रांचीः झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की भर्ती परीक्षाएं एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा (राज्य सिविल सेवा) प्रारंभिक परीक्षा के रिजल्ट को लेकर पहले से घिरे आयोग पर अब परीक्षा संचालन की पूरी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं।
आयोग ने विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में वन टाइम रजिस्ट्रेशन (ओटीआर) से लेकर अंतिम रिजल्ट प्रोसेसिंग तक की पूरी जिम्मेदारी एक ही प्राइवेट एजेंसी को सौंप दी है। इस कंपनी को अनियमितता के कारण उत्तर प्रदेश (यूपी) में ब्लैक लिस्ट किया जा चुका है। पहले परीक्षा प्रणाली में कई स्तरों पर सुरक्षा व्यवस्था लागू रहती थी।
प्री-प्रोसेसिंग, पोस्ट-प्रोसेसिंग, कॉन्फिडेंशियल प्रिंटिंग, डेटा प्रोसेसिंग और रिजल्ट प्रोसेसिंग जैसे कार्य अलग-अलग एजेंसियों को दिए जाते थे। इसका उद्देश्य था कि किसी एक एजेंसी के पास पूरी परीक्षा प्रक्रिया का नियंत्रण न रहे। इससे न केवल गोपनीयता बनी रहती थी बल्कि अनियमितता या कनफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट की आशंका भी कम हो जाती थी। इस मामले में बड़ी बात यह है कि नियुक्ति परीक्षाओं पर सवाल बाहर से नहीं, आयोग के अंदर से उठ रहे हैं। आयोग सदस्य ने सीएम को पत्र भेजकर शिकायत की है।

उत्तर प्रदेश में विवादों में रह चुकी है टीडीपीएल…
मामला इसलिए और गंभीर माना जा रहा है क्योंकि जिस एजेंसी टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) को यह जिम्मेदारी मिली है, उसका नाम पहले उत्तर प्रदेश की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के मामलों में भी सामने आ चुका है। इसी मामले में उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट की एक टिप्पणी की थी। इसलिए राज्य सरकार यह सुनिश्चित करे कि भविष्य में राज्य की किसी भी भर्ती परीक्षा, सचिवालय, विधान परिषद, विधानसभा अथवा राज्य के किसी निगम या एजेंसी की चयन प्रक्रिया का कार्य इन्हें नहीं सौंपा जाए।
अभी एक ही एजेंसी कर रही ये 8 कार्य
वन टाइम रजिस्ट्रेशन (ओटीआर)
ऑनलाइन एप्लीकेशन प्रोसेसिंग
एडमिट कार्ड जेनरेशन
क्वेश्चन पेपर प्रिंटिंग
ओएमआर शीट व आंसर बुकलेट प्रिंटिंग
ओएमआर स्कैनिंग
ऑनलाइन स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम)
रिजल्ट प्रोसेसिंग
एक एजेंसी के कंट्रोल में पूरी भर्ती प्रक्रियाजेपीएससी पहले से ही 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा के रिजल्ट को लेकर विवादों में है। आयोग के सभी सदस्यों द्वारा रिजल्ट पर हस्ताक्षर नहीं किए जाने, कट-ऑफ सार्वजनिक नहीं करने, वायरल ओएमआर और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। अब परीक्षा संचालन प्रणाली को लेकर सामने आए नए आरोपों ने विवाद को और गहरा कर दिया है।
शिकायत पत्र में कहा गया है कि जेपीएससी के इतिहास में पहली बार किसी एक एजेंसी को नियुक्ति परीक्षा के सभी आठ संवेदनशील चरण सौंप दिए गए हैं। जब आवेदन, परीक्षा, मूल्यांकन और रिजल्ट तक की पूरी चेन एक ही एजेंसी के पास हो, तब परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
14वीं सिविल सेवा पीटी से विवाद गहरायाजेपीएससी पहले से ही 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा के रिजल्ट को लेकर विवादों में है। आयोग के सभी सदस्यों द्वारा रिजल्ट पर हस्ताक्षर नहीं किए जाने, कट-ऑफ सार्वजनिक नहीं करने, वायरल ओएमआर और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। अब परीक्षा संचालन प्रणाली को लेकर सामने आए नए आरोपों ने विवाद को और गहरा कर दिया है।
छह बड़ी भर्ती परीक्षाओं में एजेंसी की भूमिका पर उठ रहे सवाल…
नगर निगम कार्यपालक अभियंता भर्ती परीक्षा (10/2023)
झारखंड स्वास्थ्य सेवा संयुक्त नियुक्ति परीक्षा (04/2023)
झारखंड वन क्षेत्र पदाधिकारी नियुक्ति परीक्षा (04/2024)
झारखंड संयुक्त असैनिक प्रतियोगिता परीक्षा (01/2026)
झारखंड संयुक्त असैनिक प्रतियोगिता परीक्षा (05/2026)
झारखंड संयुक्त असैनिक प्रतियोगिता परीक्षा (06/2026)


