डेस्कः दिल्ली में साइबर ठगी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। बुजुर्ग डॉक्टर दंपत्ति से 15 दिनों के अंदर करीब 15 करोड़ रुपये की ठगी कर ली गई। ग्रेटर कैलाश के रहने वाले एनआरआई डॉक्टर दंपत्ति से धोखाधड़ी 24 दिसंबर 2025 से 9 जनवरी 2026 के बीच हुई।दरअसल, ग्रेटर कैलाश के एक मकान में डॉक्टर दंपति रहते हैं। डॉ. ओम तनेजा और उनकी पत्नी डॉ. इंदिरा तनेजा दोनों ने संयुक्त राष्ट्र (United Nations) में वर्षों तक नौकरी की। अमेरिका में लंबे करियर के बाद वे साल 2016 में भारत लौटे और दिल्ली में शांति से जिंदगी जी रहे थे। 15 दिनों में साइबर ठगी का शिकार होकर करीब 15 करोड़ रुपये गंवा दिए।

X पर अश्लील कंटेंट को परमिशन नहीं,600 अकाउंट्स डिलीट Grok विवाद पर Elon Musk का बड़ा फैसला
24 दिसंबर 2025 को इस बुजुर्ग कपल के पास एक फोन कॉल आया। फोन करने वाले ने खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताया और कहा कि उनके आधार कार्ड से जुड़े एक बैंक अकाउंट का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग ट्रैफिकिंग में हुआ है। इसके कुछ ही मिनटों बाद एक और वीडियो कॉल आया… स्क्रीन पर पुलिस की वर्दी में बैठे लोग, पीछे दिल्ली पुलिस का लोगो और गंभीर चेहरों वाले अधिकारी। फिर खेल शुरू हुआ। साइबर ठगों ने डॉक्टर दंपति से कहा कि वे अब डिजिटल अरेस्ट हैं। घर से बाहर निकलना, किसी से बात करना, फोन काटना… सब कुछ अपराध माना जाएगा। हर पल उन्हें वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा गया। डर यहीं खत्म नहीं हुआ।

झारखंड BJP प्रदेश अध्यक्ष चुनाव के लिए जुएल उरांव पर्यवेक्षक नियुक्त,जनजातीय मामलों के हैं केंद्रीय मंत्री
अगली वीडियो कॉल में एक नकली कोर्ट, जज दिखाई दिया। काला कोट, पीछे कोर्ट जैसा सेटअप, दीवार पर तस्वीरें… सब कुछ असली जैसा। कुर्सी पर बैठे ठग ने कहा कि अगर आप सहयोग नहीं करेंगे तो तुरंत गिरफ्तारी और संपत्ति जब्ती होगी। यह देश का पहला ऐसा मामला था, जिसमें साइबर अपराधियों ने न सिर्फ फर्जी पुलिस, बल्कि नकली सुप्रीम कोर्ट और जज भी बनाया।जब डॉक्टर तनेजा को शक हुआ और उन्होंने दिल्ली पुलिस के एक स्थानीय SHO से बात करने की कोशिश की, तो साइबर ठगों ने उसी SHO को वीडियो कॉल पर धमका दिया। नकली जज ने कहा कि यह मामला सीधे सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में है और स्थानीय पुलिस इसमें दखल नहीं दे सकती।
प्रिंस खान ने रांची के व्यवसायी से मांगी रंगदारी, रुपये नहीं देने पर दी जान से मारने की धमकी
डॉ. तनेजा पूरी तरह टूट चुके थे। 24 दिसंबर से 9 जनवरी तक पूरे 15 दिन डॉक्टर कपल अपने घर में डिजिटल कैद में रहे।साइबर अपराधियों ने उन्हें अलग-अलग बैंक अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया।कभी जांच शुल्क, कभी जमानत, कभी कोर्ट वेरिफिकेशन के नाम पर पैसे ट्रांसफर कराए गए।हर बार फर्जी दस्तावेज भेजे गए। अरेस्ट मेमो, कोर्ट के आदेश, बैंक नोटिस, सरकारी जैसी दिखने वाली सील… सब कुछ नकली, लेकिन बेहद प्रोफेशनल। 15 दिनों में उनके अकाउंट से 14 करोड़ 85 लाख रुपये चले गए। वह पैसा जो उन्होंने UN में दशकों की मेहनत से कमाया था।दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। बैंक ट्रांजेक्शन, IP एड्रेस, कॉल रिकॉर्ड, फर्जी दस्तावेज सबकी जांच चल रही है।




