बिलकिस बानो केसः सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों के रिहाई के आदेश को पलटा, गुजरात सरकार के व्यवहार को कहा फ्रॉड एक्ट

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January 8, 2024

दिल्ली : गुजरात के चर्चित बिलकिस बानो गैंगरेप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने 11 दोषियों की रिहाई के गुजरात सरकार के फैसले को पलट दिया। सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने गुजरात सरकार को जबदस्त फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि गुजरात सरकार इस तरह का फैसला लेने में सक्षम नहीं थी। कोर्ट ने गुजरात सरकार के इस कदम को फ्रॉड एक्ट करार देते हुए दो हफ्तों के अंदर सभी दोषियों को सरेंडर करने का आदेश दिया। जस्टिस बीवी नागरथाना और जस्टिस उज्जवल भुइयां की बेंच ने 11 दोषियों के जल्द रिहाई को चुनौती देने वाली बिलकिस बानो की याचिका को वैद्य करार दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए गुजरात सरकार को फटकार लगाते क्या क्या कहा जानिये

– जस्टिस नागरथाना ने कहा- इस अदालत में धोखाधड़ी का खेल खेला गया है. इस अदालत की ओर से गुजरात सरकार को छूट पर विचार करने का कोई निर्देश नहीं दिया गया था ,यह एक धोखाधड़ी का कार्य है, हम मानते हैं कि इस अदालत के समक्ष फैक्ट को छिपाया गया है. यह अदालत में धोखाधड़ी की गई है. इस तरह हम मानते हैं कि इस अदालत का 13 मई 2022 का आदेश सही नहीं था और कानून में अमान्य था
– कोर्ट का कहना था कि आपने (गुजरात सरकार) सुप्रीम कोर्ट के साथ फ्रॉड किया है. आपने हाई कोर्ट की टिप्पणियों को सामने क्यों नहीं रखा? इससे पहले हाईकोर्ट और लोअर कोर्ट ने दोषियों की रिहाई के खिलाफ टिप्पणियां की थीं. ये सारे फैक्ट सुप्रीम कोर्ट के सामने छिपाए गए हैं

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– यह पूरा मामला गुजरात सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं था. बिलकिस बानो की मांग पर ये पूरा केस मुंबई ट्रांसफर कर दिया था. ऐसे में अगर कोई फैसला लेना था तो उस पर महाराष्ट्र सरकार को अधिकार था. यानी सजा में छूट देने का अधिकार महाराष्ट्र की सरकार के पास था. हालांकि, इस केस में इतने पेंच हैं, उसे देखते हुए महाराष्ट्र सरकार के लिए भी फैसला लेना आसान नहीं है.

– हर महिला सम्मान की हकदार है. चाहे वो समाज में कितनी भी ऊंची या नीची क्यों ना हो. सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि दोषी की तरफ से भौतिक तथ्यों को दबाकर और भ्रामक तथ्य बनाकर सजा माफी पर विचार करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी

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