रांची: हाई कोर्ट ने बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) में विस्थापितों के आंदोलन के कारण उत्पादन ठप होने के मामले में सुनवाई करते हुए बोकारो जिला प्रशासन को सतर्क रहने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि यदि भविष्य में प्लांट में शांति व्यवस्था बिगड़ने की आशंका हो, तो जिला प्रशासन पहले ही कार्रवाई करे। प्रशासन स्थिति बिगड़ने का इंतजार न करे, ताकि प्लांट को किसी तरह का नुकसान न हो।
बुधवार को सुनवाई के दौरान बोकारो उपायुक्त की ओर से अंडरटेकिंग देकर अदालत को बताया गया कि बोकारो स्टील प्लांट के सभी 11 गेट खोल दिए गए हैं। कर्मचारियों की आवाजाही सामान्य हो गई है और प्लांट में शांति व्यवस्था बहाल है। प्रार्थी की ओर से भी कोर्ट को बताया गया कि अब प्लांट की स्थिति सामान्य हो चुकी है। इसके बाद अदालत ने याचिका निष्पादित कर दी। हालांकि, अदालत ने जिला प्रशासन को स्थिति पर लगातार नजर रखने और किसी भी संभावित गड़बड़ी को रोकने के लिए समय रहते कदम उठाने का निर्देश दिया। इससे पहले 18 अक्टूबर को हुई सुनवाई में हाई कोर्ट ने बोकारो जिला प्रशासन को बीएसएल प्लांट में कर्मचारियों की आवाजाही सुनिश्चित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने बोकारो डीसी को इस मामले में जवाब दाखिल करने को भी कहा था।

9 दिनों तक बंद रहे थे प्लांट के प्रवेश द्वार
पूर्व में हुई सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और विभाष सिन्हा ने अदालत को बताया था कि नियोजन की मांग को लेकर विस्थापितों ने करीब नौ दिनों तक प्लांट के सभी प्रवेश द्वारों पर जाम लगा रखा था। इसके कारण प्लांट के अंदर और बाहर आने-जाने का रास्ता पूरी तरह बाधित हो गया था। इस दौरान ड्यूटी कर रहे करीब साढ़े तीन हजार अधिकारी और कर्मचारी प्लांट के अंदर फंस गए थे। वहीं, ड्यूटी करने पहुंचे कई कर्मचारी प्लांट में प्रवेश नहीं कर सके थे।
प्रमुख उत्पादन इकाइयों का कामकाज हुआ था प्रभावित
आंदोलन के कारण बीएसएल की कई महत्वपूर्ण उत्पादन इकाइयों में कामकाज प्रभावित हुआ था। ब्लास्ट फर्नेस, सिंटर प्लांट और स्टील मेल्टिंग शाप जैसी प्रमुख इकाइयों का संचालन ठप होने से संयंत्र प्रबंधन की परेशानी बढ़ गई थी। करीब 12 हजार टन पिघले स्टील के जमने से संयंत्र की कई मशीनों के खराब होने की आशंका बढ़ गई थी। इसी मामले को लेकर हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की गई थी।







