रांचीः मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में बालू घाटों की बंदोबस्ती और खनन लीज प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने उपायुक्तों को संबंधित जिलों में बालू घाटों की खनन लीज निष्पादित करने और स्वीकृति करने का अधिकार दे दिया है। इससे संबंधित संचिका पर मुख्यमंत्री ने मंजूरी दी है। खान विभाग द्वारा उपायुक्तों को इसकी सूचना दे दी गयी है। इसके साथ ही लीज डीड की वजह से अटके बालू घाट अब चालू हो सकेंगे। आम लोगों को बालू की उपलब्धता आसानी से हो सकेगी।
क्या है मामलाः राज्य में बालू घोटों की नीलामी और खनन लीज देने की प्रक्रिया विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से प्रभावित रही थी। नीलामी के बाद चयनित बोलीदाता को अंतिम लीज नहीं मिल पा रही थी। इस कारण कई जिलों में बालू घाट चालू नहीं हो पा रहे थे और अवैध खनन की शिकायतें भी बढ़ रही थीं। नियावमवली में यह स्पष्ट नहीं था कि डीसी साइन करेंगे या डीएमओ। अब स्पष्ट कर दिया गया है कि अब जिला उपायुक्तों को सक्षम प्राधिकार बनाते हुए उन्हें बालू खनन लीज निष्पादित करने का अधिकार दिया गया है। आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि खनन लीज राज्य सरकार की ओर से दी जायेगी, लेकिन सरकार संबंधित जिले के उपायुक्त के माध्यम से कार्य करेगी। इसी प्रावधान के आधार पर सरकार ने उपायुक्तों को यह अधिकार प्रदान किया है।


