी नेत्री, जिन्होंने हाल ही में पार्टी की आलोचना की थी, उन्हें चुनाव प्रबंधन समिति में कैसे शामिल किया गया। इसके साथ ही उन्होंने अनुसूचित जाति की अनदेखी पर भी अपनी बात रखी थी। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस कमेटी में अनुसूचित जाति वर्ग को हाशिए पर रखने का भी आरोप लगाए थे।
संयुक्त सचिव के मामले में अब तक नहीं मिला जवाब
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने संयुक्त सचिव पंकज कुमार सिंह के मामले में वित्त सचिव को पीत पत्र लिखकर जवाब मांगा था। जिसमें उन्होंने यह भी जानना चाहा था कि पंकज कुमार सिंह ने किसके निर्देश पर वित्त मंत्री को वाहन वापस करने के लिए पत्र लिखा था। जवाब नहीं मिलने पर वित्त मंत्री ने रिमाइंडर भी भेजा था लेकिन अब तक उसका जवाब वित्त मंत्री को नहीं मिला है।


