पटनाः बिहार विधानसभा सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव हुआ। बीजेपी के प्रेम कुमार निर्विरोध विधानसभा के अध्यक्ष चुने गए। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रेम कुमार के नाम का प्रस्ताव रखा और संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने उसका अनुमोदन किया, जिसके बाद सदन में सर्वसम्मति से प्रेम कुमार को बिहार विधानसभा का अध्यक्ष चुन लिया गया।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव ने प्रेम कुमार को विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचाया। तेजस्वी यादव ने बधाई देते हुए कहा कि आप तो ज्ञान और मोछ की भूमि से आते हैं पूरी उम्मीद है कि सत्ता पक्ष के साथ विपक्ष को भी लेकर चलेंगे।
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वहीं इसके अलावा मंगलवार को कई नवनिर्वाचित विधायकों ने शपथ लिया। मोकामा से जदयू के विधायक अनंत सिंह फिलहाल जेल में है, इसलिए उन्होंने शपथ नहीं लिया है।वहीं अमरेंद्र पांडे मंगलवार को विधानसभा नहीं आये हैं।स्पीकर पद संभालने के बाद बीजेपी न केवल सदन में मजबूत हो गई है बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी उसका प्रभाव बढ़ेगा।यह स्पष्ट हो गया है कि मौजूदा सरकार में बीजेपी ‘बड़ा भाई’ की भूमिका निभा रहा है, जहां सत्ता की चाबी उसके हाथों में अधिक मजबूती से आ गई है। बिहार की राजनीति में यह बदलाव आने वाले दिनों में कई नए समीकरणों को जन्म दे सकता है।
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35 साल के राजनीतिक जीवन में मिली शीर्ष कुर्सी
प्रेम कुमार ने वर्ष 1990 से लगातार गया से विधायक हैं। पहली बार बिहार विधानसभा का चुनाव गया से जीते थे। 2025 में डॉ. प्रेम कुमार की नौवीं जीत है और इस जीत ने सदन की शीर्ष कुर्सी तक पहुंचा दिया। प्रेम कुमार की शिक्षा गया में हुई।मगध विश्वविद्यालय से एमए और एलएलबी करने के उपरांत इन्होंने इतिहास में पीएचडी की डिग्री हासिल की।राजनीतिक क्षेत्र में चुनाव जीतने के बाद इन्होंने 35 साल के अंदर राज्य सरकार के कृषि विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग, लोक निर्माण विभाग, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, वन एवं पर्यावरण विभाग, सहकारिता विभाग के मंत्री पद को भी सुशोभित किया।




