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CID के साइबर क्राइम ब्रांच ने 7 म्यूल खाताधारकों को किया गिरफ्तार, खातों में करोंड़ों का हुआ था ट्रांजेक्शन

CID के साइबर क्राइम ब्रांच ने 7 म्यूल खाताधारकों को किया गिरफ्तार, खातों में करोंड़ों का हुआ था ट्रांजेक्शन

रांचीः CID के साइबर क्राइम ब्रांच के द्वारा म्यूल बैंक खाते बनाकर साइबर अपराधियों के साथ मिलीभगत कर पैसे कमाने वालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। CID के साइबर क्राइम ब्रांच के द्वारा बड़ी कार्रवाई करते हुए 7 खाताधारकों को गिरफ्तार किया गया है।

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CID के साइबर क्राइम ब्रांच के द्वारा म्यूल खाताधारकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इस मामले में ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां शुरू कर दी गई हैं। CID के साइबर क्राइम ब्रांच के द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार राज्य भर में छापेमारी कर कुल सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें रोशन कुमार, राजेंद्र साव, प्राण रंजन सिंह, जितेंद्र कुमार, न्यूरेज अंसारी, गणेश बड़ाइक और सतीश कुनार शामिल हैं।

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साइबर क्राइम ब्रांच के अनुसार गिरफ्तार सातों आरोपियो के बैंक खातों का प्रयोग साइबर ठगी के लिए किया जा रहा था। रोशन कुमार के IDFC बैंक के खाते में ठगी के 10.02 करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन हुआ था। राजेंद्र साव के ICICI बैंक के खाते में 67 लाख, प्राण रंजन सिंह के बंधन बैंक के खाते में 1.01 करोड़, जितेंद्र कुमार के इंडसइंड बैंक के खाते में 5 करोड़, न्यूरेज अंसारी के जेएनके बैंक खाते में 5.5 करोड़, गणेश बड़ाइक के बंधन बैंक के खाते में 3.2 करोड़ और सतीश कुनार इंडसइंड बैंक के खाते में 6.2 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे। इन खातों में कर्नाटक, तमिलनाडु, यूपी, केरल, बिहार, दिल्ली, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से ठगी की रकम डाली गई थी।

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बता दें कि सीआईडी की साइबर क्राइम थाना रांची की थाना प्रभारी डीएसपी नेहा बाला ने अपने स्व-बयान के आधार पर 40 ऐसे बैंक खाताधारकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी, जिनमें साइबर ठगी के 10 लाख या उससे अधिक की रकम का ट्रांजेक्शन किया गया। यह FIR साइबर क्राइम थाना में केस संख्या 89/25 के रूप में दर्ज की गई है। इसी मामले में सातों आरोपियों की गिरफ्तारी की गई है।

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झारखंड में 10 लाख और उससे अधिक की साइबर धोखाधड़ी की घटनाओं की जांच CID की साइबर क्राइम थाना द्वारा की जाती है। इन मामलों में प्रारंभिक शिकायतें भारत सरकार के गृह मंत्रालय के नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज की जाती हैं। धोखाधड़ी की रकम को सिटिजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम (सीएफसीएफआरएमएस) के माध्यम से फ्रीज किया जाता है। इसके अतिरिक्त, गृह मंत्रालय के समन्वय पोर्टल का उपयोग साइबर अपराधियों की प्रोफाइलिंग, नोटिस भेजने, नाम-पते का सत्यापन और म्यूल अकाउंट/लाभार्थी खातों के डाटा संकलन के लिए किया जाता है।

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डीजीपी अनुराग गुप्ता के निर्देश पर डीएसपी नेहा बाला ने एनसीआरपी और समन्वय पोर्टल के एकीकृत उपयोग से झारखंड के उन बैंक खातों (लाभार्थी खातों) का विश्लेषण किया, जिनमें साइबर ठगी की बड़ी राशि प्राप्त हुई थी। इस गहन विश्लेषण से 40 ऐसे बैंक खातों की पहचान हुई, जिनमें एक बार में 10 लाख या उससे अधिक की राशि प्राप्त हुई थी।

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इन खातों में बैंक ऑफ बड़ौदा, आईडीबीआई बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, यूको बैंक, इंडसइंड बैंक, जम्मू एंड कश्मीर बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, आईडीएफसी बैंक, फेडरल बैंक, बंधन बैंक, फिनो पेमेंट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, एचडीएफसी बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और एक्सिस बैंक के खाते शामिल हैं।

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